अकलतरा (नईदुनिया न्यूज)। सदविप्र समाज सेवा अकलतरा के द्वारा दो दिवसीय सत्संग का आयोजन नगर के लिखमनिया धर्मशाला में किया गया। सत्संग से पूर्व सदविप्र समाज के सदस्यों के द्वारा नगर में कलश यात्रा निकाली गई। सत्संग को संबोधित करते हुए स्वामी कृष्णानंद ने कहा कि जिस घट में गुरु गोविंद के लिए प्रीति नहीं उपजती और जिस जिह्वा पर राम नाम नही आता, वह शरीर जन्म के बाद भी किसी काम का नही. लोग सोचते हैं कि अंत समय में राम नाम ले लेंगे परंतु जिसका जीवन भर अभ्यास किया है, वही अंत समय में फलता है. इसलिए गुरु गोविंद के प्रति प्रेम और भक्ति के प्रादुर्भाव के लिए गुरु सेवा, आश्रम सेवा, और कर्म योग से नेक कमाई करना भक्त के लिए श्रेयकर है। कबीर साहेब की वाणी पर प्रवचन करते हुए स्वामी ने बताया की जब गुरु का दिया ज्ञान उपजता है तो उस ज्ञान की आंधी मे मोह उड़ जाता है यदि हमने माया को पकड़ लिया तो शंकर जैसे गुरु भी मिले, शिष्य का उद्घार संभव नहीं. यदि व्यक्ति सचेत हो तो कोई भी जीवन की घटना आपके मोह को विसर्जित कर सकती है। उन्होने बताया कि मन से विश्राम पा लेना ही सन्यास है। जब मन गिर जाता है तब व्यक्ति साधुता मे उतर जाता है, और परमात्मा हमारे माध्यम से कार्य करवा लेता है. गुरु हमारे जीवन मे इसलिए आते है क्योंकि बिसारे हुए परमात्मा को हम याद कर सकें.इसलिए हमे प्रति दिन धन्यवाद करना चाहिए क्योंकि गुरु गोविंद हमे आवश्यकता और क्षमता से अधिक दिये जा रहा है। सत्संग की पूर्णाहुति मे गुरुदेव नेभारी संख्या में उपस्तिथ भक्तों को राम रसायन का पान कराया। महासत्संग में सदविप्र समाज के सदस्यों के सहित नगर वासी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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