Naxalites In Jagdalpur: अनिल मिश्रा. जगदलपुर (नईदुनिया)। छत्‍तीसगढ़ में बस्तर के किशोरवय नाबालिगों की भर्ती कर नक्सली उन्हें सीधे हिंसा की आग में झोंक रहे हैं। इसका पता शनिवार को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली मुठभेड़ में मारे गए 26 नक्सलियों की शिनाख्त के बाद हुआ है। इनमें से आठ ऐसे नक्सली हैं जो बस्तर के हैं।

बस्तर के जिन नक्सलियों के नाम मृतकों की सूची में आए हैं, उनमें से ज्यादातर 17-18 साल के लड़के हैं। बस्तर के जंगल में इनकी भर्ती कर दो-तीन महीने की ट्रेनिंग दी गई और फिर अर्धसैन्य बलों से लड़ने के लिए भेज दिया गया। विडंबना यह है कि बस्तर के जो नक्सली दूसरे राज्यों में लड़ रहे हैं उनके स्वजन को भी नहीं पता कि वे कहां हैं और क्या कर रहे हैं। बस्तर के जंगल नक्सलियों के रिक्रूटमेंट सेंटर (भर्ती केंद्र) बने हुए हैं।

दंतेवाड़ा पुलिस ने हाल के दिनों में अपने जिले के नक्सलियों का सर्वे किया तो पता चला कि 110 युवा ऐसे हैं जिन्होंने नक्सलवाद का दामन तो थामा है पर जिले में या आसपास के जिले में सक्रिय नहीं हैं। दंतेवाड़ा एसपी डा. अभिषेक पल्लव बताते हैं कि बस्तर के अंदरूनी इलाकों से युवाओं और किशोरों को बरगलाकर नक्सली देश के दूसरे राज्यों में भेज रहे हैं। ज्यादातर मामलों में उनके परिवारजनों को यह नहीं पता होता है कि उनके बच्चे कहां हैं।

एक बार बाहर जाने के बाद उनसे संपर्क का कोई जरिया नहीं बचता है। सुख-दुख में भी उनके बच्चे गांव नहीं आ पाते हैं। कभी कभी तो उनके मुठभेड़ में मरने की खबर भी नहीं पहुंच पाती है। उन्होंने कहा कि अभी गढ़चिरौली में जो नक्सली मारे गए हैं उनमें दंतेवाड़ा का कोई नहीं है। सब आसपास के सुकमा, बीजापुर आदि जिलों के हैं। बस्तर आइजी सुंदरराज पी का कहना है कि ऐसे युवाओं के स्वजन की काउंसिलिंग का कार्यक्रम बनाया गया है जो नक्सलवाद की ओर आकर्षित हुए हैं।

फोर्स के जवान नक्सलियों के घरों में जाकर उनके माता पिता को समझा रहे हैं कि अपने बच्चों को हिंसा की राह पर न भेजें। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट में बताया गया है कि बस्तर के पड़ोसी नक्सल प्रभावित राज्यों महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, ओड़िशा, तेलंगाना में नक्सलियों को नए कैडर नहीं मिल पा रहे हैं। झारखंड, पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में भी उनके पास कैडर का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसकी भरपाई वे बस्तर के किशोरों की भर्ती करके कर रहे हैं।

दंडकारण्य में मनमानी

साल 2004 में एमसीसी (माओइस्ट कम्यूनिस्ट सेंटर) व पीडब्ल्यूजी (पीपुल्स वार ग्रुप) के विलय के समय नक्सलियों ने जो दस्तावेज जारी किए थे उनमें कहा गया था कि दंडकारण्य को आधार इलाका बनाकर देश में विस्तार करेंगे। दंडकारण्य को आधार इलाका बनाने के बाद उन्होंने महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में नया एमएमसी जोन बनाया तो यहां से लड़ाके भी भेजे गए। बस्तर के आदिवासियों में जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर नक्सली मनमानी कर रहे हैं। उनके बच्चों की भर्ती करने या उन्हें हिंसा में झोंकने की अनुमति लेना भी जरूरी नहीं समझते हैं।

इस साल भर्ती किए 22 नक्सली

नक्सलियों ने इस साल दरभा डिवीजन में 22 नई भर्ती की है। दंतेवाड़ा एसपी डा. अभिषेक पल्लव ने बताया कि नक्सलियों के दरभा डिवीजन का विस्तार बस्तर, दंतेवाड़ा व सुकमा जिलों के बीच है। यह बड़ा इलाका है। पुलिस पता लगा रही है कि जिन नए लड़कों की भर्ती की गई है वे इन दिनों कहां हैं। उनके माता पिता की भी तलाश की जा रही है। बस्तर के अलग-अलग इलाकों से और भी नई भर्तियोंं की सूचना है। पुलिस प्रयास कर रही है कि बस्तर को नक्सल भर्ती केंद्र बनने से बचाया जाए।

Posted By: Kadir Khan

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