Navratri 2020 जगदलपुर। राजबाड़ा परिसर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर में श्रद्घालु इतना अधिक फूल और हार लाते हैं कि सभी को मांईजी के सामने अर्पण करना मुश्किल हो जाता है, इसलिए फूलों का सदुपयोग करते हुए मंदिर के सहायक पुजारी गर्भगृह के सामने करीब 20 साल से फूलों की रंगोली बनाते आ रहे हैं। यह प्रक्रिया से जहां मांईजी का दरबार और सुन्दर हो जाता है, वहीं श्रद्घालुओं द्वारा अर्पित फूलों का सम्मान भी हो जाता है। शहर मध्य मां दंतेश्वरी मंदिर का निर्माण वर्ष 1890 में तत्कालीन राजाओं ने कराया था। बस्तर दशहरा की लगभग सभी प्रमुख रस्में यहीं संपन्न होती हैं, इसलिए यह मंदिर काफी चर्चित है। प्रतिदिन यहां सैकड़ों श्रद्घालु पहुंचते हैं। वे मांई जी को हार के अलावा विभिन्न प्रकार के फूल भी अर्पित करते हैं। दंतेश्वरी मंदिर के सहायक पुजारी बताते हैं कि यहां दोनों पुजारियों का काम बॅंटा हुआ है। बारी- बारी से वे सप्ताह में तीन- चार दिन पूजा विधान निपटाते हैं। मंदिर में प्रतिदिन 10-15 किग्रा फूल लाए जाते हैं।

इन सभी को देवी के चरणों में रखना संभव नहीं है, इसलिए अर्पण के बाद इन्हे वहां से हटा लिया जाता है। इन्हीं संग्रहित फूलों से वे गर्भगृह के सामने आकर्षक सजावट करते हैं। इसके चलते फूलों का सदुपयोग भी हो जाता है वहीं श्रद्घालुओं की आस्था भी बनी रहती है।

करीब 20 साल से वे मंदिर में फूलों की रंगोली बनाते आ रहे हैं। इस कार्य से उन्हे आत्मीय खुशी भी मिलती है। दशहरा, नवरात्रि, होली- दीपावली, बसंत पचंमी, कार्तिक एकादशी आदि विशेष पर्वों पर कई श्रद्घालु भी मांईजी का दरबार सजाने पहुंचते हैं।

Posted By: Sandeep Chourey

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