जगदलपुर। जिले में पदस्थ उप निरीक्षक विकेश चौहान दो महिलाओं के ब्लैकमेल के साथ ही विभागीय उपेक्षा के शिकार हो गए हैं। दो महिलाओं द्वारा उनसे की गई बड़ी राशि की मांग पूरी न करने पर की गई शिकायत के आधार पर चौहान का सेवा से पृथक करने का आदेश जारी किया गया है। इसे चुनौती देते हुए विकेश ने पुलिस महानिदेशक के समक्ष बहाली हेतु अपील की है। दस्तावेज के प्रतियों समेत जारी विज्ञप्ति में विकेश ने बताया है कि वर्ष 2009 में वे एक महिला के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे, पर हिंदू विवाह अधिनियम के मुताबिक विवाह संस्कार संपन्ना हुआ नहीं हुआ था।

उक्त महिला उनके साथ जिले में पदस्थापना के दौरान साथ रही और वर्ष 2019 में बगैर कुछ बताए लापता हो गई, जिसकी गुमशुदगी थाना बोधघाट थाने में दर्ज है। इसके बाद उनकी दूर की रिश्तेदार एक महिला उनके पास आई हुई थी। इसके बाद षड़यंत्र के तहत पुलिस अधीक्षक बस्तर के समक्ष शिकायत दर्ज करवाया गया। इसके बाद एसपी ने विभागीय जांच के आदेश दिए थे।

तत्कालीन एसडीओपी लोहंडीगुड़ा राकेश कुर्रे ने प्राथमिक जांच शुरु की थी। कथित रिश्तेदार महिला ने जांच अधिकारी के समक्ष दर्ज कराए कथन में कहा था कि विकेश चौहान को वह जानती है ,वह उनके दूर के रिश्तेदार भी हैं। वह उनसे प्रेम करती है पर दोनों के बीच विवाह संबंध नहीं है। उनका किसी अन्य महिला से विवाह हुआ है।

उक्त महिला के पूर्व पति से उनका तलाक वैधानिक रूप से नहीं हुआ है। मामले में एक और विरोधाभासी तथ्य उजागर हो रहा है। महिला ने दोबारा शिकायत आवेदन में यह जिक्र किया है कि विकेश चौहान ने उनसे चित्रकूट स्थित शिव मंदिर में जनवरी माह 2019 में विवाह किया था, परंतु विभागीय जांच के दौरान शिव मंदिर के प्रधान पुजारी चेतन सिंह ठाकुर ने अपने कथन में चौकी चित्रकूट के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का विवाह मंदिर में संपन्ना करवाने से इंकार किया है। साथ ही चौकी के अन्य गवाहों के द्वारा विवाह होना नही देखना बताया।

मांग रहे थे पांच लाख

बता दें कि दूसरी महिला के द्वारा विकेश चौहान से पांच लाख रुपये की मांग यह कहकर की गई थी कि रुपए न देने पर झूठे केस में फंसाकर जेल की हवा खिला दूंगी। महिला द्वारा थाना करपावंड में दर्ज कराए गए प्राथमिकी में अनाचार की तारीख में विकेश चौहान बिलासपुर अपोलो अस्पताल में ड़ेंगू मलेरिया से पीड़ित होकर उपचाररत थे। इसकी पुष्टि मेडिकल दस्तावेजों से प्रमाणित होती है। वही पहली महिला के किसी अन्य व्यक्ति के साथ रहने की बात सामने आई है। वर्तमान में उच्च न्यायालय द्वारा विभागीय जांच व मेडिकल दस्तावेज समेत भौतिक साक्ष्‌यों के आधार पर अग्रिम जमानत मंजूर की गई है।

विभागीय जांच में मौखिक आधार

विभागीय जांच के दौरान महज मौखिक आधार पर तात्कालिक एसपी द्वारा विकेश चौहान के विरूद्ध एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए सजा हेतु आइजी बस्तर को जांच प्रतिवेदन सौंप दिया गया और सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई। मामले में उपनिरीक्षक ने डीजीपी के समक्ष बहाली हेतु अपील की है, जो दो माह से लंबित है। अपील में उन्होंने यह भी जिक्र किया है कि पुलिस रेगुलेशन के अनुसार पूर्णकालिक आईजी को ही नियुक्ति व सेवा समाप्ति का अधिकार है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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