जांजगीर-चांपा । (नईदुनिया न्यूज) । नगरपालिका व खेल विभाग ने शहर में केवल खेल मैदान बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है, लेकिन शहर सहित आसपास के गांव के खिलाड़ियों को आज भी अपना हुनर का प्रदर्शन करने के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है। वहीं सुविधाओं के अभाव में कई गरीब प्रतिभावान बच्चे निराश होकर खेल से अपना मुंह मोड़ ले रहे हैं। हर साल राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय प्रतियोगिता होने के बाद भी प्रशासन शहर के खेल मैदानों की दशा संवारने गंभीर नहीं है।

आर्थिक दृष्टि से संपन्न होने के बावजूद जांजगीर नगरपालिका व खेल विभाग अपने शहर में खेल सुविधाएं जुटाने के प्रति गंभीर नहीं है। समुचित खेल मैदान के अभाव में अंचल के गरीब बच्चे नियमित प्रैक्टिस नहीं कर पा रहे हैं और विशेषज्ञ कोच की व्यवस्था नहीं होना भी उनके लिए मानसिक तौर पर परेशानी का सबब बनता जा रहा है। नगर से पांच किलोमीटर दूर खोखराभाठा में खेल एवं युवक कल्याण विभाग का स्टेडियम बना है, लेकिन इसकी हालत भी खस्ता है। प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार लाखों रुपए की लागत से बना यह स्टेडियम खंडहर में तब्दील हो गया है। स्टेडियम में लगे लोहे के खिड़की, दरवाजे, वासबेसिन, नल सहित अन्य सामानों को चोरों ने पार कर दिया है। यहां खिलाड़ी तो नहीं पहुंचते, लेकिन शहर के असमाजिक तत्वों के लिए यह सूकुनदायी जगह जरुर बन गया है, वहीं इसका उपयोग कई बार धान भंडारण के लिए भी किया गया मगर 13 साल बीत जाने के बाद भी यह स्टेडियम खेल विभाग को हेण्डओवर नहीं हुआ है जबकि स्टेडियम पूरी तरह जर्जर हो गया है। शहर में खेल सुविधाओं को विस्तार देने नगरपालिका द्वारा अलग से लाखों का सालाना बजट निर्धारित किया जाता है, मगर इसका लाभ खिलाड़ियों को नहीं मिलता। इसके अलावा शासन से भी खेल एवं युवक कल्याण विभाग को हर साल लाखों रुपए खेलों को बढ़ावा देने के लिए मिलते हैं, लेकिन इस राशि से भी खिलाड़ियों का विकास नहीं हो पा रहा है।

लाखों का खेल मैदान बेकार

नगरपालिका द्वारा द्वारा नैला भाठापारा में खेल मैदान के लिए राजीव खेल प्रोत्साहन योजनान्तर्गत 8 लाख रुपए पᆬूंक दिए गए हैं, लेकिन आज तक यहां आवश्यक सुविधाएं नहीं जुट पाई। नतीजतन लाखों रुपए का यह मैदान अब चारागाह बन गया है। इसके बावजूद नपा को मैदान की दशा देखने की पᆬुर्सत नहीं है।

खलता है इनडोर स्टेडियम की कमी

बास्केटबॉल और हैण्डबाल के लिए यह जिला प्रदेश में खासा स्थान रखता है। हर साल यहां के कई खिलाड़ी राज्य, राष्ट्रीय सहित अतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता तक पहुंचते हैं। इसके अलावा पिछले कई सालों से जिले को राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी करने का मौका मिल रहा है, लेकिन यहां बास्केटबाल और हैण्डबाल का मैदान उपयुक्त नहीं है। अच्छे प्रदर्शन के लिए इनडोर मैदान की मांग हमेशा से खिलाड़ी करते आ रहे हैं, लेकिन खिलाड़ियों की यह मांग अब तक पूरी नहीं हुई है।

मैदान तक पहुंचने मशक्कत

खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा प्रतिवर्ष ग्रीष्मकालीन खेल शिविर का आयोजन किया जाता है। इस दौरान खेल विभाग को मैदान ढूंढना पड़ता है। कुछ विधाओं का आयोजन हाईस्कूल व हैण्डबाल मैदान में हो जाता है, जबकि जगह के अभाव में हाकी, पᆬुटबाल, दौड़, लंबी कूद, उंची कूद का आयोजन खोखराभाठा स्थित पुलिस ग्राउण्ड में किया जाता है। इसके चलते खिलाड़ियों को शहर से 4 किलोमीटर दूर पुलिस ग्राउण्ड जाना पड़ता है। ऐसे में खिलाड़ियों की आधी ऊर्जा आवाजाही में खत्म हो जाती है।

अभावों के बावजूद रोशन किया जिले का नाम

जिले में खेल मैदाव व प्रशिक्षकों की कमी है। इसके बावजूद भी यहां के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना लोहा मनवाया है। पᆬ्री स्टाइल तैराकी में बलौदा की अंजनी पटेल ने कामनवेल्थ अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में अपना जौहर दिखाया, वहीं हाकी, बास्केट बाल, बेस बाल में भी कई खिलाड़ियों ने जिले का नाम रोशन किया।

गांवों से नहीं निकल रहे खिलाड़ी

ज्यादातर खेल संगठनों का कार्य जिला मुख्यालय तक ही सिमट गया है। इसी तरह खेल एवं युवा कल्याण विभाग की पहुंच भी सुदूर गांवों तक नहीं है। शालेय खेलकूद स्पर्धा में भी ज्यादातर खिलाड़ी जिला मुख्यालय व शहरी क्षेत्र के होते हैं। ऐसे में गांवों की प्रतिभाएं सामने नहीं आ पा रही है। पाइका योजना से कुछ उम्मीद बंधी थी, मगर इसका भी लाभ ज्यादा नहीं दिख रहा है। स्कूलों में विद्यार्थियों से क्रीड़ा शुल्क लिया जाता है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में यह राशि जमा होती है मगर ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को खेल प्रदर्शन का मौका बहुत कम ही मिलता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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