जगदलपुर। बस्तर में प्राणदायिनी का दर्जा प्राप्त अंचल की प्रमुख नदी इंद्रावती के संरक्षण, जल संवर्धन के लिए बनने वाले प्राधिकरण के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को मंत्री का दर्जा देने का प्रस्ताव है। जल संसाधन विभाग छग शासन की ओर से वित्त विभाग को प्राधिकरण के गठन का जो प्रस्ताव भेजा गया है उसमें प्राधिकरण में एक अध्यक्ष और दो उपाध्यक्ष पद का प्रावधान किया गया है।

अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा प्राधिकरण के सेटअप में शामिल कर्मचारियों के लिए वेतन-भत्तों के साथ वाहन, बंगला आदि उपलब्ध कराने की भी बात कही गई है। विभागीय प्रस्ताव के अनुसार इंद्रावती नदी विकास प्राधिकरण का सलाना स्थापना व्यय लगभग एक करोड़ रूपये से अधिक होगा।

इसके अलावा प्राधिकरण के लिए कार्यालय भवन व अन्य सुविधाओं व संसाधन पर खर्च होने वाली अनुमानित राशि का आंकलन किया गया है। इंद्रावती नदी विकास प्राधिकरण के गठन का प्रारूप बस्तर विकास प्राधिकरण के समान ही रखा गया है।

बस्तर प्राधिकरण के अध्यक्ष को केबीनेट मंत्री व दोनों उपाध्यक्षों को राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त है। ज्ञात हो कि इंद्रावती विकास प्राधिकरण के गठन की घोषणा 30 मई को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यहां जगदलपुर में हुई बस्तर विकास प्राधिकरण की बैठक में किया था।

इसके बाद जल संसाधन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग को भेजा है। वित्त विभाग ने कुछ बिंदुओं पर दोबारा जानकारी मांगी है जबकि जल संसाधन विभाग मांगी गई सभी जानकारियां पहले से दे चुका है। वित्त विभाग को यही जानकारी दोबारा भेजी जा रही है।

अध्यक्ष-उपाध्यक्ष को मिलेगी निज सहायक की सुविधा

प्रस्ताव के अनुसार अध्यक्ष को दो और उपाध्यक्षों को एक-एक निज सहायक मिलेंगे। वाहन चालक, कार्यालयीन कर्मचारी का पूरा सेटअप रखा गया है। अध्यक्ष एवं दो उपाध्यक्ष तीनों के वेतन-भत्ते पर मासिक खर्च तीन लाख 45 हजार रूपये, चार निज सहायकों के वेतन-भत्ते पर दो लाख, वाहनों के पीओएल पर 60 हजार, कार्यालयीन स्टेशनरी पर मासिक खर्च 10 हजार, फोन, मोबाइल रिचार्ज पर छह हजार, वाहन चालकों के वेतन भत्ते पर हर माह 36 हजार रूपए का व्यय भार आएगा।

इन सब खर्चो को जोड़कर हर माह करीब सात लाख रूपये की राशि होती है। इसके अलावा कुम्हारपारा चौक स्थित इंद्रावती परियोजना मंडल के पुराने भवन को तोड़कर 60 लाख रूपये से जीर्णोद्धार कराने, फर्नीचर, एसी आदि पर दस लाख रूपये, अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के लिए तीन ई-टाइप के बंगले तैयार करने डेढ़ करोड़ रूपए खर्च होने की संभावना जताई गई है।

कहां से आएगा बजट

वित्त विभाग को भेजे प्रस्ताव में बताया गया है कि इंद्रावती विकास प्राधिकरण के लिए बजट आदिवासी उपयोजना, जल संसाधन विभाग, नगरीय निकाय, पीएचई, वन विभाग आदि कई विभागों से लेने की योजना है। सभी विभाग मिलकर इंद्रावती नदी के संरक्षण और जल संवर्धन के लिए राशि प्राधिकरण के माध्यम से खर्च करेंगे। इस प्राधिकरण के स्थापना व्यय का वहन बस्तर एवं सरगुजा विकास प्राधिकरण की तर्ज पर किया जा सकता है।

दोबारा वित्त विभाग को प्रस्ताव दिया जाएगा

जल संसाधन विभाग के महानदी परियोजना के मुख्य अभियंता केएस ध्रुव ने नईदुनिया से फोन पर चर्चा में बताया कि वित्त विभाग को पहले जानकारी दी जा चुकी है। वित्त विभाग ने कुछ बिंदुओं पर दोबारा जानकारी मांगी है। जो कुछ दिनों में वित्त विभाग को भेज दी जाएगी। प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network