जांजगीर-चांपा। क्षेत्र के हसौद के छोटे से गांव करही का युवक सोमेश पिछले 427 दिनों से भारत यात्रा पर हैं। वे पैदल और बाइक तथा अन्य वाहन चालकों से लिफ्ट लेकर यह यात्रा कर रहे हैं। इस यात्रा का नाम उन्होंने मुसाफिर रखा है। भारतीयों को एकता में अनेकता का संदेश देना और देश की विविधता की जानकारी जुटाना उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य है। वर्तमान में वे नवी मुंबई में हैं।

सक्ती जिले के जैजैपुर ब्लाक के ग्राम करही निवासी दिलीप कुमार कुर्रे के पुत्र सोमेश कुर्रे पिछले 427 दिनों से भारत यात्रा पर हैं। इन्होंने 6 वीं से 12 वीं तक की पढ़ाई नवोदय विद्यालय चिस्दा मेंकी है और इंदिरा गांधी कृषि विश्विद्यालय रायपुर से कृषि स्नातक हैं । इन्होंने भारत के उत्तर दिशा लद्दाख से 21 जुलाई 2021 कोअपनी यात्रा की शुरुआत की और जम्मू कश्मीर,पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, कन्याकुमारी सहित पूरे 28 राज्यों की यात्रा 427 दिनों में कर चुके हैं। उनकी यात्रा 500 दिनों की होगी। इस यात्रा में भारत के लगभग सभी राज्योंतक पहुंचना चाहते हैं। उनका कहना है कि वेइस यात्रा के माध्यम से भारत की विविधता के बारे में जान और समझ रहे हैं। वहीं लोगों को सदभावना का संदेश पहुंचा रहे हैं। उन्होंने अपनी यात्रा का नाम मुसाफिर रखा है। पूरी यात्रा वे पैदल व लिफ्ट मांगकर करते हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादातर बाइक व ट्रक चालकों से वे लिफ्ट लेते हैं। वे अपनी यात्रा के दौरान भारत के सभी राज्यों में पहुंचना चाहते हैं। उन्होंने अपनी यात्रा का नाम मुसाफिर रखा है। सोमेश कुर्रे ने बताया कि दूर दराज के क्षेत्रों से लेकर वे समुद्र किनारे बसे महानगरों व नगरों तक पहुंच कर विविधता में एकता का दर्शन भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक जो अनुभव हुआ हैवह सुखद है देश वासियों में सहयोग और दया की भावना है। 427 दिन की इस यात्रा में भाषा कभी बाधा नहीं बनी है।

मात्र 43 सौ रूपए लेकर निकले

सोमेश ने बताया कि उनका छोटा भाई भी नवोदय विद्यालय में पढ़ाई करता है और माता-पिता जम्मू कश्मीर में रहते हैं। उनके पिता वहां मिस्त्री का काम करते हैं। वे तंबू लगाकर रूकते हैंइसलिए रूकने का खर्च नहीं लगता। यात्रा के लिए वे लिफ्ट का सहारा लेते हैं और भोजन के लिए कभी गुरूद्वारा तो कभी किसी शहर के समाज सेवी की मदद मिल जाती है। गांव में भी कई लोग आदर के साथ उन्हें अपने घर में भी रखे और खाना भी खिलाया। लिफ्ट नहीं मिलने पर वे पैदल भी चलते हैं।

गांव से लद्दाख तक गए बाइक में

सोमेश ने बताया कि वे गांव से 21 जुलाई 2021 को अपने गांव करही से लद्दाख तक बाइक में गए और वहां बाइक छोड़कर यात्रा में निकले 500 दिन होने के बाद वे लिफ्ट लेकर ही वे गांव पहुंचेंगे।

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