जगदलपुर। इंसानों के बीच सबसे लोकप्रिय पशु अगर कुत्ता होता है तो पक्षियों में तोता, क्योंकि तोता समझदार पक्षी होता है। इस वजह से तोता हमेशा इंसानों का चहेता रहता है। जगदलपुर से ऐसे ही एक तोते और इंसान की दोस्‍ती की कहानी सामने आई है। जहां महिला कंधे पर दो तोते बिठाकर रोज आड़ावाल से पांच किलोमीटर दूर संजय मार्केट जगदलपुर आती-जाती है। 50 वर्षीय मेरी (महिला का नाम) के कंधे पर तोते बैठे हुए देखकर यदि कोई कौतूहलवश रुककर उनके पक्षी प्रेमी होने के बारे में पूछने लगे तो उसका एक ही जवाब होता है। ये मेरे सोनू-मोनू हैं। प्यार से मुन्ना भी कहती हूं। दोनों ढ़ाई साल के हो गए हैं और मेरे बच्चे के समान हैं।

मेरी बतातीं हैं कि यदि वह कभी घर पर छोड़कर अकेले कहीं निकल जाए तो दोनोें तोते तेज आवाज में चिल्लाने लगते हैं, मानों नाराजगी जता रहे हों। कभी-कभी ये दुख प्रकट करने धीमे स्वर में कुछ इस तरह आवाज निकालते हैं, जैसे रो रहे हों। घर पर भी खुले रहते हैं और पुकारते ही तुरंत मेरी के पास आ जाते हैं। मेरी ग्राम आड़ावाल में सरपंच पारा में रहती है। वह संजय मार्केट में फल की छोटी सी दुकान लगाती है।

आड़ावाल से रोज सुबह आठ से नौ बजे के बीच कंधे के दोनों और तोते बिठाकर (सोनू-मोनू) पैदल घर से 200 मीटर दूर मेन रोड पर आकर आटो पकड़कर शहर संजय मार्केट आती हैं। दिन भर दोनों तोते उसकी फल की दुकान में रहते हैं। फल खाते हैं और देर शाम दिन ढ़लने तक मेरी के साथ वापस घर लौट आते हैं। बिना किसी बंधन के कंधे पर बैठे ये तोते मेरी से दूर नहीं होते।

मुझे पक्षियों से बहुत प्यार है। उसके घर परिसर में पक्षी दिख जाए तो वह घर पर रहने से जरूर दाना चुगाती है। मेरी के पक्षी प्रेमी होने व जिगर से भी पालतू प्यारे तोते के बारेें यदि ज्यादा देर तक चर्चा की जाए तो उसका एक ही जवाब होता है। बस और कुछ मत पूछना, ये मेरे सोनू-मोनू हैं तोता नहीं।

आड़ावाल में मेरी जब कंधे पर तोते लेकर बाजार जाने के लिए निकलती है तो यदि कोई उसे पहली बार देखता है तो जानने सुनने की जिज्ञासा बढ़ जाती है। संजय मार्केट में भी उसकी पक्षी प्रेमी मेरी के नाम पर पहचान है। बाजार में मेरी दुकान पर कितनी भी व्यस्त क्यों न हो दोनों तोते उसके इर्द-गिर्द ही रहते हैं।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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