जगदलपुर। राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी करने के आरोप में भानपुरी में पदस्थ पटवारी उपेंद्र बघेल को सोमवार को निलंबित कर दिया गया। बघेल के खिलाफ निलंबन की यह कार्रवाई बस्तर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ओमप्रकाश वर्मा द्वारा की गई है। बघेल के खिलाफ यह कार्रवाई तोकापाल तहसील के विभिन्ना पटवारी हल्कों में पदस्थापना के दौरान शासकीय और निजी भूमि में की गई हेराफेरी के आरोपों पर की गई है।

निलंबन आदेश के अनुसार उपेन्द्र बघेल द्वारा पटवारी हल्का नंबर 15 मावलीभाटा स्थित खसरा नंबर 154 रकबा 3.28 हेक्टेयर पहाड़ चट्टान मद की भूमि को आसमन पिता आयतु जाति माड़िया के नाम पर दर्ज कर दिया गया है। इसी तरह पटवारी हल्का नंबर 15 मावलीगुड़ा के ग्राम गुर्रम स्थित भूमि जिसका खसरा नंबर 223 224, 225, रकबा कमशः 0.42, 2.19, 0.99 हेक्टेयर की शासकीय भूमि छोटे झाड़ के जंगल मद में दर्ज भूमि को कमशः कमल नाग पिता मोती नाग जाति माहरा, रमेश पिता धनेश्वर, जाति ब्राम्हण और बली नागवंशी के नाम पर भूमि स्वामी हक में दर्ज कर शासकीय भूमि का हेराफेरी करते हुए भुईयां में अंकित कर दिया गया है।

इसके साथ ही न्यायालय तहसीलदार, तोकापाल में विचाराधीन एक राजस्व प्रकरण में आवेदक सूर्यप्रताप सिंह विरूद्व जोगा पिता देव निवासी ग्राम गुर्राम स्थित भूमि खसरा नंबर 222 / 1 को उपेन्द्र बघेल द्वारा खसरा नंबर 222 / एक ख रकबा 2.00 हेक्टेयर भूमि में सूर्यप्रतापसिंह पिता भगवान दीन सिंह का नाम दर्ज कर दिया गया है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तोकापाल से प्राप्त लिखित प्रतिवेदन (नस्ती में) अनुशंसा अनुरूप, निजी खाते की भूमि (प्रकरण जो न्यायालय तहसीलदार, तोकापाल में विचाराधीन) और शासकीय मद की भूमि के अभिलेख में किसी अधिकारी के संज्ञान में लाए बिना, स्वेच्छा पूर्वक निजी स्वार्थ पूर्ति हेतु अभिलेख में हेरा-फेरी की पुष्टि होने की बात सामने आई है।

निलंबन अवधि में उपेन्द्र बघेल को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान किया जाएगा तथा उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय बस्तर निर्धारित किया गया है। ज्ञात हो कि नगरनार स्टील प्लांट प्रभावित क्षेत्र के साथ ही लोहंडीगुड़ा में टाटा प्रभावित रहे क्षेत्र के साथ ही औद्योगिक क्षेत्र के लिए प्रस्तावित डिलमिली मावलीभाटा इलाके में जमीन के राजस्व रिकार्ड में जमकर हेराफेरी की शिकायतें रही हैं लेकिन प्रशासन इक्का-दुक्का मामलों में ही कार्रवाई कर पाया है।

कचहरी के चक्कर काट रहे भूस्वामी

समूचे बस्तर संभाग में राजस्व रिकार्ड में हेराफेरी का खेल लंबे समय से जारी है। पूर्व संभागायुक्त जीआर चुरेंद्र ने राजस्व रिकार्ड में हेराफेरी व 170 ख के मामलों में कड़ाई शुरू की थी लेकिन एक साल के भीतर ही बस्तर से उनका स्थानांतरण हो गया। तहसील, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व व कलेक्टर न्यायालय में राजस्व रिकार्ड में हेराफेरी के मामले पंजीबद्ध हैं। भूस्वामी कचहरी का चक्कर काटने को विवश हैं। राजस्व मामलों के निपटारे को लेकर राजस्व विभाग से जैसी गंभीरता की उम्मीद की जाती है वैसी अब तक दिखाई नहीं दी है।

दलालों में साथ सांठगांठ

जमीन दलालों के साथ कुछ पटवारियों की सांठगांठ चर्चा में रही है। कुछ पटवारी जो लंबे समय से एक ही जगह या शहर व औद्योगिक क्षेत्र में आसपास ही पदस्थ हैं या रहे हैं कथित रूप से जमीन दलाली के आरोप इन पर भी लगते रहे हैं। जमीन के पुराने व वर्तमान राजस्व रिकार्ड में यदि मिलान कर लिया जाए तो बड़ी गड़बड़ी उजागर हो सकती है। पिछले छह माह में दो पटवारी व भू-अभिलेख शाखा के एक कर्मचारी को ऐसे ही मामलों में निलंबित किया जा चुका है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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