कोसमंदा (नईदुनिया न्यूज)। शासकीय उधातर माध्यमिक विद्यालय कोसमंदा का दसवीं बारहवीं बोर्ड का परीक्षा परिणाम निराशाजनक रहा। यहां 129 विद्यार्थियों में से केवल 43 विद्यार्थी ही उत्तीर्ण हुए। इस तरह महज 32.5 प्रतिशत विद्यार्थियों को ही सपᆬलता मिली। इस सत्र में प्राचार्य व शिक्षकों का प्रदर्शन निराशा जनक रहा। आएदिन विलंब से स्कूल पहुंचना व कार्यालय में बैठकर गप्पे मारना इनकी आदत में शुमार है।

इस स्कूल में पढ़ाई नहीं होने की शिकायत कई बार जनप्रतिनिधि व ग्रामीण कलेक्टर व डीईओ से कर चुके थे। अधिक पᆬीस वसूली का मामला भी यहां आया था। पर कार्रवाई नहीं होने से शिक्षकों के हौसले बुलंद हो गए। इसका परिणाम परीक्षा पर दिखा और 129 में से 43 विद्यार्थी ही सपᆬल हो सके। ऐसे में पालकों में रोष है। जो विद्यार्थी दसवीं में 80 पᆬीसदी अंको के साथ उत्तीर्ण हुए थे। इस बार वे 12 वीं में पᆬेल हो गए। ऐसे में विद्यार्थियों का एक साल बर्बाद हो गया। गांव में शासकीय स्कूल होने के बाद भी विद्यार्थी बड़ी संख्या में टीसी निकलवाकर प्राइवेट स्कूल में जाने की सोंच रहे हैं। इस संबंध में जनपद सदस्य संजय रत्नाकर का कहना है कि उनके द्वारा शुरुआत में ही शिक्षकों के पढ़ाई व आने-जाने को लेकर शिकायत की गई थी। अधिकारियों द्वारा जांच कर उचित कार्रवाई की जाती तो निश्चित ही परिणाम कुछ और होता। इस तरह के परिणाम के लिए शिक्षकों के साथ - साथ अधिकारी भी बराबर के दोषी है। सरपंच गजाधर कौशिक का कहना है कि इस तरह का परीक्षा परिणाम निश्चित ही छात्रों के मनोबल को तोड़ने वाला है। स्कूल में पढाई नहीं होना मुख्य कारण है नहीं तो होनहार छात्रों का परिणाम इस तरह नहीं आता। जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष देवानंद कौशिक का कहना है कि शिक्षा सुधारने जनप्रतिनिधियों व पालकों ने स्कूल का कई बार निरीक्षण किया । उसके बाद बाद भी शिक्षकों का रवैया नही बदला। जिसका परिणाम सबके सामने है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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