जगदलपुर। स्वतंत्रता दिवस के अमृत महोत्सव के अवसर पर 13 अगस्त को देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण से खेलने वाले पूर्व सैनिकों का साहित्य व कला समाज ने सम्मान किया। सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के डीआइजी अखिलेश प्रसाद सिंह के मुख्य आतिथ्य में और पद्मश्री धर्मपाल सैनी के विशिष्ट आतिथ्य, साहित्यकार जयचंद जैन, आरबी सिंह पूर्व सीईओ जिला सहकारी बैंक बस्तर, प्रसिद्ध समाज सेविका अनिता राज, पर्यावरणविद समाजसेवक सम्पत झा के आतिथ्य में तीन घंटे से भी ज्यादा समय तक चले कार्यक्रम में बस्तर संभाग के प्रसिद्ध कवियों ने अपनी देशभक्ति की रचनाओं से सबका मन मोह लिया।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए साहित्य व कला समाज के अध्यक्ष सनत सागर ने सैनिकों के लिए अपनी चार पंक्तियां प्रस्तुत की। फूलों का नाम होता है/खुशबुओं का काम होता है / यही दुनिया की रीत है/करने वाला हमेशा गुमनाम होता है। अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन व ममता मधु द्वारा सुमधुर सरस्वती वंदना के साथ ही कार्यक्रम की शुरुआत हुई। माता रूकमणी आश्रम की छात्राओं व शिक्षकों द्वारा स्वागत गीत और देशभक्ति गीत की प्रस्तुति दी गई। शहर के नामचीन गीतकार डा. राजेश थंथराटे द्वारा भी देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया गया। अपनी ओजपूर्ण कविताओं से छत्तीसगढ़ के हरिओम पवार बाबू बैरागी ने बगैर रुके काफी देर तक पढ़कर भूतपूर्व सैनिकों का मन मोह लिया।

अपनी प्रसिद्ध कविता मैं देश जोड़ने निकला हूं सुना कर खूब तालियां बटोरीं। बारह भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के बीच सीआरपीएफ कोबरा बटालियन के डीआइजी सिंह ने अपने अनुभव शेयर करते हुए कहा कि एक सैनिक अपनी नौकरी में रहते हुए देश के दुश्मनों से सुरक्षा करता है तो रिटायर होने के बाद अपने समाज में शांति स्थापित करने के कार्य ही करता है।

हम जैसे इलाकों में काम करते हैं वहां का जीवन दयनीय होता है उसे देखकर वास्तव में दुख होता है। समाज में सभी के पिता अपने बच्चों को स्कूल लेकर जाते नजर आते हैं और एक सैनिक का बेटा अपनी मां के साथ स्कूल जाता है। उसके सारे कायोर् की जिम्मेदारी मां की होती है। इससे ये पता चलता है कि सैनिक के साथ उसका पूरा परिवार त्यागपूर्ण जीवन जीता है। एक सैनिक का सम्मान करना उनका सम्मान नहीं बल्कि उनके द्वारा स्वयं का सम्मान करना होता है। अंत में आपने कहा कि हमारे समाज के समाजसेवियों का प्रयास होना चाहिए कि बीहड़ों में रहने वाले वंचितों तक वे सारी सुविधाएं पहुंचें जो हमारे पास हैं। कार्यक्रम में पूर्व सैनिक अर्जुन पांडेय, ललित जोशी, जितेन्द्र गुप्ता, केएल कोष्टा, दामू राम नाग, कृष्ण राय, राममूर्ति पांडेय, रामचंद्र, श्यामसिंह, विजय झा, केके जान, एनएन मिश्रा का पुष्पगुच्छ भेंट कर

सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में शहर साहित्यकार डा. कौशलेन्द्र, विपिन बिहारी दास, शैल दुबे, अंजली तिवारी, श्रीमती सुकांति जायसवाल, राजकुमार जायसवाल शामिल हुए तो बुद्धिजीवियों संजीव शर्मा, ेखर शर्मा, बंटू पाण्डे मौजूद थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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