जांजगीर-चांपा। नईदुनिया प्रतिनिधि

सड़क पर घूमते तथा बैठे मवेशियों से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। एनएच सहित मुख्य मार्गो के मवेशियों ने वाहन चालकों की परेशानी बढ़ा दी है। वहीं सालों बाद भी अब तक नगर पालिका जांजगीर नैला द्वारा कॉजी हाऊस की व्यवस्था अब तक नहीं की जा सकी है, हालांकि नगर पालिका द्वारा लगभग दो साल पूर्व लाखों रूपये खर्च कर काऊ केचर की खरीदी गई थी, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते बिना उपयोग के काऊ केचर कबाड़ में तब्दील हो रहा है और मवेशी शहर के रोड, चौक-चौरहों पर बैठकर दुर्घटना को आमंत्रण दे रहे हैं।

जांजगीर के कचहरी चौक, नैला मार्ग, केरा मार्ग, लिंक रोड सहित अन्य सड़कों में दिन भर मवेशी घूमते व बैठे रहते हैं। दिन को वाहन चालक इनसे बचकर जैसे तैसे निकल जाते हैं, जबकि रात में वाहन चालकों की परेशानी बढ़ जाती है। यहां कांजी हाऊस के लिए ठेकेदार नहीं मिल रहे हैं। इसके चलते आवारा मवेशी सड़क पर दिन व रात में मंडराते हैं। इसी तरह राष्ट्रीय राजमार्ग क्रं. 49 में नहर पुल के आगे कई जगहों पर मवेशी घूमते रहते हैं, जबकि खोखसा फाटक के बाद कुलीपोटा, दर्राभांठा, लछनपुर चौक, कोरवापारा, बरपाली आदि जगहों में मवेशी झुंड में खड़े व बैठे रहते हैं। खोखसा फाटक के बाद सड़कों में लाइट की व्यवस्था नहीं है। एनएच मार्ग होने के कारण दो पहिया, चार पहिया व भारी वाहन फर्राटे भरते हैं। वाहन तेज गति में होने के दौरान अचानक सामने मवेशियों का झुंड देखकर चालक हड़बड़ा जाता है औेर ऐसी स्थिति में वाहन को नियंत्रित करना कठिन हो जाता है। इसके चलते दुर्घटना की स्थिति निर्मित हो जाती है। पुराना कालेज के पास कांजी हाऊस था, मगर इस भवन को तोड़कर इसमें कब्जा कर लिया गया। इसी तरह तीन साल पूर्व नैला के वार्ड 1 में कांजी हाऊस बनाया गया था लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते आवारा पशुओं को यहां नहीं पहुंचाया गया। ऐसे में ठेकेदार द्वारा आवारा पशुओं को पकड़ने में रूचि नहीं ली गई, तब से यहां कांजी हाऊस नहीं है। इसके चलते सड़कों पर घूमते मवेशियों की ओर ध्यान आकृष्ट करने वाला कोई नहीं है। इधर चारागाह सहित अन्य भूमि पर अवैध कब्जा धड़ल्ले से किया जा रहा है। इसके चलते मवेशियों के सामने चारा की समस्या खड़ी हो गई है। मवेशी मालिक दूध दुहने के बाद उन्हें छोड़ देते हैं और मवेशी चारा की तलाश में इधर उधर भटकते रहते हैं। आवारा मवेशियों को कांजी हाऊस तक ले जाने की जवाबदारी नगरीय प्रशासन की है, मगर जांजगीर व चांपा में इसकी व्यवस्था नहीं होने के कारण मवेशी मुख्य मार्गो पर विचरण करते रहते हैं। इन दोनों शहरों में गाय, भैंस, भैंसा, बैल, बछड़ा कई लोगों ने पाला है। इनमें से ज्यादातर मवेशी इधर उधर भटकते रहते हैं। यही हाल ग्रामीण क्षेत्रों का है। कई गांवों में कांजी हाऊस तो है, मगर वहां तक मवेशी नहीं पहुंच पाते। शहर में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए नगर पालिका जांजगीर-नैला द्वारा लगभग 5 लाख रूपये खर्च कर काऊ केचर की खरीदी की गई थी, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते यहां लोगों के लाखों रूपये का काऊ केचर बिना उपयोग के कबाड़ में तब्दील हो रहा है। बेसहारा पशुओं के चलते जिला मुख्यालय पहुंचे राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि नपा द्वारा एक-दो दिन बेसहारा मवेशियों की धरपकड़ की गई, मगर इसके बाद अब कार्रवाई नहीं हो रही है।

मवेशी मालिकों पर भी हो कार्रवाई

मवेशी मालिक दूध दुहने के बाद उन्हें छोड़ देते हैं और मवेशी चारा की तलाश में इधर उधर भटकते रहते हैं। मवेशियों को कांजी हाऊस तक ले जाने की जवाबदारी नगरपालिका की है, मगर जिला मुख्यालय में मवेशियों के लिए उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण मवेशी मुख्य मार्गो पर विचरण करते रहते हैं। शहर में गाय, भैंस, भैंसा, बैल, बछड़ा कई लोगों ने पाला है। इनमें से ज्यादातर मवेशी इधर उधर भटकते रहते हैं। यही हाल ग्रामीण क्षेत्रों का है। कई गांवों में कांजी हाऊस तो है, मगर वहां तक मवेशी नहीं पहुंच पाते। चारा के अभाव में मवेशी कागज व पालिथीन को अपना आहार बनाते हैं। इससे उनका जीवन भी संकट में रहता है।

वाहनों की ठोकर से मवेशियों की हो रही मौत

जिले की सड़कों में इन दिनों भारी वाहनों की चपेट में लगातार गाय और बैलों की मौत हो रही है। देर रात तक भारी वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग पर पᆬर्राटे भरते हैं और सड़क किनारे रहने वाले ग्रामीण और शहरवासी अपने पालतू पशुओं को खुले में विचरण के लिए सड़क पर छोड़ देते हैं। बेजुबान जानवर सड़क पर इधर उधर बैठ जाते हैं और लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने के कारण निरीह पशु बेमौत मारे जाते हैं। बेजुबान जानवर सूखे स्थान की तलाश में सड़क के ऊपर ही बैठ जाते हैं, मगर ऐसे पशु मालिकों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

जिला मुख्यालय में कांजी हाऊस का अभाव

नगर पालिका जांजागीर नैला के पिछले वर्ष नैला के वार्ड 1 में कांजी हाऊस बनाया गया था लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते बेसहारा पशुओं को यहां नहीं पहुंचाया गया। ऐसे में ठेकेदार द्वारा बेसहारा पशुओं को पकड़ने में रूचि नहीं ली गई, तब से यहां कांजी हाऊस नहीं है। इसके चलते सड़कों पर घूमते मवेशियों की ओर ध्यान आकृष्ट करने वाला कोई नहीं है। इधर चारागाह सहित अन्य भूमि पर अवैध कब्जा धड़ल्ले से किया जा रहा है। इसके चलते मवेशियों के सामने चारा की समस्या खड़ी हो गई है। मवेशी मालिक दूध दुहने के बाद उन्हें छोड़ देते हैं और मवेशी चारा की तलाश में इधर उधर भटकते रहते हैं। बेसहारा मवेशियों को कांजी हाऊस तक ले जाने की जवाबदारी नगरीय प्रशासन की है, मगर जांजगीर में इसकी व्यवस्था नहीं होने के कारण मवेशी मुख्य मार्गो पर विचरण करते रहते हैं। बेसहारा पशुओं के चलते जिला मुख्यालय पहुंचे राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network