जगदलपुर। गोंचा के बाद जिस बस्तर के बियासी का कार्य शुरू हो जाता था। उसी बस्तर में अब तक रोपाई का काम शुरू नहीं हो पाया है। जिन किसानों ने अपने सिमित सिेचाई साधनों का सहारा लेकर रोपाई कर ली है। वे तेजी से खेत सूखने के कारण अब परेशान नजर आ रहे हैं,चूंकि उनके खेतों में दरारें पड़ने लगी है। किसानों ने आशंका व्यक्त की है कि अगर मानसून की बेरूखी ऐसी ही बनी रही तो सूखा और अकाल निश्चित हैं।

मानसून की बेरूखी से परेशान किसानों से चर्चा करने नईदुनिया ने आस-पास के गांवों का दौरा किया। जो किसान बोनी कर चुके हैं। वे धान के पौधे सूखने की आशंका से परेशान हैं।इनका कहना है कि खंड वर्षा से फसल पकना मुश्किल है। इसके लिए अच्छी बारिश आवश्यक है।

इधर ग्राम कुम्हरावंड के किसान रमाकांत और विद्याधर जोशी ने बताया कि उन दोनों ने सिचाई पंप से परनी ले तथा मताई कर नौ एकड़ में रोपा लगाया है लककिन प्यासे खेत तेजी से सूख रहे हैं, इसलिए रोपाई के पांच दिन बाद ही खेतों में दरीरें पड़ गई हैं। इधर वाटर लेबल गिरने के कारण पंप को लगातार चलाना भी मुश्किल है। यही हाल कुम्हरावंड और टेकामेटा के किसानों का भी है।

ग्राम नेगीगुड़ा के किसान जीतराय बघेल, जिवधन, सदाराम सेठिया ने बताया कि उनके खेत लगे हुए हैं। इन्होने 22 एकड़ में रोपा लगाने थरहा तैयार कर रखा है, लेकिन मानसून की बेरूखी के चलते खेत तैयार कर रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। बारिश विलंभ से हुई तो रोपाई में परेशानी आएगी, चूंकि बढ़े धान के पौधों को उखाड़ कर रोपने में परेशानी होती है। उनकी खेती पूरी तरह से मानसून के भरोसे है,इसलिए वे बारिश का इंतजार करने के अलावा कुछ कर नहीं सकते।

इधर घाट पदमूर के किसान शिवलाल निषाद, मेहत्तरलाल और मनबोध साहू ने बताया कि नदी किनारे होने के बावजूद उनके खेत पानी को तरस रहे हैं। इनके पास भी सिंचाई साधन नहीं है। इन्होने भी 17 एकड़ में रोपाई के लिए धान थरहा तैयार कर रखा है और अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। इन्होने बताया कि वर्षों पहले उनके गांव में नदी किनारे सामूहिक उद्वहन सिंचाई योजना शुरू हुई थी ,लेकिन किसानों के ही आपसी विवाद के कारण बंद पड़ी है। आज सिंचाई योजना के फेल होने का खमियाजा हम ही भुगत रहे हैं।

कालीपुर के किसान भी बेसब्री से अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। यहां के सतपाल बघेल ने सात, रामलाल पटनायक ने तीन, बिरेंद्र सेठिया ने ग्यारह और सोनादई नाग ने अपने सवा दो एकड़ में रोपाई हेतु बड़े पैमाने पर थरहा तैयार कर रखा है, चूंकि वे किसानों को धान के पौधे भी बेचते आए हैं। इन्होने बताया कि इनके सिंचाई पंपों की क्षमता इतनी नहीं है कि फसल पका सके। अगर निकट भविष्य में रोपाई- बियासी लायक बारिश नहीं हुई तो कि सानों को कर्ज में डूबने से कोई नहीं बचा सकता। ज्ञात हो कि इस क्षेत्र के किसान भी लेम्पस से तकाबी पर खाद-बीज ले कर कृषि करते हैं और फसल काट बैंक कर्ज अदा करते हैं।

स्थानीय प्रभाव से हो रही खंड वर्षा

मानसून आने के बाद भी झमाझम बारिश के लिए अंचल तरस रहा है। दिन में तेज धूप से परेशान लोगों को स्थानीय प्रभाव की बारिश राहत तो दे रही है लेकिन सीमित दायरे में। वैज्ञानिक भी अभी तेज बारिश के लिए अभी और इंतजार की बात कह रहे हैं।

सोमवार की शाम झमाझम बारिश के बाद अंचल में फिर मानसून सक्रिय होने की उम्मीद लगाए लोगों को दो दिनों से निराशा ही हाथ लग रहे हैं। दिन भर तेज धूप के बाद शाम को घुमड़ने वाले बादल बिन बरसे ही लौट रहे हैं। मंगलवार ओर बुधवार को भी अंचल में दोपहर बाद काले घने बादल आए और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश कर लौट गए। बुधवार को शहर में 3.6 एमएम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि इससे दिन भर के उमस और गर्मी से राहत तो मिली लेकिन खेती-किसानी के लिए पानी पर्याप्त नहीं है।

शाम को हो रही हल्की बारिश भी सभी क्षेत्र में नहीं बल्कि कुछ क्षेत्र विशेष में हो रही है। मंगलवार को शहर के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में ज्यादा बारिश दर्ज हुई तो दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में कम। बुधवार को भी यही स्थिति देखी गई। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार स्थानीय प्रभाव से बनने वाली द्रोणिका और बादलों से कहीं कम तो कहीं ज्यादा बारिश हो रही है। रायपुर के मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में अभी कोई हलचल या सिस्टम बनता नहीं दिख रहा है। इससे आगामी दो-तीन दिन बस्तर सहित प्रदेश में झमाझम नहीं होगी लेकिन स्थानीय प्रभाव से कुछेक जगह गरज-चमक के साथ हल्की से माध्यम बारिश की संभावना बनी है। बुधवार को शहर में अधिकतम तापमान 33.5 डिसे और न्यूनतम 23.2 डिसे मापा गया।

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