चांपा। नईदुनिया न्यूज। आज से 22 वर्ष पहले14 सितंबर 1997 को हसदेव रेलवे पुल,चांपा में अहमदाबाद एक्सप्रेस- हावड़ा डाउन 8033 दुर्घटनाग्रस्त होकर हसदेव नदी के पुल से नीचे गिर गई थी। इस जबरदस्त दुर्घटना में ट्रेन की पांच बोगियां पुल से नीचे गिरी थी। रेलवे के अधिकृत ऑकड़ों के अनुसार इस दुर्घटना में 81 यात्रियों की मौत हुई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। आज भी चांपा व क्षेत्रवासी इस भीषण हादसे को याद कर सिहर उठते हैं।

नगर के साहित्यकार शशिभूषण सोनी ने दुर्घटना को याद करते हुए बताया कि 14 सितंबर 97 का दर्दनाक हादसा, लोगों की चीख-पुकार और हसदेव नदी के पुल के ऊपर दो बोगियां लटक रही थी उसमें बैठे लोगों की चीख-पुकार मची हुई थी। अक्षर साहित्य परिषद् के साथियों ने लोगों को बाहर निकाला और उन्हें आवश्यक उपचार के लिए निकटतम स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में मदद की। नगर की कई संस्थाएं व व्यक्तियों ने लोगों की मदद की। चांपावासियों ने जी जान से पीड़ित यात्रियों की मदद की। उनकी आत्मा की शांति के लिए अनुष्ठान भी किया गया। इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी पंडित दयाशंकर पांडेय,राजेश्वर मिश्रा राधेश्याम आज भी रेलवे स्टेशन चांपा में फलों का व्यवसाय करते हैं। वे उस दिन इसी ट्रेन से बिलासपुर से चांपा आ रहे थे। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद एक्सप्रेस ट्रेन के हसदेव नदी पर पहुंचते ही जोर की आवाज हुई। घटना की याद आती है तो पूरा शरीर सिहर उठता है। तत्कालीन वार्ड पार्षद और सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती शशिप्रभा सोनी ने बताया कि नगर की महिलाएं दुर्घटनाग्रस्त लोगों की सहानुभूति और सहायता के लिए रात-भर सेवा कार्यों में जुटी रही। पंडित रामगोपाल गौरहा, डाक्टर सत्यप्रकाश गुप्ता एवं हरिहर प्रसाद सराफ ने बताया कि उस समय नगरवासियों और आसपास के लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए घायल यात्रियों की सेवा की। घायल यात्रियों की मदद करने सैकड़ों हाथ उठे। घालयों को सरस्वती शिशु मंदिर, लायंस स्कूल, बीडीएम चिकित्सालय,चांपा में उपचार के लिए ले जाया गया। यहां चिकित्सा व्यवस्था की गई थी। लायंस क्लब, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,चांपा सेवा संस्थान,अक्षर साहित्य परिषद, स्वर्णकार समाज, देवांगन समाज, अग्रवाल समाज, प्रगतिशील स्वर्णकार संघ के अतिरिक्त अन्य संगठनों ने तन मन धन से दुर्घटनाग्रस्त लोगों की सहायता की। घर-घर से पीड़ितों को देने के लिए भोजन भी लोगों ने मुक्तहस्त से दिया।