जांजगीर-चांपा। नईदुनिया न्यूज। Chhattisgarh Panchayat Election 2020 हमनाम उम्मीदवार के चुनाव चिन्ह का 24 दिन प्रचार करने के बाद चुनाव के एक दिन पहले उम्मीदवार को अपने चुनाव चिन्ह की जानकारी हुई, तब उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। एक रात में ही उसने कड़ी मेहनत की और अंतत वे चुनाव जीतने में भी सफल रहे।

यह वाकया सक्ती ब्लॉक के ग्राम पंचायत पासिद का है। यहां सरपंच पद के लिए कुल 8 उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें दो उम्मीदवार हमनाम थे। एक जीवेन्द्र कुमार राठौर पिन्टू और दूसरा जीवेन्द्र राठौर पिन्टू।

जीवेन्द्र कुमार राठौर पिन्टू को चुनाव में नारियल पेड़ मिला था। जिसे जीवेन्द्र राठौर पिन्टू ने अपना चुनाव चिन्ह समझ लिया, जबकि उन्हें हैंडपंप छाप मिला था। इतना ही नहीं उन्होंने पूरे 24 दिन तक नारियल पेड़ का प्रचार-प्रसार पोस्टर, पाम्प्लेट छपवाकर किया।

इस दौरान नारियल पेड़ छाप वाला उम्मीदवार शांत बैठा था। उसने भी नहीं बताया। 2 फरवरी को जब उसने नारियल पेड़ में वोट देने की बात कही तब कुछ लोगों को शंका हुई कि विरोधी प्रत्याशी क्यों नारियल छाप में वोट देने की बात कह रहा है।

यह बात जब जीवेन्द्र राठौर पिन्टू तक पहुंची और उन्होंने अपना चुनाव चिन्ह कंफर्म किया तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्हें पता चला कि उनका चुनाव चिन्ह हैंडपंप है। ऐसे में आनन-फानन में उन्होंने अपने लोगों से संपर्क कर अपना चुनाव चिन्ह का प्रचार किया, चूंकि प्रचार एक दिन पहले ही थम गया था इसलिए उन्होंने घर-घर जाकर और मोबाइल व अन्य माध्यमों से अपने चुनाव चिन्ह की सूचना वोटरों को दी। अपने नाम से लगे नारियल पेड़ के पाम्प्लेट, पोस्टर को पुाड़ा और हैंडपंप में वोट देने की अपील लोगों से की।

आज सुबह से भी वह वोटरों से मिलकर अपने चुनाव चिन्ह की जनकारी उन्हें दी। इसके बाद भी वे चुनाव जितने में सफल रहे। हमनाम उम्मीदवार होने का जो खामियाजा उन्‍हें मानसिक तनाव व भाग दौड़ करके भुगतना पड़ा। मगर उनकी मेहनत रंग लाई।

इस संबंध में रिटर्निंग आपिुसर तहसीलदार बी एक्का ने बताया कि उम्मीदवार ने धोखे से हमनाम उम्मीदवार के चुनाव चिन्ह नारियल पेड़ को अपना समझ लिया, जबकि उन्हें जो चुनाव चिन्ह आबंटित किया गया था, वह लिखित में है। यह उम्मीदवार की गलतफहमी से हुआ था।

Posted By: Hemant Upadhyay

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