विनोद सिंह, जगदलपुर (नईदुनिया) Nagarnar Plant देश के विकास में योगदान देने के लिए एक और स्टील प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) का यह पहला स्टील प्लांट होगा। कंपनी अब तक बस्तर में लौह अयस्क का खनन ही करती थी पर अब स्टील का उत्पादन करने को भी तैयार है। एनएमडीसी ने स्टील प्लांट के विभिन्न संयंत्रों का परीक्षण शुरू कर दिया गया है। यानी अब प्रदेश के दूसरे एकीकृत इस्पात संयंत्र नगरनार ऑयरन एंड स्टील प्लांट की कोल्ड टेस्टिंग ने रफ्तार पकड़ ली है।

जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर ओड़िशा सीमा के करीब जगदलपुर ब्लॉक के नगरनार में स्थापित हो रहे तीन मिलियन टन सालाना उत्पादन क्षमता के इस स्टील प्लांट से इसी साल उत्पादन शुरू होने की संभावना है। अगले माह कमीशनिंग के एक महत्वूपर्ण चरण में कोक ओवन बैटरीज की हीटिंग की तैयारी कंपनी कर रही है। इसके पहले 28 सितंबर 2018 को चिमनी की हीटिंग का एक पड़ाव इस्पात संयंत्र सफलतापूर्वक पार कर चुका है। कोक ओवन की हीटिंग सात मार्च को होने की संभावना है। इसकी सफलता के बाद ब्लास्ट फर्नेस की कमीशनिंग की जाएगी जो उत्पादन शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम होगा।

पिछले साल से चल रही टेस्टिंग

मई 2019 में कोल्ड टेस्टिंग का काम शुरू हुआ था। नौ मेजर और 62 माइनर पैकेज को मिलाकर इस एकीकृत इस्पात संयंत्र में ब्लास्ट फर्नेस, कोक ओवन, सिंटर प्लांट, ऑक्सीजन प्लांट आदि दो दर्जन से अधिक संयंत्र हैं। विद्युत के 11 से अधिक सब स्टेशनों के अलावा रॉ मटेरियल हैंडलिंग सिस्टम जैसे मेजर पैकेज के काम तैयार हैं। आरएमएचएस, बाइ प्रोडक्ट प्लांट आदि कुछ में काम चल रहा है।

स्टील प्लांट की तकनीकी सलाहकार कंपनी मेकॉन के मार्गदर्शन में कोल्ड टेस्टिंग का काम लगातार जारी है। मार्च के प्रथम सप्ताह के अंत में एनएमडीसी के सीएमडी एन बैजेन्द्र कुमार का कंपनी के डायरेक्टर्स के साथ नगरनार स्टील प्लांट का दौरा प्रस्तावित है। इसी दौरे में कोक ओवन की हीटिंग व प्लांट को शुरू करने की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाना है।

भिलाई के बाद दूसरा एकीकृत इस्पात संयंत्र

नगरनार स्टील प्लांट सरकारी क्षेत्र का प्रदेश का दूसरा एकीकृत इस्पात संयंत्र होगा। भिलाई स्टील प्लांट की मौजूदा उत्पादन क्षमता 3.9 मिलियन टन सालाना है, जिसे विस्तारित कर 6.9 मिलियन टन तक ले जाने की योजना है। सेल के भिलाई स्टील प्लांट से उत्पादन चार फरवरी 1959 को शुरू हुआ था। नगरनार में रोमेल्ट तकनीकी पर आधारित स्टील प्लांट के लिए 23 सितंबर 2003 को तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने आधारशिला रखी थी। बाद में रूस से रोमेल्ट तकनीकी नहीं मिलने पर दोबारा तीन सितंबर 2008 को तत्कालीन स्टील मिनिस्टर रामविलास पासवान ने नगरनार आकर आधारशिला रखी थी। इस स्टील प्लांट का निर्माण तय समयावधि से करीब पांच साल पीछे चल रहा है।

पैदा होंगे रोजगार के अवसर

नगरनार स्टील प्लांट में वर्तमान में 1700 अफसर-कर्मी को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त है जबकि इसका तीन गुना लोग अप्रत्यक्ष रोजगार से जुड़े हैं। प्लांट चलाने के लिए प्रथम चरण में लगभग सात हजार अफसर-कर्मियों की जरूरत होगी। एक अनुमान के अनुसार प्लांट से क्षमता के अनुरूप उत्पादन शुरू होने पर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार का अवसर मिलेगा।

इनका कहना है

स्टील प्लांट में कोल्ड टेस्टिंग का काम सफलतापूर्वक जारी है। कोक ओवन की हीटिंग की तैयारी पूरी हो चुकी है। एनएमडीसी मुख्यालय से जैसे ही निर्देश मिलेगा कोक ओवन की हिटिंग शुरू कर दी जाएगी। प्लांट लगभग बनकर तैयार है।

- प्रशांत दास, अधिशासी निदेशक, नगरनार स्टील प्लांट

राज्य में निजी क्षेत्र में स्टील उत्पादन

प्रदेश का इकलौता निजी क्षेत्र का स्टील प्लांट प्रदेश के रायगढ़ में है। जिंदल के स्टील प्लांट में ब्लास्ट फर्नेस रूट पर 2.125 मिलियन टन और डीआरआइ रूट से 1.32 मिलियन टन स्टील का उत्पादन किया जा रहा।

रायपुर-बिलासपुर के आसपास करीब 150 स्पंज ऑयरन प्लांट और री-रोलिंग मिल्स भी हैं। इसे सेकंडरी स्टील प्लांट कहा जाता है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay