कोंडागांव। राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था की समृद्धि के उद्देश्य से महत्वाकांक्षी गोठान योजना संचालित कर गोठानों को बहु गतिविधि केंद्रों के रूप में विकसित करने प्रयासरत हैं। वहीं गोठान संचालन की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, वे अधिकारी ही महत्वाकांक्षी योजना को लेकर उदासीन रहे।

वर्ष भर पहले गोठान योजना की जिले में शुरुआत होने के बाद संचालन की जवाबदारी जिम्मेदार अधिकारियों ने समूह की महिलाओं को हाथों छोड़ दिया, समूह की महिलाओं ने गोठान में कहीं गोबर खरीदी तो कहीं पशुपालन मुर्गी पालन आदि कार्य की शुरुआत भी की, लेकिन जिस उम्मीद से महिलाओं ने गोठान का कार्य हाथों में लिया था, चंद महीनों बीतने के बाद महिलाएं हानि की आशंका से गोठान से दूरी बनाने लगी।

तकरीबन साल भर पूर्व जिन गोठानों की शुरुआत हुई थी, साल भर तक उन गोठानों की सुध लेने किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने उचित नहीं समझा, हाल ही में मुख्यमंत्री के जिले में प्रस्तावित दौरे को देखते हुए जिले में स्थित राजस्व व आवर्ती गोठानों को विभागीय अमला पूरे दिन सवारने में जुटा है। हाल में जिले में स्थित करीब सभी गोठानों में मुख्यमंत्री के आंखों में धूल झोंकने पशुपालन मुर्गी पालन मछली पालन आदि बहू गतिविधियां संचालित करने की शुरुआत कर चुके हैं।

मर्दापाल के गोठान में तालाब खुदे रहने के बाद भी नवाचार का प्रयोग करते बायोप्लाक मत्स्य पालन की शुरुआत की है, जिसकी मुख्यमंत्री ने तारीफ करते अधिकारियों को प्रशंसा भी की। मछली पालन के लिए बनाए गए बायोफ्लाक में किसी तरह एक में पानी डालकर मछली पालन को प्रदर्शित किया, अन्य खाली पड़े रहे। वहीं विभागीय अधिकारी ने दावा किया प्रत्येक बायोप्लाक के निर्माण की कुल लागत एक लाख रुपए आई है तथा बेहतर मछली उत्पादन की बात कही। वहीं जिले के जागरूक नागरिकों का कहना है प्राकृतिक तालाब होने के बाद बायोफ्लाक मछली पालन के नवीन तकनीक का उपयोग कहां तक सफल हो पाएगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन यह शासकीय राशि के अपव्यय का एक जीता जागता सबूत लग रहा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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