जगदलपुर। नईदुनिया। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सारकेगुड़ा कांड की जांच कर रहे न्यायिक आयोग की रिपोर्ट कथित रूप से लीक हो गई है। दावा किया गया है कि रिपोर्ट में सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों ने नक्सल ऑपरेशन के नाम पर 17 ग्रामीणों को एकतरफा फायरिंग में मार डाला था। ग्रामीण निहत्थे थे। मृतकों में सात नाबालिग शामिल भी थे। रिपोर्ट विधान सभा के पटल पर रखे जाने से पहले लीक होने की सूचना से छत्तीसगढ़ सरकार सकते में है।

बीजापुर जिले के बासागुड़ा स्थित सारकेगुड़ा गांव में 28 व 29 जून 2012 को घटना हुई थी। पहले दिन 16 ग्रामीण और दूसरे दिन एक ग्रामीण पुलिस फायरिंग में मारे गए थे। घटना में एक जवान भी मारा गया था और छह जवान घायल हुए थे। पुलिस मारे गए ग्रामीणों को नक्सली बता रही थी लेकिन ग्रामीण विरोध में उतर आए थे। जुलाई 2012 मेें तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सरकार ने न्यायिक जांच आयोग के गठन का फैसला लिया था। 11 जुलाई 2012 को जबलपुर हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वीके अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोग ने जांच शुरू की। रिपोर्ट 17 अक्टूबर 2019 को शासन को सौंप दी गई है।

सुरक्षा बलों की गोलीबारी आत्मरक्षा के लिए नहीं थी

आयोग ने रिपोर्ट के निष्कर्ष में बताया है कि सुरक्षाबलों ने आत्मरक्षा में गोली नहीं चलाई थी। छह मृतकों के सिर पर गोली लगी थी। 10 मृतकों की पीठ पर रायफल की बट से चोट पाई गई थी। जवान की मौत सुरक्षा बलों की फायरिंग में हुई थी।

घने जंगल नहीं, खुले मैदान में जुटे थे ग्रामीण

दावा किया गया है कि जांच आयोग ने माना है कि सारकेगुड़ा, कोत्तागुड़ा और राजपेंटा के ग्रामीण 28 जून 2012 की देर शाम घने जंगल नहीं खुले मैदान में बैठक कर रहे थे। ज्ञात हो कि फोर्स ने आयोग के समक्ष दावा किया था कि बैठक नक्सलियों की मौजूदगी में घने जंगल में हो रही थी। जिसे आयोग ने नहीं माना है। हालांकि आयोग ने ग्रामीणों की भी इस बात से सहमति नहीं जताई है कि बैठक घटना के अगले दिन होने वाले बीज पंडुम त्योहार के लिए बुलाई गई थी।

30 लोगों की हुई गवाही

आयोग ने पीड़ित पक्ष के 17 एवं फोर्स तथा अन्य 13 लोगों को मिलाकर कुल 30 गवाहों का बयान दर्ज किया है। आयोग के गठन के बाद कई महीनों तक पीड़ित परिवारों की ओर से गवाह आयोग में बयान दर्ज कराने सामने नहीं आ रहे थे। बाद में पीड़ितों की ओर से गवाहों ने शपथ पत्र देकर बयान दर्ज कराया था।

विधानसभा की अवमानना : डॉ रमन

रिपोर्ट लीक होने पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि यह विधानसभा की अवमानना है। विधानसभा चलने के दौरान इस तरह रिपोर्ट को लीक करके सरकार ने बड़ा अपराध किया है। उन्होंने इसकी जांच कराए जाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। डॉ रमन ने कहा कि सारकेगुड़ा की जांच रिपोर्ट सरकार के पास एक महीने से पड़ी है। अवमानना के विषय को लेकर सोमवार को विानसभा में प्रश्न उठाएंगे।

जो कहना है सदन में कहेंगे : लखमा

आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट सोमवार को सदन में रखी जाएगी। जो भी कहना है, वह सदन में ही कहेंगे।

पहले भी गोपनीय सूचना हो चुकी है लीक

इससे पहले राज्य सरकार के कुछ गोपनीय पत्र भी लीक हो चुके हैं। एक गोपनीय पत्र के कारण सुप्रीम कोर्ट में सरकार की किरकिरी हो चुकी है। मामला निलंबित डीजी मुकेश गुप्ता के परिवार के सदस्यों का फोन टेप कराने से संबंधित था। रायपुर आइजी ने यह पत्र खुफिया विभाग को लिखा था, लेकिन वह लीक हो गया। इस पत्र के आधार पर गुप्ता सुप्रीम कोर्ट गए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की। जिससे सरकार की किरकिरी हुई थी।

Posted By: Hemant Upadhyay