जगदलपुर। Political News: डेढ़ दशक के इंतजार के बाद प्रदेश की सत्ता में लौटी कांग्रेस सरकार का आधा कार्यकाल बीतने के बाद गुरुवार रात को निगम मंडल में नियुक्ति संबंधी बहुप्रतीक्षित सूची राजधानी से जारी हुई और यहां बस्तर के नेताओं के चेहरे लटकते देर नहीं लगी। संभाग की सभी विधानसभा सीटें कांग्रेस की झोली में डालने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि विधानसभा चुनाव में बड़ा काम किया था इसलिए मंत्रिमंडल और निगम मंडल में यहां से ज्यादा से ज्यादा लोगों को मौका देकर इनाम भी बड़ा दिया जाएगा, लेकिन स्थानीय नेताओं की नजर में ऐसा नहीं हुआ।

गुरुवार रात नौ बजे के बाद निगम मंडल में नियुक्ति संबंधी दूसरी सूची इंटरनेट मीडिया पर वायरल होते ही सूची में शामिल नामों में नेता अपना नाम तलाशते नजर आए। निगम मंडल में अध्यक्ष, सदस्य पद केे दावेदार रहे नेताओं ने एक दूसरे को फोन लगाया और अपनी खीज निकाली। दूसरे दिन शुक्रवार शाम को तीसरी सूची भी जारी हुई और एक बार फिर बीती रात जैसी सक्रियता नेताओं में देखने को मिली। सूची जारी होने के बाद यहां नेताओं के चेहरे लटके हुए हैं। कइयों ने मोबाइल के स्विच आफ कर दिए हैं। इन नाराज नेताओं में कुछ ने राजधानी रायपुर में प्रदेश कांग्रेस संगठन और सरकार में बैठे बड़े नेताओं को फोन लगाकर मौका नहीं मिलने का हवाला देते नाराजगी जताई।

स्थानीय वरिष्ठ नेताओं के साथ जिन्हें निगम मंडल सदस्य बनने का मौका मिला हैं, उनका कहना था कि बस्तरिया क्या सदस्य के ही लायक हैं? इस सवाल के जवाब में राजधानी से जवाब आया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी पर कब्जा भी तो बस्तर का ही है। मीडिया से सार्वजनिक रूप से चर्चा करने से बचते हुए दो तीन नेताओं और सदस्य बनने वाले एक दो लोगों ने नईदुनिया के सामने नाम नहीं छापने की शर्त पर प्रदेश संगठन और सरकार दोनों को कोसने से परहेज नहीं किया। नेताओं ने बताया कि राजधानी फोन करने पर बोला गया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष, दो-दो महामंत्री, महिला कांग्रेस, युवक कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष पद बस्तर संभाग के नेताओं को एक तरह से पिछले विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के इनाम के रूप में ही तो दिया गया है। इसे देखते हुए निगम मंडल में अधिक पद मिलने की लालसा नहीं करना चाहिए।

पहली सूची में मिला था छह नेताओं को मौका

निगम मंडल में नियुक्ति संबंधी पहली सूची पिछले साल जारी हुई थी। उस सूची नारायणपुर विधायक चंदन कश्यप को राज्य हस्तशिल्प बोर्ड, वरिष्ठ नेता मिथलेश स्वर्णकार को छत्तीसगढ़ अक्षय उर्जा विकास अभिकरण, एमआर निषाद को मत्स्य बोर्ड का अध्यक्ष पद मिला था। इनके अलावा कांकेर से नितिन पोटाई और दंतेवाड़ा की कल्पना सिंह को सदस्य तथा छविंद्र कर्मा को पादप बोर्ड में उपाध्यक्ष पद दिया गया था। पिछले 24 घंटे के भीतर जारी हुई दूसरी और तीसरी सूची में बस्तर संभाग से बलराम मौर्य, अनुराग पटेल, नरेंद्र यादव, अजय सिंह, सुशांतो राय, राजेश नारा, बसंत ताटी, जानकीराम सेठिया, सोनूराम नाग तथा एक विधायक अनूप नाग को निगम-मंडल में सदस्य पद दिया गया है। तीनों सूची को मिलाकर संभाग से 16 नेताओं को मौका मिला है। इनमें तीन को अध्यक्ष पद और 13 लोगों को सदस्य के रूप में काम करने का अवसर दिया गया है। तीन अध्यक्षों में पिछले माह दो को कैबिनेट मंत्री और एक को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है।

कई थे दावेदार नहीं मिला मौका

बस्तर संभाग के सातों जिलों से कई नेताओं के नामों की चर्चा निगम-मंडल के दावेदारों में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही रही है। जब भी निगम-मंडल में नियुक्ति की सूची जारी होने की खबरें उड़ी हर बार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व महामंत्री मलकीत सिंह गैदू, शहर जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं महापौर रहे जतिन जायसवाल, वर्तमान अध्यक्ष राजीव शर्मा, प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री यशवर्धन राव, ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष बलराम मौर्य, ईश्वर खंबारी, ओंकार जसवाल, मनोहर लूनिया, सुशील मौर्य, दिनेश यदु, रमेश माधवानी, अतिरिक्त शुक्ला, अजय बिसाई, प्रशांत जैन आदि दो दर्जन वरिष्ठ-कनिष्ठ नेताओं का नाम दावदारी में आगे रहता आया है। सूची जारी होने पर इनमें केवल बलराम मौर्य को ही सदस्य के रूप में अवसर दिया गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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