जांजगीर-चांपा (नईदुनिया प्रतिनिधि) । समर्थन मूल्य पर धान बेचने के बाद राशि निकालने के लिए जिले के सहकारी बैंकों में किसानों की भीड़ उमड़ रही है। मगर बैंक प्रबंधन की लापरवाही के कारण संक्रमण पᆬैलने का खतरा बढ़ गया है। जिले में लगातार कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। बैंक खुलने के पहले सुबह 9 बजे से ही किसानों की लंबी लाइन लग रही है। किसानों की भीड़ रोकना व पिᆬजिकल डिस्टेंसिंग का पालन कराना किसी चुनौती से कम नहीं है।

जिला सहकारी बैंक के सभी 18 शाखाओं में राशि निकालने के लिए किसानों की भीड़ उमड़ रही है। राशि पाने की होड़ में किसान यह भी भूल गए कि जिले में कोरोना जैसी महामारी का संक्रमण पिᆬर से बढ़ने लगा है। सभी सहकारी बैंकों में फिजिकिल डिस्टेंसिंग तो दूर बिना मास्क के ही किसानों की भीड़ उमड़ रही है। जिला मुख्यालय के जिला सहकारी बैंक के बाहर सुबह 9 बजे से ही किसानों की लाइन लगनी शुरू हो जाती है। किसानों के द्वारा फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जा रहा है। किसान एक -दूसरे से सटकर खड़े रहेते हैं। किसानों की भीड़ को नियंत्रित करने बैंक के शाखा प्रबंधक द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जाता और न ही किसानों को कोविड - 19 के गाइडलाइन का पालन करने की सलाह देते कोई नजर आता है। ऐसे में यदि किसी एक व्यक्ति को कोरोना निकला तो उससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाएगा। किसानों व बैंक प्रबंधन की यह लापरवाही कहीं लोगों पर ही न भारी पड़ जाए।

एक ही दिन 10 गांव के किसानों को भुगतान

जिला सहकारी बैंक के जांजगीर शाखा के अंतर्गत आने वाले समिति के किसानों को भुगतान करने के लिए अलग - अलग दिन निर्धारित किया गया है। सोमवार को दो समिति सरखों और महंत के अंतर्गत आने वाले करीब दस गांवों के किसानों को भुगतान किया जाता है। इसके तहत सोमवार को अमोरा, मुनुंद, भडेसर, धनेली, महंत, सरखों, करमंदी, चौराभाटा, खैरा, तेंदुभाठा सहित 10 गांव के किसान राशि निकालने के लिए पहुंचे थे। ऐसे में यहां सुबह से ही किसानों की भीड़ लगनी शुरू हो गई थी। दोपहर 12 बजे तक यह भीड़ और बढ़ गई थी। हालांकि जिला सहकारी बैंक द्वारा किसानों को एटीएम कार्ड दिया गया है मगर ज्यादातर किसान एटीएम का उपयोग करना नहीं जानते हैं जिसके कारण वे राशि निकालने के लिए बैंक पहुंचते हैं।

'' दो दिन अवकाश होने के कारण सोमवार को किसानों की अधिक भीड़ आ गई थी। बाकी दिन किसानों की भीड़ कम रहती है। मास्क पहनकर आने वाले किसानों को ही भुगतान किया जा रहा है। साथ ही उन्हें सैनिटाइजर और पिᆬजिकिल दूरी बनाकर रखने का निर्देश दिया जाता है।

आर एल तिवारी

शाखा प्रबंधक, जांजगीर

बारिश में भीगा खरीदी केंद्रों में रखा धान

पᆬोटोः 10 जानपी 17 - खरीदी केंद्र में बिना कैप कवर के खुले में रखा धान

चेतावनी के बाद भी कई समितियों में दिखी लापरवाही

जांजगीर-चांपा। (नईदुनिया न्यूज)। खरीदी केन्द्रों में खरीदे गए धान की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। वहीं उठाव नहीं होने के कारण साढ़े 28 लाख क्विंटल धान रखा हुआ है। रविवार की रात हुई बेमौसम बारिश के कारण धान भीग गए। जबकि कलेक्टर ने सप्ताहभर पहले ही मौसम विभाग के अनुमान के बाद धान को ढककर रखने के निर्र्देश दिए थे। इस बार प्लास्टिक की बोरियों में भी धान की खरीदी की गई है जिसके नुकसान की संभावना अधिक है। हालांकि विभाग द्वारा दावा किया जा रहा है कि खरीदी केंद्रों में रखे धान को तिरपाल से ढकरकर सुरक्षित रखा गया है जबकि हकीकत कुछ और है। करीब दो दर्जन से अधिक केंद्रों में धान बपᆬर लिमिट से अधिक है जिसकी वजह से समिति प्रभारियों के पास उसे ढककर रखने के लिए पर्याप्त कैप कवर की व्यवस्था नहीं है जिसके चलते आधे धान को ही ढककर रखा गया है।

जिला मुख्यालय सहित अन्य क्षेत्रों में रविवार की रात बारिश हुई। मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि 9 से 12 जनवरी के बीच बारिश हो सकती है। ऐसे में चार दिनों के लिए जिले के सभी केंद्रों में धान की खरीदी भी बंद कर दी गई है। मौसम विभाग के द्वारा बारिश के अनुमान के बाद कलेक्टर जितेंद्र कुमार शुक्ला ने उपार्जन केंद्रों में खरीदे गए धान की समुचित सुरक्षा के इंतजाम करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने सभी उपार्जन केंद्रों में खरीदे गए धान को मापदंड के अनुसार स्टेकिंग करने। बेमौसम वर्षा की स्थिति में ढकने के लिए तिरपाल की व्यवस्था सभी केन्द्रों में अनिवार्य रूप से करने और उपार्जन केंद्र में पानी निकासी के लिए भी व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। मगर इसके बाद भी केंद्र प्रभारियों के द्वारा ध्यान नहीं दिया गया। शनिवार से आसमान में बादल छाए हुए थे। रविवार को भी दिनभर बदली छाई रही और रात में बारिश होने लगी। बारिश के चलते सिवनी, बोड़सरा, नैला, पेंड्री सहित जिले के अन्य कई स्थानों के केंद्रों में खुले में रखे धान भीग गए। समर्थन मूल्य पर 239 केन्द्रों में धान खरीदी की जा रही है। परिवहन के अभाव में अधिकांश केन्द्रों में 28 लाख 34हजार क्िवटल धान जाम है। वहीं आज बेमौसम हुई बारिश के चलते विभिन्ना खरीदी केन्द्रों में पड़े लाखों क्िवटल धान के भीगने से खराब होने का खतरा है। उपार्जन केन्द्रों से मिलरों व संग्रहण केन्द्रों तक किसान के धान के परिवहन करने की जिम्मेदारी विपणन समिति की है। लगातार कलेक्टर द्वारा बैठकों में विपणन अधिकारियों को उपार्जन केन्द्रों में जाम धान को उठाने का निर्देश दिया जा रहा है। साथ ही खरीदी केन्द्रों में जाम धान की सुरक्षित रखने के निर्देश केन्द्र प्रभारियों को दी जा रही है, बाजवूद इसके स्थिति जस की तस है।

ड्रेनेज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं

कलेक्टर के निर्देश के बाद भी धान खरीदी केन्द्रों में जाम धान को सुरक्षित रखने पर्याप्त इंतजाम विभाग के अधिकारी और समिति कर्मचारियों के द्वारा नहीं किया गया है। ठीक ढंग से ड्रेनेज की भी व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में बारिश से भीगे धान का नुकसान की आशंका बढ़ गई है। केंद्रों में खुले में धान रखे हुए हैं। हालांकि विभाग के अधिकारियों के द्वारा दावा किया जा रहा है कि सभी समितियों का निरीक्षण किया गया है और समितियों में धान सुरक्षित ढककर रखा गया है।

'' खरीदी केंद्रों में रखे धान को तिरपाल से ढकरकर सुरक्षित रखा गया है । केंद्रों में पर्याप्त कैप कवर की व्यवस्था की गई है। बारिश उतनी तेज नहीं हुई इसलिए धान को कोई नुकसान नहीं होगा।

अश्वनी पांडेय

नोडल अधिकारी, जिला सहकारी बैंक

Posted By: Nai Dunia News Network

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