जगदलपुर। राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए केंद्र में सत्ताधारी एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) द्वारा आदिवासी चेहरा द्रौपदी मुर्मू को प्रत्याशी घोषित करने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने खुशी जताई है। अरविंद नेताम पिछले 30 सालों से आदिवासी वर्ग से राष्ट्रपति बनाने का आह्वान राजनीतिक दलों से करते रहे हैं। दो बार केंद्र में मंत्री रहे नेताम की गिनती कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी नेताओं में हैं। उनके द्वारा राष्ट्रीय स्तर के आदिवासी सम्मेलनों में भी समय-समय पर अपनी इस मांग को लेकर आवाज बुलंद की जाती रही है।

यही कारण है कि आदिवासी वर्ग से राष्ट्रपति पद का उम्मीद्वार बनाने की एनडीए की घोषणा से खुश नेताम ने बुधवार सुबह मुर्मू से फोन पर चर्चा कर बधाई दी। उन्होंने साल 2012 में केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) की सरकार थी उस समय कांग्रेस का सदस्य रहते हुए भी चुनाव में विपक्ष के राष्ट्रपति पद के उम्मीद्वार आदिवासी नेता पीए संगमा के समर्थन में विभिन्ना राज्यों का दौरा कर चुनाव प्रचार किया था। इसके कारण कांग्रेस से छह साल के निलंबित होना पड़ा था। हालांकि बाद में समय से पहले ही उनकी पार्टी में वापसी हो गई थी। नईदुनिया से चर्चा में नेताम ने कहा कि राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए मतदाता और उनके वोट की वैल्यू की तस्वीर साफ होती है इसलिए जीत-हार की स्थिति भी लगभग स्पष्ट होती है।

सबको मौका तो आदिवासी को क्यों नहीं

अरविंद नेताम ने एनडीए द्वारा आदिवासी महिला को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी घोषित करने को बड़ा निर्णय बताया है। नईदुनिया से चर्चा में उन्होंने कहा कि उनका मानना रहा कि जब सबको इस पद तक पहुंचने का अवसर मिला तो मौका आदिवासी वर्ग को भी मिलना चाहिए। आदिवासी इस देश के मूल निवासी हैं। देश की कुल आबादी में करीब नौ फीसद आदिवासी हैं। अनुसूचित जाति वर्ग की आबादी भी 17 फीसद के आसपास है। आजादी के 75 सालों में आदिवासी वर्ग ही ऐसा है जिससे कोई व्यक्ति देश के सर्वोच्च पद तक नहीं पहुंच पाया है। देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है और यदि इस अवसर पर राष्ट्रपति पद पर आदिवासी वर्ग से चुना जाता है तो यह समाज के लिए भी सुखद होगा।

1993 में उठाई भी सबसे पहले मांग

अरविंद नेताम ने कहा कि वह सक्रिय राजनीति में इन दिनों कम समय ही दे पाते हैं लेकिन सामाजिक कार्यो में उनकी सक्रियता है। नेताम ने बताया कि 1993 में देश की राजधनी दिल्ली में अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद का सम्मेलन हुआ था। तब गुजरात के सोमजी भाई दामोर परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वह महासचिव थे। उस सम्मेलन में सबसे पहले आदिवासी वर्ग से राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए प्रत्याशी बनाने राजनीतिक दलों से सार्वजनिक आह्वान किया गया था। केंद्र सरकार में तब तक किसी आदिवासी नेता को केबीनेट मंत्री का पद नहीं मिला था इसके लिए भी समाज के द्वारा आवाज बुलंद की गई थी। जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने पीए संगमा को राज्यमंत्री से पदोन्नात कर केबीनेट मंत्री बनाया था।

Posted By: Nai Dunia News Network

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