National Level Football: विनोद सिंह.जगदलपुर। आदिवासी खेल प्रतिभाओं की खान के नाम से चर्चित माता रूक्मणी सेवा संस्थान डिमरापाल की टीम का चयन राष्ट्रीय स्तर की महिला फुटबाल की स्पर्धा के लिए हुआ है। यहां की टीम वर्तमान में छत्तीसगढ़ की महिला फुटबाल की लीग चैम्पियन है। इसी साल मार्च में भिलाई में आयोजित स्पर्धा में यह टीम विजेता बनी थी। टीम को दिल्ली, भुवनेश्वर में राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धा में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करना था किंतु कोरोना संक्रमण के कारण स्पर्धा स्थगित होने से टीम नहीं जा सकी।

पिछले तीन साल से यहां की बच्चियां अंडर-17 वर्ग के इंडिया कैंप में शामिल हो रही हैं। कोरोना संक्रमण के कमजोर पड़ने के बाद आगामी दिनों में होने वाली राष्ट्रीय लीग स्तर की महिला फुटबाल स्पर्धा में शामिल होने के लिए माता रूक्मणी सेवा संस्थान डिमरापाल की टीम कड़ी मेहनत कर रही है। फुटबाल में संस्थान की टीम के प्रदर्शन और खेल प्रतिभाओं से प्रभावित होकर एक उद्योग घराने ने फुटबाल अकादमी भुवनेश्वर (ओड़िशा) से राष्ट्रीय स्तर के दो कोच राकेश नायक और दिव्य ज्योति सिंह को एक साल के लिए यहां भेजा है। इनके मार्गदर्शन में टीम अभ्यास कर रही है।

उल्लेखनीय है कि पिछले छह सालों से लगातार यहां की महिला फुटबाल टीम प्रतिष्ठित सुब्रतो कप स्पर्धा अंडर-17 में भाग ले रही है। इन बच्चियों की खेल प्रतिभा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी प्रभावित किया है। यही वजह है कि बस्तर दशहरा में शामिल होने रविवार को जगदलपुर आ रहे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जिन 232 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास करने वाले हैं उसमें करीब 50 लाख रुपये की लागत वाला मिनी फुटबाल स्टेडियम भी शामिल है जो कि माता रूक्मणी सेवा संस्थान डिमरापाल में बनेगा।

37 आश्रमों का संचालन

उल्लेखनीय है कि जगदलपुर से दस किलोमीटर दूर स्थित माता रूक्मणी सेवा संस्थान डिमरापाल बस्तर संभाग में 37 आश्रमों का संचालन कर रहा है। इनमें 21 कन्या आश्रम और शेष बालक आश्रम हैं। पढ़ाई के साथ खेल गतिविधियों के लिए इस संस्थान की दूर-दूर तक ख्याति है। यहां की तीन सौ से अधिक बालिकाएं राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर खेल प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। यह सिलसिला निरंतर जारी है।

एथलेटिक्स में भी कमाया नाम

माता रूक्मणी सेवा संस्थान की स्थापना आचार्य विनोबा भावे के शिष्य समाजसेवी पद्मश्री धर्मपाल सैनी ने 1976 में की थी। सैनी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद 2004 में संस्थान में खेलकूद की गतिविधियों ने जोर पकड़ा। एथलेटिक्स में लगातार उल्लेखनीय प्रदर्शन के साथ फुटबाल, व्हालीबाल, मैराथन में टीम और खिलाड़ियों ने सफलता के झंडे गाड़ रखे हैं। मैराथन में यहां की बालिकाएं पांच बार प्रदेश में और एक बार राष्ट्रीय स्तर पर विजेता रह चुकी हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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