जांजगीर - चांपा। जिला मुख्यालय जांजगीर में बांस - बल्लियों के सहारे झूलते करंट प्रवाहित तारों को आसानी से देखा जा सकता है। क्योंकि बिजली खंभा लगाने न तो बिजली विभाग ध्यान दे रहा है और न ही नगरपालिका प्रशासन कोई पहल कर रही है। इधर बिना बिजली के रहना भी लोगों के लिए संभव नहीं है। ऐसे में लोग बांस - बल्लियों के सहारे अस्थायी कनेक्शन लेकर काम चलाने मजबूर हैं और हर महीने डेढ़ गुना यूनिट भी भर रहे हैं, क्योंकि स्वयं से खंभा लगा पाना आम नागरिकों की बस की बात भी नहीं है। नगर पालिका जांजगीर नैला में अवैध रूप से विकसित हो रहे कालोनियों के सैकड़ों घर बांस बल्ली के सहारे पहुंची बिजली से रोशन हो रहे हैं। मकान मालिकों की जरूरत तो इससे पूरी हो गई, लेकिन स्थायी खंभे नहीं लगने से दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी हुई है।

औद्योगिकरण व शहर के चकाचौंध के चलते अब ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शहर की रूख करने लगे हैं। जिला मुख्यालय सहित चांपा, अकलतरा, सक्ती, शिवरीनारायण सहित अन्य नगरीय निकायों में जमीन की मांग बढ़ने लगी है। लगातार शहरों का दायरा भी बढ़ने लगा है, मगर जिला मुख्यालय सहित आसपास ग्रामीण क्षेत्र में शासन - प्रशासन के सारे नियमों को ताक पर रखकर खेत खलिहानों की आवासीय प्लाट के रूप में खरीदी बिक्री हो रही है। स्थिति यह है कि शहर के आसपास इलाकों में रोज कहीं ना कहीं बिना ले आउट व प्रशासन की अनुमति के ही कालोनी का नक्शा खींचा जा रहा है। जिला मुख्यालय सहित आसपास के इलाकों में इन दिनों अवैध प्लाटिंग का कारोबार जोर - शोर से चल रहा है। नगर पालिका जांजगीर - नैला व चांपा सहित अन्य नगरीय निकाय क्षेत्रों में बड़े स्तर पर अवैध प्लाटिंग का खेल चल रहा है।

यहां अवैध रूप से कालोनी विकसित करने वाले लोग कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग कर लोगों को रोड, नाली, बिजली की सुविधा उपलब्ध कराए जाने का दावा करते हुए मनमानी कीमत पर जमीन बेच रहे हैं, मगर जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद जमीन मालिक के भरोसे छोड़ देते हैं। ऐसे में जमीन मालिकों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिना मौका निरीक्षण किए ही मनमाने ढंग से अवैध रूप से विकसित हो रहे कालोनियों में लोगों की जान जोखिम में डालकर अस्थाई कनेक्शन देकर राजस्व जुटा रही है। नगर पालिका जांजगीर के वार्ड नंबर 18, 19 सहित कई वार्डों में विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अवैध रूप से विकसित हो रहे कालोनियों में बांस, बल्ली के सहारे घरों तक बिजली पहुंचाया गया है। एक - एक खंभे में 30 - 40 मीटर लगाकर सैकड़ों मीटर तक बांस व बल्लियों के सहारे तार खिंचकर बिजली पहुंचाई जा रही है।

इन कालोनियों के सैकड़ों घर बांस बल्ली के सहारे पहुंची बिजली से रोशन हो रहे हैं। मकान मालिकों की जरूरत तो इससे पूरी हो गई, लेकिन स्थायी खंभे नहीं लगने से दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी हुई है। कई माह से लगे बांस, बल्लियां सड़ने लगी है और तार झूल रहे हैं। ऐसे में तरंगित तार कभी भी टूटकर गिर सकता है। इसकी चपेट में आने से किसी की मौत भी हो सकती है, बावजूद इसके न तो जिला प्रशासन द्वारा अवैध कालोनी विकसित करने वालों के खिलापु कार्रवाई की जा रही है और न ही विद्युत वितरण कंपनी द्वारा व्यवस्था सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। विभागीय उदासीनता का खामियाजा लोगों को जान जोखिम में डालकर गुजारना पड़ रहा है।

मनमाने ढंग से दिया जा रहा कनेक्शन

नए बिजली कनेक्शन लेने के लिए उपभोक्ताओं को निर्धारित प्रारूप पर आवेदन लेकर उन्हें निर्धारित समय के लिए अस्थाई कनेक्शन दिया जाता है। अवैध रूप से विकसित हो रहे कालोनियों में कई सालों से अस्थाई कनेक्शन देकर दुर्घटना के दौरान जोखिम की जिम्मेदारी उपभोक्ताओं पर थोपकर वितरण कंपनी राजस्व जुटा रही है, जबकि यहां मागर्ोें पर मकड़जाल की तरह पुैले तरंगित तारों के टूटकर गिरने की आशंका बनी हुई है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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