Janjgir-Champa News : अकलतरा। क्रोकोडायल पार्क के पास स्थित उपरोहित तालाब मे 5 फीट का मगरमच्छ मिलने पर ग्रामवासियों द्वारा पकड़कर उसे क्रोकोडायल पार्क में शिफ्ट किया गया। जानकारी के अनुसार अकलतरा थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत कोटमीसोनार में आज सुबह ग्रामीण उपरोहित तालाब में नहाने के लिए गए तो घाट के पास में ही एक मगरमच्छ तैरता हुआ दिखाई दिया। तालाब में नहाने के लिए गए लोगों के द्वारा बांस एवं रस्सी की सहायता से बड़ी मशक्कत के बाद मगरमच्छ को पकड़कर क्रोकोडायल पार्क सहायक प्रभारी संतोष यादव एवं वनरक्षक मुकेश पटेल को सूचना दी गई।

वन विभाग के कर्मचारियों एवं ग्रामवासियों के प्रयास से मगरमच्छ को क्रोकोडायल पार्क में सुरक्षित शिफ्ट किया गया। कोटमीसोनार एवं आसपास के गांवों के तालाबों मे लगातार मगरमच्छों की उपस्थिति की बात ग्रामवासियों की बात बताई जा रही है। ग्राम पोड़ीदल्हा के मुर्रा तालाब में भी दो दिन पूर्व एक सात-आठ फीट के मगरमच्छ होने की बात बताई गई थी जिसके चलते ग्रामवासी भय के चलते मुर्रा तालाब मे नहाने से कतराते हैं एवं जो लोग नहाते हैं वे भी घाट पर ही नहा लेते हैं। वन विभाग को सूचना दिए जाने के बाद भी पोड़ीदल्हा के मुर्रा तालाब से मगरमच्छ को आज तक नहीं निकाला गया है। मगरमच्छ तालाब मे नहाने गए ग्रामवासियों पर कभी भी हमला कर दुर्घटना को अंजाम दे सकता है।

बता दें कि कोटमी सोनार में देश का तीसरा और छत्तीसगढ का एकमात्र क्रोकोडाइल पार्क स्थित है। यहां चार सौ बड़े मगरमच्छों के अलावा लगभग 50 बच्चे भी हुए हैं। प्रदेश के एक मात्र क्रोकोडाइल पार्क में सामान्य दिनों में बड़ी संख्या में राज्य के अलावा अन्य राज्यों के पर्यटक भी आते हैं। वे मगरमच्छों को देखकर व उनकी जानकारी प्राप्त कर रोमांचित होते हैं। बारिश के दिनों में जल स्तर बढने और नए मगरमच्छों के अंडों से बाहर निकलने के साथ अक्सर मगरमच्छ तालाब से निकल कर सूखे स्थल की ओर बढने लगते हैं। पार्क की स्थापना से पूर्व यहां यह एक व्यापक समस्या थी, लेकिन पार्क बनने के बाद से ऐसा कम होता है।

इस पार्क की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी। बाद में मगरमच्छ पार्क से लगे सवा सौ एकड़ क्षेत्रफल को साईंस पार्क के रूप में विकसित किया गया है। पार्क में विज्ञान से जुड़ी रोचक जानकारी सौर ऊर्जा व अन्य जानकारी लोगों को मिलती है। इसलिए यह बच्चों सहित बड़ों के लिए भी आकर्षण का केन्द्र हैं। वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि नर मगरमच्छ बच्चों को ही खा जाते हैं। इसके कारण इनकी संख्या उस अनुपात में नहीं बढ़ पा रही है जिस अनुपात में बढ़नी चाहिए। यह पार्क चेन्न्ई के बाद देश का दूसरा बड़ा मगरमच्छ पार्क है यहां हर साल लगभग 60 हजार पर्यटक आते हैं।

Posted By: Himanshu Sharma

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