जांजगीर-चांपा(निप्र)।डीईओ कार्यालय से जारी चेक में छेड़छाड़ कर दो लाख रुपए के चेक को बीस लाख रुपए किए जाने के मामले में पुलिस ने उसी कार्यालय के लिपिक के खिलाफ अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार डीईओ कार्यालय में पदस्थ लिपिक राजेश कुमार यादव पिता स्व. वेदप्रकाश यादव के नाम जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से दो लाख रुपए का चेक 28 जनवरी 2015 को जारी किया गया। यह चेक एक्सिस बैंक का था। इस चेक में ओव्हर राइटिंग करते हुए 2 लाख रुपए की जगह उसे 20 लाख रुपए का चेक बना दिया गया। डीईओ कार्यालय का लिपिक राजेश यादव जब इस चेक को लेकर बैंक पहुंचा और उसे विथड्रा करने के लिए बैंक में जमा किया तो बैंक के कर्मचारी को व्यक्तिगत नाम से 20 लाख रुपए का चेक देखकर आशंका हुई कि कुछ गड़बड़ी है। उसने कार्यालय का नंबर मिलाकर पता किया तो वहां से दो लाख रुपए का चेक जारी होने की जानकारी मिली। मामला सामने आने के बाद लगभग 4 माह तक टालमटोल होता रहा, इसलिए यह मामला संदिग्ध है। डीईओ द्वारा किसी लिपिक के नाम पर दो लाख रुपए का चेक क्यों काटा गया और अगर काटा गया तो गलती पकड़ में आने के बाद चार माह तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराया गया। डीईओ आरएन हीराधर की रिपोर्ट पर 26 मई को लिपिक राजेश यादव के खिलाफ भादवि की धारा 409, 467, 511 के तहत अपराध दर्ज किया गया। आज सुबह लिपिक राजेश यादव को गिरफ्तार किया गया। इस संबंध में थाना प्रभारी रश्मिकांत मिश्रा का कहना है कि लिपिक को न्यायिक रिमाण्ड पर जेल भेज दिया गया है। चेक की भी जब्ती की गई है। इधर मामले में गिरफ्तार राजेश यादव का कहना है कि उसे 20 लाख रुपए का ही चेक दिया गया था। उसके द्वारा कोई धोखाधड़ी नहीं की गई है। सभी जानकारी विभाग के अधिकारियों को है। अन्य कई लिपिकों के नाम पर भी व्यक्तिगत चेक काटा गया है।

प्राइवेट बैंक में एकाउंट

शासकीय राशि को राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा करने का प्रावधान है। लीड बैंक अधिकारी भीमसेन नामदेव ने बताया कि रिजर्व बैंक के परिपत्र के अनुसार शासकीय राशि को सरकारी बैंकों में ही रखा जाना चाहिए जबकि डीईओ कार्यालय की राशि प्राइवेट बैंक में रखी गई है। जिला मुख्यालय में दर्जन भर से अधिक सरकारी बैंक होने के बाद भी ऐसी क्या मजबूरी थी कि चांपा के निजी बैंक में शासकीय राशि रखी गई है। जिले के कई विभागों का एकाउंट भी प्राइवेट बैंकों में है जो हितग्राही मूलक योजनाओं के क्रियान्वयन को महत्व नहीं देते। इसके बाद भी प्राइवेट बैंकों में एकाउंट विभागीय अधिकारियों द्वारा खुलवा दिया गया है।