जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में कर्ज माफी के बाद नये सिरे से किसानों को ऋण वितरण के बाद भी सहकारी समितियों तथा किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं आया है। कोरोना संक्रमण के रोकथाम के लिए लगाए गए लाकडाउन से न केवल किसानों को दिए गए अल्पकालीन ऋण की वसूली बल्कि चालू सीजन में ऋण वितरण पर भी प्रभाव डाला है।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में एक अप्रैल से 30 सितंबर तक किसानों को अल्पकालीन ऋण का वितरण किया जाता है किसान यदि 31 मार्च के पूर्व लिए गए ऋण को पटा देता है तो उसे मूलधन पर कोई ब्याज नहीं देना पड़ता है। बस्तर संभाग के सात जिले बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर जिले में गत वित्तीय वर्ष 2020-21 में 448 करोड़ रुपये ऋण वितरण का लक्ष्‌य निर्धारित किया गया था और एक लाख 21 हजार 213 किसानों को 439.32 करोड़ का ऋण वितरण किया गया जो कि लक्ष्‌य का 98 फीसद रहा। इस बीच धान खरीदी भी हो गई पर बैंक की ऋण वसूली अपेक्षाकृत नहीं रही है।

इसके पहले वित्तीय वर्ष 2019-20 में बैंक ने 75.08 फीसद वसूली की थी जो संतोषजनक नहीं था वहीं वित्तीय वर्ष 2020-21 में वसूली इससे भी दस फीसद घटकर 65.23 रह गई है। 439.32 करोड़ में से महज 426.44 करोड़ की ही वसूली हुई है। इसमें से 388.53 करोड़ रुपये लिंकिंग यानि किसानों ने सरकार को धान देकर पटाया है। किसानों से अभी 12.88 करोड़ रुपये वसूली करना शेष है।

लक्ष्‍य का बीस फीसद भी नहीं बंटा कर्ज

बस्तर संभाग के सात जिलों में 2021-22 के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक द्वारा 453.96 करोड़ रुपये ऋण वितरण का लक्ष्‌य रखा गया है। मानसून के पूर्व किसान खेती-किसानी की तैयारी में व्यस्त हैं पर एक अप्रैल से सात जून की स्थिति में बैंक 14090 किसानों को 66.17 करोड़ का ऋण ही उपलब्ध करा पाया है, जबकि गत वर्ष इसी दौरान 29097 किसानों को 150.87 करोड़ रुपये का अल्पकालीन ऋण वितरण किया जा चुका था। बैंक किसानों को प्रति हेक्टेयर असिंचित कृषि भूमि के लिए 43 हजार रुपये का ऋण उपलब्ध करा रहा है जिसमें 26 हजार नकद व 17 हजार रुपये की सामग्री शामिल है।

रकबा में कटौती भी एक कारण

अपने दिए गए अधिकतम कर्ज की वसूली बैंक धान की लिकिंग खरीदी के दौरान करता है। लिंकिंग के माध्यम से कर्ज वसूली में किसानों को भी परेशानी नहीं होती है लिए गए कर्ज को अपनी उपज बेचकर पटा देते हैं। सूत्रों के अनुसार धान खरीदी के दौरान बारदानों की किल्लत तथा रकबा में कटौती के कारण अधिकांश किसान इस साल उपज बेचकर कर्ज नहीं पटा पाए हैं।

बैंक की शाखाओं में बढ़ रही भीड़

कोरोना संक्रमण की वजह से जहां सहकारी समितियों में अल्पकालीन ऋण के प्रकरण बनाने के काम में तेजी नहीं आ रही है। वहीं किसानों की भीड़ सहकारी बैंक की शाखाओं में लगातार बढ़ रही है। संभाग के धान बेचने वाले 167870 किसानों के खाते में 21 मई को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत प्रथम किश्त की राशि 116 करोड़ 83 लाख 54 हजार रुपये जमा हुए हैं। ऋण प्रकरण समय पर नहीं बनने के कारण किसान इस राशि से खरीफ सीजन के लिए खाद-बीज खरीद रहे हैं जिसकी वजह से बैंक की शाखाओं में किसानों की भीड़ लगातार बढ़ रही है

मुख्य पर्यवेक्षक का पक्ष

-कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लगे लाकडाउन की वजह से किसानों से ऋण की वसूली और अल्पकालीन ऋण वितरण व्यवस्था प्रभावित हुई है। जून माह के अंत तक ऋण वितरण की स्थिति में सुधार लाने का लक्ष्‌य लेकर काम किया जा रहा है।

-एसए रजा, मुख्य पर्यवेक्षक जिला सहकारी केंद्रीय बैंक जगदलपुर

कुल वसूली का विवरण

जिला नकद लिंकिंग ब्याज योग

बस्तर 1038.89 9287.33 0.00 10326.22

कोंडागांव 492.95 7844.13 194.34 8531.42

नारायणपुर 296.12 1081.94 0.00 1378.06

कांकेर 919.50 14842.36 161.62 15923.48

दंतेवाड़ा 193.51 503.27 1.28 698.06

सुकमा 139.03 1719.44 1.40 1859.87

बीजापुर 352.83 3574.77 0.00 3927.60

योग 3432.83 38853.24 358.64 42644.71

स्त्रोत- जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित जगदलपुर

Posted By: Nai Dunia News Network

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