शिवरीनारायण। (नईदुनिया न्यूज)। जब से कोरोना वायरस ने महामारी का रूप धारण किया है तब से संपूर्ण विश्व के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक सभी गतिविधियां प्रभावित हुई है इससे आध्यात्मिक जगत को भी अपने सार्वजनिक क्रियाकलाप सरकार के निर्देशानुसार बंद करनी पड़ी है जिसे समय के साथ-साथ संचालित करने की आवश्यकता है। ये बातें दूधाधारी मठ पीठाधीश्वर राजेश्री डॉ. महन्त रामसुन्दर दास ने कही।

उन्होंने कहा कि जबसे कोरोनावायरस ने वैश्विक महामारी का रूप धारण किया है तब से संपूर्ण विश्व के सभी सांसारिक गतिविधियां प्रभावित हुई है, इससे आध्यात्म जगत भी अछूता नहीं रहा मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, गिरजाघर सभी के सार्वजनिक क्रियाकलाप बंद पड़े हुए हैं। जिससे आम जनता को अपनी आध्यात्मिक का मार्ग बंद पड़ा हुआ नजर आ रहा है। समय के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियां प्रारंभ हुई है। रेल, हवाई सेवा, बाजार जैसे अनेक सार्वजनिक उपक्रम धीरे-धीरे प्रारंभ होते चले जा रहे हैं। इसी क्रम में आध्यात्मिक संस्थानों का भी जनहित को ध्यान में रखकर निश्चित नियमों के साथ प्रारंभ किए जाने की आवश्यकता है, इस पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सहित सभी राज्यों के सरकारों को अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि धर्म एवं आध्यात्म मानव की उन्नाति का आधार है इसके बिना कोई भी राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता मनुष्य के दिव्य जीवन की तो कल्पना ही नहीं की जा सकती। धर्म युक्त राष्ट्र ही उन्नाति के शिखर को प्राप्त करता है, धर्म के बिना राष्ट्र का पतन हो जाता है। धर्म शास्त्रों में मानव जीवन के केवल चार ही उद्देश्य बताए गए हैं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन उद्देश्यों की पूर्ति आध्यात्मिक जगत से ही की जा सकती है। जब विज्ञान जीव का साथ छोड़ देता है तब आध्यात्म ही उसका मार्ग प्रशस्त करता है। डॉक्टर तब तक ही किसी मरीज का उपचार करता है जब तक मरीज का शरीर उनके दवाइयों को स्वीकार कर रहा होता है, प्रत्येक मनुष्य के जीवन में एक क्षण ऐसा जरूर आता है जब दवाइयां काम करना बंद कर देती है, फिर तो डॉक्टर भी हाथ जोड़कर मरीज को विदा कर देता है वह कह देता है कि अब यह जो खाना चाहता है खिलाएं जो पीना चाहते हैं पीलाएं अब यह थोड़े समय का मेहमान है तब फिर मनुष्य के सामने केवल आध्यात्म का मार्ग ही शेष रह जाता है, लोग परमात्मा को याद करते हैं, बहुत से उदाहरण हमें देखने को प्राप्त होता है जहां दवा काम नहीं कर पाता वहां दुआ काम कर जाती है। रामचरितमानस में तो गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने स्पष्ट शब्दों में लिखा है। बिना हरि के भजन के मनुष्य के जीवन से दुख दूर हो ही नहीं सकता है, इन सब बातों को ध्यान में रखकर सभी सामाजिक गतिविधियों के साथ आध्यात्मिक गतिविधियों को भी प्रारंभ करने की आवश्यकता है। केंद्र एवं राज्य के सरकारों को इस पर विधि पूर्वक विचार कर उचित निर्णय लेना चाहिए ताकि संपूर्ण देश में आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग जनता जनार्दन के लिए प्रशस्त हो सके।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस