जगदलपुर। त्रेतायुग में भगवान राम वनवास काल में जिस रास्ते से होकर अयोध्या से देश के दक्षिण की ओर गए थे उस राम वनगमन पथ पर यहां जगदलपुर से 15 किलोमीटर दूर ग्राम रामपाल भी शामिल है। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग रामायणकालीन है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के प्रतिनिधियों ने मंदिर के जीर्णोद्धार एवं सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग की मांग राज्य शासन से की है।

विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्रीय विभाग मंत्री रवि ब्रह्चारी व बजरंगदल के विभाग संयोजक कमलेश विश्वकर्मा, विहिप के जिला प्रचार प्रसार प्रमुख रोहन कुमार, नगर सह संयोजक भवानी सिंह चौहान ने बुधवार को रामपाल का भ्रमण किया। उनके साथ सरपंच त्रिपति नागेश, विहिप नगरनार प्रखण्ड के अध्यक्ष पुजारी कैलाश ठाकुर, शंकर बघेल, जयराम ठाकुर और लिंगेश्वर महादेव मंदिर रामपाल समिति के सदस्य भी मौजूद थे। ग्रामीणों के अनुसार मान्यता है कि यहां से दक्षिण दिशा की ओर बढ़ने से पहले भगवान राम ने यहां रामपाल और फिर बाद सुकमा जिले के रामाराम में भूदेवी की आराधना की थी। लंका कूच से पहले जिस तरह देश के दक्षिण छोर पर समुद्र किनारे स्थित रामेश्वरम में श्रीराम ने शिवलिंग स्थापित कर पूजा-अर्चना की थी, उसी तरह यहां दंडकारण्य में रामपाल और रामाराम में भी शिवलिंग स्थापित कर आराधना की थी। ग्रामीणों का दावा है कि श्रीराम द्वारा स्थापित शिवलिंग जमीन में कितनी गहराई तक है इसका पता नहीं चला है।

सात पीढ़ियों से कर रहे सेवा

मंदिर के पुजारी कैलाश ठाकुर ने बताया कि वह सातवीं पीढ़ी के सेवक हैं। इससे पूर्व भी दूसरे परिवार की कई पीढ़ियों ने यहां सेवा की। प्राचीन काल में अघोरी बाबा भी यहां पूजन कार्य ध्यान किया करते थे। मंदिर पीछे प्राचीन तालाब है जो इस धार्मिक स्थल को और भी भव्य बनाता है। करनपुर पंचायत के आश्रित ग्राम रामपाल में 38 धाकड़ ठाकुर के परिवार हैं। पूरा गांव राम और शिव भगवान की पूजा करता है। यहां स्थित लिंगेश्वर शिव मंदिर कई किवदंतियों और दंतकथाओं से जुड़ा हुआ है। कैलाश सिंह ठाकुर ने बताया कि उनके पूर्वज करीब डेढ़ सौ साल से इस लिंगेश्वर शिव की पूजा करते आ रहे हैं। खुदाई के दौरान यहां शिवलिंग की प्राप्ति हुई थी।

अंग्रेज ने चढ़ाई थी मंदिर में घंटी

ग्रामीणों ने बताया कि शिवलिंग मंदिर परिसर की खुदाई में पुरानी घंटी मिली है। घंटी में 1862 और लंदन लिखा हुआ है। शोधकर्ताओं से मिली जानकारी के अनुसार तत्कालीन ब्रिटिश राज्यपाल ने यह घंटी मंदिर में चढ़ाई थी। वहीं पुरातत्व विभाग ने खोदाई में प्राप्त ईट और पत्थर एकत्र कर अध्ययन के लिए लेकर गए हैं। इसके अध्ययन से मंदिर की प्राचीनता का पता लगाया जा सकेगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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