अकलतरा। नईदुनिया न्यूज। केएसके महानदी पावर कम्पनी लिमिटेड में कार्यरत एचएमएस मजदूर संघ एवं युनाइटेड मजदूर संघ के बीच वेतन वृद्धि को लेकर हुए विवाद के चलते तीसरे दिन भी प्लांट में विद्युत उत्पादन ठप्प रहा। भूविस्थापित मजदूरों का संघ एसएमएस के पदाधिकारियों के द्वारा प्रशासन को आश्वासन दिया गया था कि युनाइटेड मजदूर संघ के कर्मचारियों की सहायता के बिना वे प्लांट को चालू कर विद्युत उत्पादन प्रारंभ कर देंगे, लेकिन पर्याप्त मात्रा में कर्मचारी नहीं पहुंचने के कारण प्लांट चालू नहीं हो सका।

यूनाईटेड मजदूर संघ के पदाधिकारियों द्वारा कलेक्टर एवं एसपी को ज्ञापन सौंपकर प्रस्ताव दिया गया है कि यूनाईटेड मजदूर संघ के कर्मचारियों को अवसर प्रदान किये जाने पर एक घंटे के अन्दर उनके द्वारा प्लान्ट को चालू कर दिया जाएगा। साथ ही एचएमएस मजदूर संघ के जिन कर्मचारियों के द्वारा युनाईटेड मजदूर संघ के कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई है उन कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई किये जाने की मांग की गई है। ज्ञात हो कि केएसके एमपीसीएल में कार्यरत भूविस्थापित कर्मचारियों के संघ एचएमएस के द्वारा वेतन वृद्धि सहित अन्य मांगों को लेकर लगातार आंदोलन किया जा रहा था, जिसके चलते कम्पनी प्रबंधन के द्वारा एचएमएस मजदूर संघ की मांगों को स्वीकार कर भूविस्थापित मजदूरों का न्यूनतम वेतन 17 हजार रुपये कर दिया गया। ठेका श्रमिकों का संघ युनाइटेड मजदूर संघ के द्वारा भी वेतन वृद्धि की मांग किये जाने पर कम्पनी प्रबंधन के द्वारा उनके मांग पर भी हामी भरते हुए उनका वेतन भी 17 हजार रुपए करने का लिखित आदेश दे दिया गया। ठेका श्रमिकों को अपने समकक्ष वेतन मिलना भूविस्थापित मजदूर संघ के कर्मचारियों को अच्छा नहीं लगा एवं युनाईटेड मजदूर संघ के कर्मचारियों की पिटाई कर दी गई। इसके जवाब में युनाईटेड मजदूर संघ के कर्मचारियों के द्वारा भी जवाबी पिटाई कर दी गई। दोनों कर्मचारी संघ के लोगों के द्वारा मुलमुला थाने में शिकायत दर्ज कराये जाने पर पुलिस द्वारा दोनों ही पक्ष के विरुद्ध धारा 147, 148, 149, 294, 323 एवं 506 के अन्तर्गत मामला दर्ज किया गया है। दो मजदूर संघों के बीच में वेतन वृद्धि को लेकर हुए विवाद के चलते पिछले तीन दिनों से केएसके एमपीसीएल में विद्युत उत्पादन पूरी तरह ठप्प हो गया है, जिसके चलते तमिलनाडू, आन्ध्रप्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में विद्युत सप्लाई बंद हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन के द्वारा पहल करते हुए 12 सितम्बर को मजदूर संघों के विवाद का पटाक्षेप कर प्लांट के अन्दर विद्युत उत्पादन करने की बात कही जा रही थी, लेकिन तीसरे दिन भी प्लांट चालू नहीं हो सका।