सक्ती। नईदुनिया न्यूज। आजीविका संसाधन केन्द्र पोरथा का हाल पूरी तरह से बेहाल हो गया है। मनरेगा योजनांतर्गत करीब 10 लाख की लागत से बने इस आजीविका संसाधन केन्द्र का भूमि भूजन पूर्व विधायक खिलावन साहू, जनपद अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मीन तेरस कंवर, अमित राठौर सरवन सिदार और श्रीमती मधु प्रदीप राठौर की उपस्थिति में 6 मई 2017 को हुआ था।

भूमिपूजन के तीन माह बाद निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया वहीं दिसम्बर 2017 में शेड बन कर तैयार हो गया। करीब दो से तीन माह स्वसहायता समूह के द्वारा संचालन तो किया गया लेकिन कचरे के असेट््‌स तैयार नहीं हुए और समूह को मजदूरी भुगतान के लिए भी परेशान होना पड़ा । मनरेगा द्वारा बहुत से कार्य प्रारंभ तो करा दिए जाते हैं लेकिन उसमें आगे फंड नहीं होने की वजह से कार्य को सुचारू रूप से संचालन नहीं किया जा सकता है । स्वच्छ भारत अभियान का जोर शोर से प्रचार प्रसार तो हुआ वहीं मनरेगा से कई ऐसे शेड बनाए गए जिसमें कचरे से खाद, या और भी कई तरह के असेट््‌स तैयार करने थे मगर ऐसा हो नहीं सका। काम कर रहे लोगों को फायदा तो दूर उनके द्वारा लगाए गए मूलधन भी डूब गया । यही कारण है कि शासन की कई एसी योजनाएं सिर्फ पैसों की बर्बादी के लिए होती है और बंद हो जाती है। ऐसा ही कुछ हाल आजीविका संससाधन केन्द्र का भी है । मनरेगा अंतर्गत 10 लाख की लागत से शेड बाउंड्रीवाल तो बन गया। कुछ दिन संचालन भी हुआ उसके बाद पूरी तरह से बंद पड़ा हुआ है, अब इस आजीविका संसाधन केन्द्र को स्वच्छता की जरूरत पड़ गई, जबकि इसे कचरा खत्म करने के लिए बनाया गया था और अब यह योजना खुद ही पूरी तरह से खत्म होती दिख रही है।

'' पोरथा के आजीविका संसाधन केन्द्र को स्थानीय स्व सहायता समूह को संचालन के लिए दिया गया था। उनके द्वारा कुछ दिन संचालन भी किया गया लेकिन समूह के सदस्यों का वहां से मजदूरी भी नहीं निकल पा रहा था। इसके चलते समूह ने कुछ दिन संचालित करने के बाद बंद कर दिया। आजीविका संसाधन केन्द्र के संचालन के लिए जल्द ही ठोस कदम उठाया जाएगा।

आरएस साहू

सीईओ, जनपद पंचायत सक्ती

Posted By: Nai Dunia News Network

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