जगदलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हुई पांच बहुचर्चित घटनाओं जिनकी जांच न्यायिक जांच आयोगों को सौंपी गई थी, उनमें तीन की रिपोर्ट सरकार को मिल चुकी है। इन घटनाओं का रहस्य लिफाफों बंद हो चुका है। हालांकि झीरम नक्सल कांड की जांच रिपोर्ट भी न्यायिक जांच आयोग ने पिछले साल ही सरकार को दे दी थी जिसे अधूरी बताते हुए राज्य सरकार ने तीन नए बिंदुओं को जांच में जोड़ते हुए आयोग का पुनर्गठन कर नए सिरे से रिपोर्ट मांगी है।

राज्य गठन के बाद जिन बहुचर्चित घटनाओं की जांच न्यायिक जांच आयोग को सौंपी गई है उनमें ताड़मेटला आगजनी कांड (टीएमटीडी घटना), सारकेगुड़ा कांड, एड़समेटा कांड, झीरम कांड और श्यामगिरी कांड शामिल है। इनमें झीरम और श्यामगिरी कांड की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। न्यायिक जांच आयोग इन घटनाओं की जांच कर रहे हैं। दूसरी ओर ताड़मेटला आगजनी कांड, सारकेगुड़ा व एड़समेटा कांड की रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा चुकी है। सारकेगुड़ा कांड की रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखे जाने से पहले ही लीक हो गई थी जिसे लेकर काफी होहल्ला मचा था। इस घटना के बाद सरकार की ओर से रिपोर्ट की गोपनीयता बरकरार रखने के लिए कई कदम उठाए गए। जिन तीन घटनाओं की जांच रिपोर्ट सरकार को मिल चुकी है उनमें से किसी भी रिपोर्ट पर अभी कार्रवाई शुरू नहीं की गई है।

कब हुई घटनाएं कब सौंपी गई जांच रिपोर्ट

ताड़मेटला आगजनी कांड

सुकमा जिले के कोंटा तहसील के नक्सल प्रभावित क्षेत्र स्थित ग्राम ताड़मेटला, मोरपल्ली व तिम्मापुर में 11 से 16 मार्च 2011 के बीच 259 वनवासियों के मकानों में आगजनी हुई थी। इस घटना में अधिकांश मकान जलकर राख हो गए थे। इस घटना की जांच जस्टिस टीपी शर्मा की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय विशेष न्यायिक जांच आयोग को सौंपी गई थी। यह पहली घटना थी जिसकी जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया था। आयोग ने चार दिन पहले 19 जनवरी 2022 को रिपोर्ट राज्य शासन को सौंप दी है। घटना की जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआइ ने भी की है जो पांच साल पहले ही अपनी रिपोर्ट दे चुका है।

सारकेगुड़ा कथित मुठभेड़ कांड

बीजापुर जिले के सारकेगुड़ा में जून 2012 में बीज पंडुम मनाने एकत्र हुए ग्रामीणों की बैठक में नक्सलियों की मौजूदगी की खबर पर पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई कथित मुठभेड़ में 17 लोगों की मौत हो गई थी। मारे गए लोगों में कुछ नाबालिग बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं। इस घटना की जांच सेवानिवृत्त जस्टिस व्हीके अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित एकल सदस्यीय विशेष न्यायिक जांच आयोग को सौंपी गई थी। इस आयोग ने 17 अक्टूबर 2019 को जांच रिपोर्ट राज्य शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट विधानसभा में रखे जाने से पहले की लीक होने के कारण काफी चर्चा में रही थी। जिसे लेकर बवाल मचा था।

एड़समेटा कथित मुठभेड़ कांड

बीजापुर जिले के ग्राम एड़समेटा में सारकेगुड़ा घटना की ही तर्ज पर 17 मई 2013 को पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई कथित मुठभेड़ की घटना में आठ लोग मारे गए थे। इनमें चार नाबालिग बच्चे भी शामिल थे। इस घटना की जांच सारकेगुड़ा कांड की जांच के लिए गठित जस्टिस व्हीके अग्रवाल की अध्यक्षता वाले न्यायिक जांच आयोग को सौंपी गई थी। न्यायिक जांच आयोग एड़समेटा कांड की जांच रिपोर्ट 26 जुलाई 2021 को राज्य शासन को सौंप चुका है। इस घटना की जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआइ द्वारा भी की जा रही है। सीबीआइ की एक टीम ने 2019 में घटनास्थल का दौरा किया था लेकिन रिपोर्ट अभी नहीं आई है।

झीरम नक्सल कांड

प्रदेश कांग्रेस के कई प्रमुख वरिष्ठ नेताओं को असमय ही छीन लेने वाला झीरम नक्सल कांड 25 मई 2013 को हुआ था। बस्तर जिले के दरभा विकासखंड के झीरम घाटी में सुकमा से लौट रही कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला कर नक्सलियों ने तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व विधायक उदय मुदलियार, नंदकुमार पटेल के पुत्र दीपक पटेल सहित पार्टी के नेताओं, सुरक्षा बल के जवानों व आम लोगों सहित 29 लोगों की जान ले ली थी। इस घटना की जांच जस्टिस प्रशांत मिश्रा की अध्यक्षता में गठित एकल सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग को सौंपी गई थी। इस आयोग द्वारा छह नवंबर 2021 को राज्यपाल को रिपोर्ट सौंपी गई थी। रिपोर्ट को अधूरी बताते हुए राज्य सरकार ने आयोग का पुनर्गठन कर तीन नए बिंदुओं को शामिल कर नए सिरे जांच पूरी करने के लिए आयोग का कार्यकाल बढ़ा दिया है। इस घटना की जांच केंद्र सरकार द्वारा एनआइए को सौंपी गई थी। एनआइए द्वारा जांच पूरी की जा चुकी है।

श्यामगिरी नक्सल कांड

दंतेवाड़ा जिले के कुंआकोंडा विकासखंड के श्यामगिरी के पास चुनाव प्रचार कर दंतेवाडा लौट रहे तत्कालीन भाजपा विधायक भीमा मंडावी के वाहन को नक्सलियों ने विस्फोट कर उड़ा दिया था। अप्रैल 2019 में हुई इस घटना में भीमा मंडावी व सुरक्षा बल के जवानों को मिलाकर पांच लोगों की मौत हुई थी। राज्य शासन ने घटना की जांच जस्टिस एससी अग्निहोत्री की अध्यक्षता में गठित एकल सदस्यीय विशेष न्यायिक जांच आयोग को सौंपी है। आयोग गवाहों का बयान दर्ज कर चुका है। बताया जाता है कि आयोग की जांच कार्रवाई अंतिम दौर में है। रिपोर्ट कभी भी शासन को सौंपी जा सकती है। इस घटना की जांच एनआइए को भी सौंपी गई है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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