जांजगीर-चाम्पा। नईदुनिया प्रतिनिधि। राज्य सरकार द्वारा पंचायतों में लाखों रूपये खर्च कर गौठान का निर्माण कराया गया है, मगर पंचायत प्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते यहां पहुंचे गायों की मौतें हो रही है। जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम पंचायत खोखरा में पर्याप्त चारा व देखरेख के आभाव में 10 गायों की मौत हो गई।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार करने व उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए राज्य शासन द्वारा महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी योजना का शुभारंभ किया गया है। योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का मार्ग प्रशस्त होगा। योजना के क्रियान्वयन के लिए समयबद्घ कार्य-योजना तैयार कर मवेशियों के लिए गोठान बनाने के साथ ही साथ बायोगैस सयंत्र स्थापना के लिए उपयुक्त स्थल का चयन किया जा रहा है, ताकि ग्रामीणों को आसानी से लाभ मिल सके। गरूवा योजना के तहत सभी पंचायतों की शासकीय भूमि पर गोठान का निर्माण कराया जाना है, ताकि यहां गायों को चारा, पानी की सुविधा मिल सके। योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा गौठान निर्माण के लिए लाखों रूपये आबंटित भी किया जा रहा है। यहां शासन से स्वीकृति मिलने के बाद अधिकांश पंचायतों में गौठान का निर्माण कराया गया है, मगर पंचायत प्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते यहां पहुंचे मवेशियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां न तो पर्याप्त शेड की व्यवस्था की जा रही है और न जगह को सूखा रखने क्रांकीट कराया गया है। जिसके चलते कई पंचायतों में गायों की अकाल मौते हो रही है। जिला मुख्यालय के समीपस्थ गांव खोखरा में पर्याप्त चारा व संक्रमण के चलते 10 गायों की मौत हो गई। ग्राम पंचायत खोखरा में बने गौठान में लगभग 200 गायों को रखा गया है। यहां न मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा की व्यवस्था की जा रही और न ही यहां उनके लिए क्षमता के अनुरूप छायादार जगह की व्यवस्था की गई है। जिसके चलते गौठान दलदल हो गया है। यहां पिछले सप्ताह भर से रोजाना हो रही बारिश में मवेशियों को परिसर के अंदर भिगना पड़ा। वहीं रोजाना बारिश के चलते परिसर कीचड़ से सराबोर है। साथ ही पर्याप्त चारा के आभाव में 10 मवेशियों की मौत हो गई। हालांकि घटना की जानकारी मिलने पर कई अधिकारी गौठान पहुंचे और इस संबंध में जानकारी ली गई। साथ ही यहां अव्यवस्था को देख गौठानों में पर्याप्त व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया।

अधिकांश गौठानों में शेड का आभाव

शासन के निर्देश पर अधिकांश पंचायतों में गौठान का निर्माण कराया गया है, मगर यहां राज्य सरकार की महत्वकांक्षी योजना पंचायत प्रतिनिधियों की भेंट चढ़ने लगी है। राज्य सरकार द्वारा पंचायतों में लाखों रूपये आबंटित कर गौठान निर्माण कराया जाना है, मगर पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा बिना शेड व क्रांकीट के गौठान का संचालन कराया जा रहा है। इसके चलते यहां पहुंचे मवेशियों को बारिश में भीगना पड़ रहा है।

कलेक्टर ने सचिव को किया निलंबित

ग्राम पंचायत खोखरा स्थित गौठान में मवेशियों की मृत्यु को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर जनक प्रसाद पाठक गौठान पहुंचे और उन्होंने गौठान संचालन में लापरवाही एवं उदासीनता बरतने पर ग्राम पंचायत खोखरा के सचिव गजानंद साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं पशु विभाग के नोडल अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

व्यवस्था सुधारने का दिया निर्देश

कलेक्टर जनपद पंचायत नवागढ़ के ग्राम पंचायत खोखरा स्थित गौठान में मवेशियों की मृत्यु होने की सूचना मिलने पर तत्काल जिला पंचायत सीईओ व पशु चिकित्सा विभाग के उप संचालक को लेकर खोखरा गौठान पहुंचे और उन्होंने गौठान में उपलब्ध समस्त आधारभूत सुविधाओं जैसे- पशुओं के लिए चबुतरा, पानी हेतु टंकी, कोटना, चारा के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

रात में मवेशियों को गौठानों में रखने पर लगा प्रतिबंध

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तीर्थराज अग्रवाल ने बताया कि एक अगस्त 2019 से खोखरा गौठान का संचालन किया जा रहा है। ग्राम पंचायत द्वारा गौठान में लगभग 200 पशुओं को रात्रि के समय भी रखा जा रहा था। ये सभी पशु बेसहारा थे एवं आसपास के गांव वालों द्वारा लाकर यहां छोड़ा गया था। पंचायत द्वारा रात्रि के समय जानवरों को रखने और पिछले दो दिनों से होने वाली बारिश के कारण रात्रि में खुले में भीगने व भूखे होने के कारण पशुओं की मृत्यु हुई है। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो इस के लिए किसी भी परिस्थिति में रात्रि में गौठानों में पशुओं को नहीं रखने के लिए सभी जनपद पंचायत सीईओ को पुनः सख्त निर्देश जारी किया गया है।

खेतों में घुस रहे मवेशी

गौठान में रखे ज्यादातर मवेशी बेसहारा है और इन्हें रात में नहीं रखा जाना है। ऐसे में ये मवेशी पᆬसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यहां के मवेशी समीपस्थ गांव मेंहदा, धाराशिव, भड़ेसर व आसपास के गांवों की खेतों में पᆬसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में सरकार की गौठान योजना किसानों की पᆬसल सुरक्षा के लिए कारगर नहीं हो पा रही है।