जांजगीर-चांपा। Special Coincidence: सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या 17 सितंबर को मनाया जाएगा। यह पितृपक्ष का अंतिम दिन है। इस दिन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्घ किया जाएगा। इस दिन पितर हमसे विदा लेते हैं। ऐसे पूर्वज जिनकी मृत्यु की तारीख याद नहीं होती है या फिर फिर उनका श्राद्घ करना भूल जाते हैं तो इस दिन उन सभी भूले बिसरे पितरों का श्राद्घ कर सकते हैं।

इस दिन सभी पितरों का स्मरण किया जाता है। पं. विकास शुक्ला ने बताया कि सर्व पितृ मोक्ष के बाद ही त्योहारों का आरंभ होता है। इसके दूसरे दिन से नवरात्रि की शुरूआत होती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। क्योंकि इस बार पितृ पक्ष 17 सितंबर को ख़त्म होते ही 18 सितंबर से अधिमास या अधिकमास लग रहा है। इसी अधिमास के चलते पितृ पक्ष और नवरात्र के बीच एक महीने का अंतर आ रहा है।

165 साल बाद ऐसा संयोग

ऐसा संयोग 165 साल के बाद आ रहा है, जब अश्विन मास में मलमास लगेगा और एक महीने के बाद नवरात्र शुरू होंगे। इस साल अधिमास 18 सितम्बर से शुरू होकर 16 अक्टूबर तक चलेगा और इसके अगले दिन 17 अक्टूबर से नवरात्र शुरू होगी। सर्व पितृ मोक्ष के दिन सूर्योदय के समय गायत्री मंत्र का जाप करते हुए भगवान सूर्य को जल अर्पित करें। नदियों में स्नान करें।

घर में बने भोजन में से सर्वप्रथम गाय के लिए, फिर श्वान के लिए, कौए के लिए, चीटियों के लिए अंश प्रदान करें। पितरों को श्रद्घापूर्वक विदा करें और उनसे आशीर्वाद की प्रार्थना करें। संध्या के समय दीप प्रज्जावलित करें। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन कराएं एवं दान करें। नंगे पांव शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की उपासना करें। पीपल तथा बरगद के पौधे लगाएं। श्रीमद् भागवत गीता का पाठ करने से पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है। पितरों की कृपा से समृद्घि, सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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