हेमंत कश्यप, जगदलपुर। बकावंड वन परिक्षेत्र अंतर्गत मालगांव जंगल में मिली जिस गर्त को ग्रामीण नई गुफा बता रहे हैं। दरअसल वह पुराना भूमिगत जलमार्ग है। ग्रामीण इसे ढाबाखोदरा , भालू खोदरा कहते हैं। मालगांव सरपंच और कुछ ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डाल जलमार्ग के मुहाने को चौड़ा कर सैकड़ों लोगों को यहां प्रवेश दे रहे हैं। बताया गया कि मालगांव में कुछ लोगों ने गुफा में शिवलिंग होने का सपना देखा, बस इसलिए यहां खुदाई कर डाली।

जिला मुख्यालय से लगभग 11 किमी दूर मालगांव वन कक्ष क्रमांक 63 है। मालगांव जंगल में जिस जगह पर नई गुफा खोज की बात कहीं जा रही है। वह इलाका पथरीला और ढलान लिए हुए है। मालगांववासी जंगल के विशाल गड्ढे को ढाबा खोदरा, जलकुंड और भालू खोदरा के नाम से जानते हैं। सैकड़ों वर्षो से बरसाती पानी विशाल गड्ढे में समाता आ रहा है। ग्रामीण कुंड को देवस्थल मान, कभी भीतर प्रवेश करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।

मालगांव के सरपंच बलराम बघेल ने बताया कि गुफा में शिवलिंग होने का स्वप्न गांव के हेमराज कश्यप तथा कुछ ग्रामीणों ने देखा। उनकी बातों पर विश्वास कर तथा ग्रामदेव की पूजा अर्चना कर पहली बार नौ जनवरी को कुछ युवक गुफा में उतरे और सकुशल लौटे।

पहली बार गुफा में प्रवेश करने वाले हेमराज कश्यप ने बताया कि नौ जनवरी को वह कुछ साथियों के साथ गुफा में उतरा था। यह गुफा लगभग 50 फीट लंबी है। 10 फीट गहरे गड्ढे में उतरने के बाद करीब बीस फीट लंबी सकरी सुरंग है। यहां दो मार्ग है। एक 25 फीट गहरा कुंड है। वहीं दूसरा रास्ता आगे की तरफ बढ़ा है। कुएं में पानी भरा है। कुए के अंदर एक और रास्ता है। यह जानकारी ग्रामीणों को मिलने के बाद लोगों की भीड़ यहां उमड़ रही है।

गत 17 जनवरी को सरपंच बलराम बघेल के नेतृत्व में बच्चों सहित 15 ग्रामीणों ने गुफा के प्रवेश द्वार को चौड़ा कर दिया। परंतु ऐसा करने के पहले सरपंच ने वन विभाग या भूगर्भशास्त्रियो से कोई अनुमति नहीं ली। उन्होने ही बताया कि पहली बार जब गर्त में प्रवेश किए थे तब ऑक्सीजन की कमी महसूस हुई थी।

इसके बावजूद गुफा द्वार की मिट्टी खोद इसे चौड़ा किया गया तथा प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोगों को गुफा में प्रवेश दिया जा रहा है।

भूगर्भशास्त्री अमितांशु झा तथा अन्य जानकारों ने बताया कि मालगांव में प्राप्त गुफा भूमिगत जलमार्ग है। एक तरह से हम कह सकते हैं कि प्रकृति नई गुफा गढ़ रही है। पानी के तेज बहाव से मिट्टी बह गई और चट्टानों के मध्य जलमार्ग बन गया। बस्तर में ऐसे कई स्थल है जिसे नई गुफा का प्रादुर्भाव माना जा सकता है। मालगांव में गुफा निर्माणाधीन है। और यहां कोटमसर, दंडक या कैलाश गुफा की तरह चूना पत्थरों की संरचनाएं नहीं है।

300 वर्ष पुराना भूमिगत जलमार्ग

मालगांव वन कक्ष 63 अंतर्गत लगभग 300 वर्ष पुराना भूमिगत जलमार्ग है। मालगांव के सरपंच और ग्रामीण वन विभाग से अनुमति लिए बगैर जल मार्ग में खुदाई किए हैं। कथित गुफा में प्रवेश बंद करने हेतु सरपंच को पत्र लिखा जा रहा है।

जेपी दरो, रेंज प्रभारी बकावंड

Posted By: Nai Dunia News Network

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