राजनांदगांव। राज्य सरकार के द्वारा शासकीय कर्मचारियों के वेतन वृद्धि को रोकने का आदेश शासकीय कर्मचारियों के प्रति अन्याय एवं उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। उसके बजाए मुख्यमंत्री और उनके मंत्रीगण तथा कांग्रेस के विधायक अपने मिलने वाले मानदेय में 30 फीसदी की कमी करते हुए केंद्र सरकार के तर्ज पर अगले दो साल के लिए विधायक निधि को कोरोना के आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए आत्म-समर्पित करे। राज्य के शासकीय कर्मचारियों के प्रति सरकार के इस आदेश का जमकर विरोध करते हुए जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष एवम जिला भाजपा के उपाध्यक्ष दिनेश गांधी ने कहा कि पूरे कोरोना के संकट काल मे अपने परिवार एवम स्वास्थ्य की चिंता किये बगैर सभी प्रकार के प्रशासनिक एवम जनहित के कार्यों को अंजाम देने वाले कर्मचारियों के वेतन वृद्धि को रोकने का फैसला राज्य सरकार के तानाशाही पूर्ण रवैये को प्रदर्शित करता है।

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शिक्षा, साहित्य और समाज अब तकनीक के दीवाने

राजनांदगांव। दिग्विजय कॉलेज के हिंदी विभाग के प्रो?ेसर डॉ. चन्द्रकुमार जैन ने कहा है कि तकनीक हमारे जीवन की बुनियादी शर्त बन चुकी है। अब परम्परा

के माध्यम पीछे रह होते जा रहे हैं। साहित्य, शिक्षा और समाज का हर पहलू नए ?माने की नयी प्रौद्योगिकी के पीछे चल रहा है। डिजिटल दुनिया ने लोकल से

ग्लोबल तक इंसान की सोच, कार्यक्षमता और काम करने के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। यही कारण है कि कोरोना महामारी के कालखंड में साहित्य की किताबें पढ़ी-गुनीं ही नहीं जा रहीं हैं, बल्कि उन्हें जिया भी जा रहा है। आज सूचना और संचार हमारे विचार और व्यवहार के संचालक बन गए हैं। डॉ. जैन ने कहा कि देखते ही देखते कोरोना और ऑनलाइन किताबों का अघोषित रिश्ता जुड़ गया है। दूसरी तरफ घर पर उपलब्ध नयी और पुरानी चुनिंदा किताबों की अलमारियों की कैद से एकबारगी मुक्ति भी मिल गयी। साहित्यकारों के पास भाषा की ताकत और संवेदना की सम्पदा भी है। मानवता के पक्ष में इससे बड़ी नेमत और कुछ नहीं हो सकती। लॉकडाउन में हमारा जीवन ऑनलाइन जैसा हो गया। यह स्वयं को बचाने और बांचने का कालखंड बन है।

यह कालखंड स्वयं को समझने का अवसर

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. केशरीलाल वर्मा के मुख्य आतिथ्य में शोध प्रकल्प द्वारा आयोजित तथा डॉ. सुधीर शर्मा द्वारा संयोजित

तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार के उद्घाटन सत्र में डॉ. जैन ने उक्त विचार विषय विशेषज्ञ व विशिष्ट वक्ता के रूप में व्यक्त किया। दूसरे दिवस उन्होंने

तकनीकी सत्र में भी भागीदारी की। डॉ. जैन ने कहा कि उन्होंने अनुभव किया कि यह कालखंड स्वयं को समझने का अनोखा अवसर है। ओशो के कहै कबीर दीवाना से लेकर फादर कामिल बुल्के की रामकथा तक मूल रूप में पढ़ ली। लिखा भी खूब और अपने यूट्यूब चैनल पर कोरोना जागरूकता से लेकर हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति के चुनिंदा फलसफों को अपलोड कर आनंद पाया। गौरतलब है कि उद्घाटन सत्र में कल्याण कॉलेज भिलाई के प्राचार्य डॉ. आरके साहू और साहित्यकार डॉ. सुशील त्रिवेदी ने प्रमुख अतिथि थे।

महामारी हमारी लापरवाही की कहानी

डॉ. जैन ने आगे कहा कि अभी ऐसा दौर है कि महामारी हमारी लापरवाही की कहानी कह रही है। साहित्यकार उस कहानी की समीक्षा कर रहे हैं। हमने आज तक यही सीखा कि आवश्यकता अविष्कार की जननी है और हम अपनी आवश्यकता बढ़ाते गए। धीरे-धीरे उनके बंदी भी बन गए। लेखनी का संसार लोगों के मेल जोल को वाणी देता रहा है किन्तु इस कठिन घड़ी में दूरियां इलाज का पर्याय बन गयी हैं। आज तक हम कहते रहे ?ंिदगी बनाना है तो घर से निकलो, पर बहरहाल हम कह रहे हैं कि जीवन बचाना है तो घर पर रहो। इसलिए साहित्य के प्रतिमान भी बदल गए हैं। हम घर पर ठहरे रहे लेकिन साहित्य बहुत तेज गति से घर-घर पहुंच गया।

आभासी या डिजिटल दुनिया ही रीयल

डॉ. जैन ने कहा कि आभासी या डिजिटल दुनिया ही ?लिहाल रीयल हो गयी है। लेकिन यह आने वाले समय की सा? आहट भी है। इससे मुंह फेरना अब संभव नहीं है। सूचना व संचार ही अब विचार-व्यवहार दूसरा नाम है। भावनात्मक दूरियां मिटने वाली आभासी दुनिया वास्तविक दूरियों को चुनौती भी दे रही है।

देश के कई बड़े प्रकाशन समूहों ने अपनी किताबें मुफ्त ऑनलाइन कर दीं। कोरोना पर शोध आधारित लेखन का सिलसिला चल पड़ा है। लोग कविताएं, कहानियां, शायरी, गीत सुन रहे हैं, सुना रहे हैं। किस्से कहानियों का हिस्सा बन रहे हैं। साहित्य सही माने में सबके हित में घर बैठे पहु?च रहा है। मजा तो यह है कि खुद को भूले कितने दिन हो गए हम यह भी याद कर रहे हैं। देश के कोने-कोने से ही नहीं, विदेश से भी लोग डिजिटल माध्यम से शब्दों के ज्यादा करीब आ गए हैं।

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महिला कुनबी समाज ने प्रवासी मजदूरों को दिया स्वल्पाहार

राजनांदगांव। शहर के कुनबी समाज संगठन के अध्यक्ष बसंत बहेकर ने बताया कि महिला कुनबी समाज संगठन राजनांदगांव की महिला पदाधिकारियों ने प्रवासी मजदूरों को सूखा स्वल्पाहार का वितरण किया। इस अवसर पर महापौर हेमा देशमुख, कुनबी समाज के पदाधिकारीगण भारती बहेकर, लक्ष्मी फुण्डे, पूर्णिमा बहेकर, रेखा मुनेश्वर, अंजली फुण्डे, अंशुका बहेकर, दामिनी एवं वैष्णवी फुंडे आदि कार्यकतर एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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