जांजगीर-चांपा (निप्र)। भूमि व बजट स्वीकृत होने के बाद भी जिला परिवहन विभाग किराए के मकान में संचालित हो रहा है। ऐसे में शासकीय पैसे का उपयोग किराया पटाने में किया जा रहा है। साथ ही वर्तमान में संचालित कार्यालय में जगह की कमी से महत्वपूर्ण दस्तावेज असुरक्षित पड़े हुए हैं। इसके अलावा लाइसेंस बनाने वालों की कतार एनएच तक लगती है।

जिला बनने के 16 साल बाद भी कई शासकीय विभाग किराए के मकान में संचालित हो रहे हैं। शासकीय पैसे का उपयोग क्षेत्र के विकास में होने के बजाए किराया पटाने में हो रहा है। जिले के कई विभाग ऐसे हैं जो जिला बनने के 16 साल बाद भी स्वयं के कार्यालय के लिए मोहताज है। इसमें उद्यानिकी विभाग, क्रेडा विभाग, अंत्यावसायी विभाग, जिला परिवहन विभाग, रोजगार कार्यालय, जिला पंजीयक, आबकारी वृत्त कार्यालय, नागरिक आपूर्ति निगम, जिला विपणन कार्यालय आदि विभाग कई वर्षों से किराए के मकान में संचालित हो रहा है। वहीं जिला परिवहन विभाग भूमि व राशि स्वीकृति के बाद भी किराए के मकान में संचालित हो रहा है। विभाग को स्वयं के भवन के लिए जिला पंचायत के पहले एक वर्ष पहले से ही 1 एकड़ भूमि स्वीकृत किया गया है। वहीं शासन से भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपए की बजट की स्वीकृति मिली है, लेकिन विभाग के उच्चाधिकारियों की उदासीनता के कारण कार्य अटका पड़ा है। इस संबंध में प्रभारी जिला परिवहन अधिकारी सीडी जांगड़े ने बताया कि कार्यालय निर्माण के लिए एक साल पहले भूमि आरक्षित कर लिया गया है। वहीं भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपए का बजट भी है, लेकिन प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिलने से निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। स्वीकृति के बाद राशि पीडब्लयूडी के खाते में जमा करा दिया जाएगा।