जांजगीर-चांपा । जांजगीर - नैला रेलवे स्टेशन के सामने दुर्गा पूजा नो प्लास्टिक यूज की थीम पर किया जा रहा है। दुर्गा पूजा में किसी भी प्रकार के प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया जा रहा है। श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण के लिए हरे पत्ते से निर्मित दोना का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए जशपुर से दोना मंगाया गया है। वहीं भंडारा में भी स्टील के थाली, गिलास और चम्मच का उपयोग किया जा रहा है। श्रद्धालुओं को पानी पिलाने के लिए डिस्पोजल के स्थान पर अच्छी क्वालिटी के प्लास्टिक के गिलास का उपयोग किया जा रहा है जिसे सापु कर दुबारा उपयोग में लाया जाता है। इसी तरह सिंगल यूज प्लास्टिक के स्थान पर कपड़े के थैले का उपयोग किया जा रहा है।

श्री श्री दुर्गा पूजा उत्सव समिति नैला जांजगीर के द्वारा इस वर्ष रेलवे स्टेशन के सामने दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर की तरह 110 पुीट ऊंचे पंडाल में मां दुर्गा की 35 फीट ऊंची प्रतिमा स्वर्ण कमल में विराजित की गई है। माता के दर्शन और पंडाल की सजावट को देखने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग रहा है। समिति द्वारा दुर्गा पंडाल में नो पालीथिन का संदेश दिया जा रहा है। समिति द्वारा पंडाल की साज-सज्जा से लेकर पूरे आयोजन में प्लास्टिक का इस्तेमान नहीं किया जा रहा है। भंडारा व प्रसाद वितरण के लिए डिस्पोजल के स्थान पर कागज के पत्तल, गिलास, दोना आदि का इंतजाम किया गया है। श्रद्धालुओं को पुड़ी सब्जी, खीचड़ी, खीर पुड़ी, हलवा प्रतिदिन अलग अलग प्रकार के प्रसाद का वितरण समिति के द्वारा किया जाता है। जिसके लिए पहले डिस्पोजल का उपयोग किया जाता था। श्रद्धालु प्रसाद खाने के बाद उसे इध्ार उध्ार पुेक देते थे। प्लास्टिक के उपयोग से कचरा अध्ािक होता था । प्लास्टिक से होने वाले नुकसान को देखते हुए समिति ने निर्णय लिया कि दुर्गा पूजा में प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष राजेश पालीवाल ने बताया कि श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण के लिए हरे पत्ते से निर्मित दोना का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए जशपुर से दोना मंगाया गया है। वहीं भंडारा में भी स्टील के थाली, गिलास और चम्मच का उपयोग किया जा रहा है। श्रद्धालुओं को पानी पिलाने के लिए डिस्पोजल के स्थान पर अच्छी क्वालिटी के प्लास्टिक के गिलास का उपयोग किया जा रहा है। सिंगल यूज प्लास्टिक के स्थान पर कपड़े के थेले का उपयोग किया जा रहा है। सरकार नो प्लास्टिक के लिए इतने अभियान चला रही है तो समिति भी इसमें सहभागिता निभा रहे हैं। इसलिए माता के दरबार में जहां पालीथिन पर बैन लगाया गया है। वहीं कई संस्था वाले नो पालीथिन का संदेश देने के लिए कपड़े के थैले बांट रहे हैं। धार्मिक स्थलों व सार्वजनिक स्थानों में होने वाले कार्यक्रमों में ज्यादातर प्लास्टिक के प्लेट और पानी के लिए डिस्पोजल गिलास या पानी के पाउच का इस्तेमाल होता है और उसी से गंदगी भी होती है। ऐसे पहल से होने वाले कचरे और गंदगी से बचा जा सकता है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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