नईदुनिया, जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिला बस्तर में नक्सलियों के खात्मे के लिए ऑपरेशन प्रहार-3 शुरू करने की तैयारी की जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार के इस संयुक्त आपरेशन में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों के बीच सामंजस्य से नक्सलियों के कोर इलाके में घेराबंदी करने की योजना है। बस्तर में ऑपरेशन ग्रीन हंट और ऑपरेशन हाका के तहतनक्सलियों को बैकफुट में धकेलने के बाद ऑपरेशन प्रहार शुरू किया गया है।

ऑपरेशन प्रहारवन और प्रहार-टू में सुरक्षाबलों को खासी कामयाबी मिली है। बीजापुर की घटना के बाद प्रहार-3 के तहत नक्सलियों की मांद में जाकर उन्हें नेस्तनाबूत करने की योजना है। पुलिस अधिकारियों की मानें तो नक्सलियों के टॉप लीडरों को घेरने के लिए जंगल में फोर्स को सीधे उतारने का ब्लू प्रिट तैयार किया जा रहा है।

खुफिया इनपुट के आधार पर बड़े ऑपरेशन करने की तैयारी की जा रही है। नक्सली ग्रामीणों को कवच बनाकर सुरक्षाबलों पर हमला कर रहे हैं। वह पर्चे और बैनर-पोस्टर के माध्यम से लोगों को सुरक्षा बलों के खिलाफ भड़काते हैं। बीजापुर की घटना के बाद नक्सलियों ने ताजा पर्चा जारी कर सुरक्षाबलों से कहा है कि वह ऑपरेशन प्रहार से दूर रहें।

लोकल लड़ाके शामिल करने से नक्सलियों को पहुंची चोट

बस्तर बटालियन में लोकल लड़ाकों को शामिल किया है। आत्मसमर्पण के बाद फोर्स का हिस्सा बने पूर्व नक्सलियों से नक्सलियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी वजह से नक्सली आत्मसमर्पण नीति का विरोध कर रहे हैं।

बस्तर के 110 गांवों में कैंप स्थापित किये गये हैं, जिससे नक्सलियों की दहशत कम हुई है। ऑपरेशन प्रहार के दौरान बीते चार साल में फोर्स के जवानों ने 286 नक्सलियों को ढेर किया है। वहीं नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत चार साल के दौरान करीब तीन हजार नक्सलियों की गिरफ्तारी की गई है। 15 सौ नक्सली समर्पण भी कर चुके हैं। एंटी नक्सल ऑपरेशन होगा तेज

नारायणपुर जिले के एसपी मोहित गर्ग ने नईदुनिया से कहा कि एंटी नक्सल ऑपरेशन तेज किया जा रहा है। नक्सलियों के खात्मे के लिए जवान पूरी मुस्तैदी के साथ सर्च अभियान में निकल रहे हैं। सुकमा एसपी केएल ध्रुव ने बताया कि नक्सलियों घेराबंदी के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। कोई भी आपरेशन बिना व्यापक रणनीति के नहीं चल सकता। नाम तो सांकेतिक ही होता है।

नक्सलियों के खिलाफ बड़े आपरेशन -- -2005 में सलवा जुड़ूम अभियान जनता ने शुरू किया। ग्रामीणों का साथ मिलने से फोर्स को नक्सलवाद के खिलाफ काफी सफलता मिली। सलवा जुड़ूम सैन्य अभियान नहीं था। -इसके पहले 2009 में पुलिस ने बस्तर में आपरेशन ग्रीन हंट शुरू कर दिया था। ग्रीन हंट में नक्सल इलाकों में दबिश देने की रणनीति बनी थी। -इस अभियान से नक्सलवाद सड़कों से सिमटकर जंगल में छिप गया।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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