जगदलपुर । इमारती काष्ठ सागौन की कीमत एक लाख रुपए प्रति घनमीटर तक पहुंच गई है, वहीं साल की कीमत भी 50 हजार रुपए से कम नही है। इसके बावजूद वनांचल के ग्रामीण इमारती काष्ठ की कीमत समझ नहीं पाए है और इस काष्ठों से अभी भी अपने घरों की बाड़ बना रहे हैं। इतना ही नही, इनकी अंगीठी में भी इन दिनों यही लकड़ियां जल रही हैं। बस्तर के वनांचल में रहने वाले ग्रामीण सुरक्षा के हिसाब से परंपरानुसार अपने घरों में लकड़ियों से बाड़ बनाते हैं और इस कार्य के लिए जो भी लकड़ी इन्हें सुलभ होती है, उसे ही काट कर बल्ली बनाकर अपने घरों के चारों ओर बाड़ बना लेते हैं।

इतना ही नहीं इनकी बकरियां और सुकरों के ढड़बे भी मोटी लकड़ियों के बने होते हैं ताकि हिंसक वन्यप्राणी से इनकी सुरक्षा हो सके। इस कार्य के लिए ग्रामीण सागौन, साल, बीजा जैसे इमारती पेड़ों को काट रहे हैं और इनसे ही सुरक्षा घेरा बना रहे हैं।

बताया गया कि जब से ग्रामीणों को वन अधिकार पट्टा मिला है, लोग पेड़ों को ज्यादा काटने लगे हैं। मोटी लकड़ियों का चिरान बना कर बेच रहे है, वहीं मोटी बल्लियों से अपने खेतों के अलावा घरों की बाड़ बना रहे हैं। इनके घरों की बाड़ में सागौन, साल जैसी महंगी लकड़ियों को लगा हुआ देखा जा सकता है।

नईदुनिया संवाददाता ने मंगलवार को रंधारीपारा, पटेलपारा, गोपापदर, गेहूंपदर, नेतानार, कोलावाड़ा, मिलकुलवाड़ा आदि गांवों का दौरा किया, लगभग सभी गांवों में नए काष्ठ से बाड़ तैयार किया गया है।

इतना ही नही ठंड होने के कारण इनके आंगन की अंगीठी में भी साल- सागौन के गोले जल रहे हैं। इस दिशा में वन विभाग भी उदासीन है। वन कर्मी ग्रामीणों को समझा नही पा रहे हैं। इसका फायदा खुले आम लकड़ी तस्कर उठा रहे हैं।

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