सुमन कार्तिक, जगदलपुर। मानसून सीजन में अंचल में खेती किसानी का काम जोर पकड़ चुका है। लोग खेतों में सुबह से शाम तक काम पर लगे हैं। इन्हीं लोगों में 13 साल की अंजलि और 19 साल का उनका बड़ा भाई सुनील कर्मा भी शामिल हैं जो इन दिनों खेत में पसीना बहा रहे हैं। ग्राम पंचायत बड़े किलेपाल के पटेलपारा निवासी गरीब आदिवासी परिवार के इन दोनों भाई बहन को परिस्थितियों और परिवार की जिम्मेदारियों ने कलम थामने की उम्र में ही हल थामने को विवश कर दिया था। परिवार में तीन लोग हैं। भाई-बहन और मां लच्छन कर्मा तीनों खेती-किसानी के काम में जुटे हैं।

करीब चार साल पहले पिता सुको कर्मा के निधन के समय अंजलि की उम्र नौ साल थी। पिता के असामायिक निधन ने अंजलि को कम उम्र में ही हल चलाना सीखा दिया। कभी-कभी इस काम में अंजलि की बुआ मड्डो भी सहयोग कर खेत की जुताई करने में हाथ बंटा देती है। अंजलि ने कक्षा तीसरी तक पढ़ाई करने के बाद स्कूल छोड़ दिया वहीं भाई सुनील ने भी कक्षा सातवीं तक पढ़ने के बाद स्कूल जाना बंद कर दिया था। आज दोनों भाई-बहन को पढ़ाई छोड़ने का दुख होता है।

अंजलि बताती है कि वह खेत में हल चला रही होती है तो वहां सड़क से गुजरने वाले बच्चों को बस्ता लेकर स्कूल जाते देख उसके मन में भी पढ़ाई की ललक होती है। वह पढ़ना चाहती है पर कैसे दोबारा स्कूल से जुड़े यह वह समझ नहीं पा रही है। सुनील ने नईदुनिया से चर्चा में कहा कि मां लच्छन ने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा। वह अनपढ़ है। पिता ने कभी पहली कक्षा के बाद ही स्कूल छोड़ दिया था। इसके कारण बच्चों की पढ़ाई को लेकर माता-पिता ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। इसमें बड़ी गलती हमारी भी है जो हमने स्कूल छोड़ दिया। परिवार के पास दो एकड़ जमीन है। बरसात में एक फसल लेते हैं। साल के बाकी महीनों में मजदूरी और वनोपज संग्रहण को आर्थिक आय का जरिया बनाते हैं। इसी से साल भर का खर्च निलकता है।

पिछड़े इलाके में खेती ही मुख्य पेशा

बस्तर जिले का सबसे पिछड़ा इलाका बास्तानार विकासखंड को माना जाता है। यहां की 80 फीसद से अधिक आबादी आदिवासियों की है। खेती मुख्य पेशा है। सिंचाई के साधन नहीं के बराबर हैं इसलिए एक फसल खरीफ सीजन में ली जाती है। शिक्षा का प्रतिशत भी जिले में सबसे कम इसी इलाके में हैं। बीच में ही पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या अधिक है हालांकि पहले की अपेक्षा इसमें कुछ सुधार हुआ है।

महिलाओं का सहयोग पुरुषों से अधिक

आदिवासी बहुल बस्तर के ग्रांमीण क्षेत्र विशेषकर दक्षिण में कृषि कार्य और वनोपज संग्रहण में महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों की अपेक्षा अधिक है। यहां महिलाएं घर परिवार की जिम्मेदारी उठाने के साथ ही आर्थिक आय में भी बराबर की हिस्सेदारी देती हैं।

Posted By:

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close