जांजगीर-चांपा (नईदुनिया न्यूज)। हलषष्ठी व्रत बुधवार को भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर 17 अगस्त को माताएं हलषष्ठी मैया से अपने संतानों की सुख-समृद्घि और दीर्घायु के लिए कामना करेंगी। व्रत के बाद महिलाएं पसहर चावल का भात ग्रहण करेंगी और संतानों को भी खिलाएंगी।

बुधवार को हलषष्ठी पूजा का भक्तिमय माहौल रहेगा। माताएं श्रद्घा भक्ति के साथ हलषष्ठी मैया की पूजा-अर्चना करेंगी। बधाों को पोता भी लगाया जाएगा। महिलाएं संतान प्राप्ति, संतानों की सुख-समृद्घि और दीर्घायु के लिए किए जाने वाली व्रत की तैयारी एक दिन पहले से करती रहीं। यही कारण है कि इसके लिए कांसी के पूᆬल के साथ महुए का दातून, पत्तल व दोना की खरीदी की गई। इसके अलावा बाजार में महिलाओं ने पसहर चावल, महुआ, लाई, चना और मिट्टी के चुकियों की खरीदी भी की। इसके कारण मुख्य बाजार सहित सभी अन्य स्थानों में लोगों की भीड़ लगी रही। बाजार में पसहर चावल 100 रुपए से लेकर डेढ़ सौ रुपए किलो में बिका। इसके अलावा गांव के किसान जो वास्तविक पसहर लेकर आए थे, वह सौ रुपए किलो मिल रहा था। इस पर्व में भाजी का विशेष महत्व रहता है, क्योंकि इस दिन छः प्रकार की भाजी को एक साथ मिलाकर पकाने और उसे ग्रहण करने का प्रावधान है। इस व्रत में खासकर उन भाजियों और सामग्रियों का उपयोग किया जाता हैजो बिना हल चलाए उगाया गया हो। जिला मुख्यालय में सड़क किनारे हलषष्ठी पर्व का सामग्री बिकने आई। महिलाओं ने इसकी खरीदी की। बाजार में 6 प्रकार की भाजी, पत्तल, दोना, लाई व अन्य सामान की खूब बिक्री हुई। दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर के पुजारी पं किरण कुमार मिश्रा ने बताया कि मान्यतानुसार इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। पूजा के बाद व्रत पारणा में भी हल से उपजे अन्ना का उपयोग नहीं किया जाता। यह भी मान्यता है कि हलषष्ठी का व्रत माताएं संतान की खुशहाली एवं दीर्घायु की कामना कर रखती है और नव विवाहित महिलाएं भी संतान प्राप्ति के लिए करती है। इस व्रत में भैंस की दूध,दही,घी, छह प्रकार के भाजी , मुनगा भाजी, पसहर चावल के भात का सेवन कर व्रत किया जाता है। केवल हलछठ व्रत में ही गाय के दूध, दही घी का पूजन में उपयोग नहीं होता है। हलषष्ठी का व्रत माताएं संतान की खुशहाली एवं दीर्घायु की कामना के लिए रखती है और नव विवाहित महिलाएं भी संतान प्राप्ति के लिए करती है। इस व्रत के दिन घर में या मंदिर के किनारे तालाब सगरी खोद कर छठ माता का भैंस के गोबर से चित्र बनाकर छठ रख कर उसमें पलास और काशी के टहनी लगा कर मिटी के बर्तन मिटी के खिलौने पलास के पत्ते पर छठ रख कर पूजन करने का महत्व है। इस दिवस महिलाओं को हल चलाए भूमि पर चलने की भी मनाही होती है।

भैंसी के दूध, दही और घी की रही मांग

खमरछठ पर्व में भैंस के दूध, दही और घी का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इस दिन व्रती महिलाओं को गाय के दूध, दही और घी का प्रयोग वर्जित है। यही कारण है कि ज्यादातर महिलाओं ने व्रत के लिए मंगलवार को ही इन चीजों की खरीददारी की। इस कारण डेयरियों में दोपहर के बाद रात 9 बजे तक भीड़ रही। पर्व पर इनके महत्व को देखते हुए दूध 60 रुपए लीटर, दही 100 रुपए तो घी 800 रुपए किलो में बिका।

Posted By: Nai Dunia News Network

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