जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलियों के पास अत्याधुनिक स्नाइपर वैपन पहुंचने से सुरक्षा बलों के माथे पर बल आ गया है। ड्रोन से सुरक्षा बलों के कैंपों की निगरानी के बाद अब माओवादियों को स्नाइपर प्रशिक्षण का खुलासा हुआ है। इससे यहां तैनात सुरक्षा बलों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। सुरक्षा बलों को और ज्यादा सतर्क रहने के निर्देश अफसरों ने दिया है। बस्तर आइजी सुंदरराज पी ने बताया कि हाल ही में दक्षिण बस्तर में एक मुठभेड़ के बाद नक्सल कैंप ध्वस्त किया गया था। जहां कुछ दस्तावेज व नक्सलियों के प्रशिक्षण से जुड़े कागजात बरामद हुए हैं, जिनसे पता चलता है कि कुछ चुनिंदा नक्सल गुरिल्लाओं को स्नाइपर वैपन चलाने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

देखते ही गोली मार देने का आदेश

बता दें कि सुकमा जिले में अब तक दो बार सीआरपीएफ कैंप के ऊपर ड्रोन मंडराते देखा गया है। इसका कमांड नक्सलियों द्वारा किए जाने की सूचनाओं के बाद केंद्र सरकार ने ऐसे ड्रोन को देखते ही गोली मार देने का आदेश जारी किया है। हाल में ही पुलिस को नक्सलियों के रीजनल जोनल कमेटी की मीटिंग में जारी किया गया 40 पन्न्ों का एक दस्तावेज मिला है।

जिसमें उनके गोरिल्लाओं को सुरक्षा बलों से निपटने के लिए अमेरिकन तकनीक से बनी रायफल स्नाइपर चलाने की ट्रेनिंग समेत रिमोट तकनीक व बूवी ट्रेप आदि का प्रशिक्षण देने बाहर से प्रशिक्षक बस्तर बुलवाए जाने की जानकारी मिली है। जानकारों की मानें तो नक्सली आधुनिक हथियारों से लैस सुरक्षा बलों के सामने अधिक देर तक नहीं टिक सकते हैं। इसके चलते वे लंबी दूरी तक मारक स्नाइपर से जवानों को निशाना बनाने की फिराक में हैं।

क्या है स्नाइपर रायफल

स्नाइपर रायफल अमेरिकन तकनीक से निर्मित आधुनिक हथियार है। उच्च स्तरीय एल्युमीनियम स्टेनलेस स्टील से तैयार इस हथियार का वजन नौ किलो छह सौ ग्राम है। इसका बैरल 1.5 मीटर लंबा है। इसमें 10.3 एमएम की बुलेट लगती है। सैन्य सूत्रों ने बताया कि लांग रेंज शूट में यह सबसे आधुनिक रायफल है। चार किलोमीटर दूरी तक इससे गोली दागी जा सकती है। वहीं गोली की रफ्तार नौ मीटर प्रति सेकेंड होती है। देश में अर्धसैन्य बलों समेत इस हथियार का उपयोग दुनिया की कई सेनाएं भी कर रही हैं।

नक्सली अपनी विचारधारा के अनुरूप रणनीतिक बदलाव करते रहते हैं। पुलिस को नक्सल कैंप से हासिल दस्तावेज में उनके द्वारा विदेशी तत्वों से स्नाइपर जैसे अत्याधुनिक हथियार मंगवाने व लड़ाकों को ट्रेनिंग देने का जिक्र है। ऐसे में हथियार और प्रशिक्षकों के जंगलों में पहुंचने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। पुलिस भी उनसे निपटने पूरी तरह सजग है। - सुंदरराज पी, आइजी, बस्तर

Posted By: Anandram Sahu