जांजगीर-चांपा। (नईदुनिया प्रतिनिधि)। राज्य सरकार के निर्देशानुसार चिटपᆬंड के निवेशकों की धन वापसी के लिए उनसे आवेदन लिया जा रहा है। अंतिम तिथि एक दिन पूर्व जिला मुख्यालय सहित सभी तहसील कार्यालयों में अपनी गाढ़ी कमाई पाने की उम्मीद में आवेदकों की भीड़ उमड़ रही। जिले में अब तक 1 लाख 32 हजार 909 लोग 20 चिटपᆬंड कंपनी में 2 अरब 65 करोड़ 71 लाख गवां चुके हैं। हालांकि सालों बाद कार्यालयों का चक्कर काटने के बाद एक बाद पिᆬर से रकम वापसी की उम्मीद में लोगों की भीड़ उमड़ रही है। पिᆬजिकल डिस्टेंसिंग की अनदेखी करते हुए तहसीलों में इन दिनों भीड़ उमड़ रही है। 2 से 5 अगस्त तक जिले के सभी 14 तहसीलों में लगभग 62 हजार आवेदन जमा हुए हैं।

जिले में वर्ष 2010 के बाद से चिटफंड कंपनियों का जाल सा बिछ गया। इनके द्वारा जनता की गाढ़ी कमाई में धोखाधड़ी कर कम समय में दोगुना, चार गुना करने का झांसा देकर जमा कराया गया। मगर निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद कंपनी के अधिकारी फरार हो गए। अधिकांश कंपनी के कार्यालयों में ताले लटक गए और निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई के लिए पुलिस से लेकर अधिकारियों का चक्कर काट रहे हैं। जिले में सांई प्रसाद, सांई प्रकाश, शुभ सांई, विनायक ग्रुप, कोलकाता वेयर, टीनकान, जीवन भारती, मिलियन माइंस, गुरूकृपा, प्रतिष्ठा रीयल स्टेट कंपनी, अनमोल, पीएसीएल (पल्स ग्रीन इंडिया), एसपीएनजे, गरिमा रियल स्टेट, बीएन गोल्ड, दिव्यानी रियल स्टेट सहित डेढ़ दर्जन चिटफंड कंपनियों का कार्यालय संचालित था। इनमें जिले के 1 लाख 32 हजार लोगों का लगभग 2 अरब 65 करोड़ 71 लाख 47 हजार रूपए निवेश हुआ था। इन कंपनियों के द्वारा लोगों से राशि जमा करवाने के लिए एजेंटों की नियुक्ति की गई थी। विभिन्ना कंपनियों के यहां 5 हजार से अधिक एजेंट कार्यरत थे। इन्हें भी जमा राशि पर 20 से 25 प्रतिशत कमीशन का लालच दिया गया था। इसके चलते बेरोजगार युवा बड़ी तादत में विभिन्ना कंपनियों में जुड़ गए थे। मगर जब चिटफंड कंपनियों में ताला लटका और एजेंटों पर ग्राहकों ने राशि वापसी के लिए दबाव डालना शुरू किया। तब वे भी तनाव में आए, पुलिस ने भी 2015-2016 में लगभग 50 एजेटों के खिलाफ कार्रवाई की और उन्हें जेल भी भेजा गया। कई लोग अब भी फरारी काट रहे हैं। ऐसे में एजेंट एकजुट हुए और वे सरकार से मांग रखी कि एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई ना हो। मांगो को लेकर वे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भी मिले थे। मुख्यमंत्री ने ऐसे एजेंटों के खिलाफ दर्ज मामलों के वापसी का निर्देश दिया है। वहीं एक बार छत्तीसगढ़ शासन के गृह मंत्रालय से जारी निर्देश के परिपालन में चिटपᆬंड कंपनियों में रूपए जमा करने वाले निवेशकों से निर्धारित प्रपत्र में 6 अगस्त तक आवेदन लिए जा रहे हैं। शासन के निर्देश पर कलेक्टर जितेंद्र कुमार शुक्ला ने आवेदन लेने के लिए तहसील स्तर पर संबंधित तहसीलदारों को अधिकृत किया है। शासन के आदेश जारी होने के बाद अंतिम तिथि के एक दिन पूर्व निवेशकों की भीड़ उमड़ पड़ी है। जांजगीर तहसील में ही 3 कांउटर बनाए गए हैं। यहां सुबह से लेकर देर शाम तक निवेशक आवेदन जमा करने कार्यालयों में जमे रहे। लोगों ने पिᆬजिकल डिस्टेसिंग व कोरोना गाइड लाइन की पूरी तरह अनदेखी कर आवेदन जमा किया। वहीं अंतिम तिथि को भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। चिटफंड कंपनियों में निवेश करने वालों में राशि वापसी की उम्मीद जगी है। वहीं एजेंट भी उनके खिलाफ हो रही कानूनी कार्रवाई से राहत मिलने की उम्मीद जता रहे हैं।

भू अधिग्रहण की राशि कंपनियों में जमा

चिटफंड कंपनियों ने लोगों को ऐसा लालच दिया कि वे पावर प्लांट व अन्य निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि के बदले मिले मुआवजा राशि तक को कंपनियों में जमा कर दिए। चिटफंड कंपनियों के बंद होने के बाद अब निवेशक राशि वापसी के लिए एजेंटों पर दबाव बना रहे है। जबकि वास्तविक कर्ता धर्ता फरार हो गए हैं।

पᆬार्म जमा करने के बाद नहीं दी जा रही पावती

शासन के निर्देश पर सभी तहसीलों में रूपए पाने की उम्मीद में निवेशकों की भीड़ सुबह से लेकर देर शाम तक उमड़ रही है। हालांकि कार्यालयों में अलग-अलग काउंटर बनाकर उनका आवेदन लिया जा रहा है, मगर अधिकांश काउंटरों में आवेदन जमा करने के बाद भी उन्हें पावती नहीं दी जा रही है।

एजेंटों के रिश्तेदार भी हुए शिकार

चिटफंड कंपनियों की ठगी का शिकार एजेंटों के रिश्तेदार भी हुए हैं। ज्यादा से ज्यादा कमीशन के चक्कर में एजेंटों ने अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों की राशि इन कंपनियों में जमा करा दिया। जब राशि देने की बारी आई। तब कंपनी के अधिकारी तो फरार हो गए। मगर लोग राशि के लिए एड़ी चोटी एक कर रहे हैं। अगर निवेशकों पर पुलिस व प्रशासन का शिकंजा कसेगा तो लोगों की राशि वापस हो सकती है।

इन चिटफंड कम्पनियों के खिलाफ हुई एफआईआर

जानकारी के अनुसार 20 चिटफंड कम्पनियों के खिलाफ थाने में एफआइआर दर्ज किया है। जिसमें रानीराज फार्म हाऊस, शुभसाई एण्ड रियल स्टेट, एसपीएनजे लैण्ड प्रोजेक्ट एण्ड डेवलपर्स, विनायक होम्स प्रतिष्ठा कंपनी, इन्फ्राकान, कोलकाता वेयर इंडस्ट्रीज लिमिटेड, माइक्रो फाइनेंस लिमिटेड, सांई प्रसाद कम्पनी, इन्फ्रारियाल्टी लिमिटेड, फाइनइंडिया कंपनी, श्रीराम सिविकान लिमिटेड, सर्वमंगला प्रापर्टी इंडिया गुरु रियल एण्ड एप्लाई लिमिटेड, एसबीआई वेब कंपनी लिमिटेड एवं शुभ एलाईट मैन्युअल बेनिफिट लिमिटेड, भूमि डेकन एवड एग्रीटेक लिमिटेड, यूनाईटेड रियल जीवन भारती इन्दोर लाईफ कम्पनी के खिलाफ भादवि की धारा 420, 409,34 व धारा 6, 10 निक्षेपक अधिनियम की धारा के तहत मामला पंजीबद्घ किया गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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