डभरा (नईदुनिया न्यूज )। साराडीह बैराज से उद्योगों को पानी दिया जा रहा है लेकिन प्रभावितों को राहत के नाम पर कुछ नहीं मिलने व उद्योग नीति के उल्लंघन के विरोध में ग्रामीणों ने आज धरना दिया। एसडीएम के चर्चा के बाद धरना समाप्त हुआ।

साराडीह, सकराली, पुरैना, उपनी के प्रभावित किसान पूर्व मंत्री नोवेल कुमार वर्मा के नेतृत्व में साराडीह बैराज के पास धरने पर बैठे थे। प्रभावितों की मांग थी कि शासन प्रशासन द्वारा अनुसूची 2 के कंडिका 4 का पालन नहीं किया गया है, जिसमें साफ है कि अगर किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाती है तो उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी या पांच लाख रुपए दिया जाना है, वहीं धारा 80 अंतर्गत प्रभावितों को मुआवजा की राशि में देरी पर ब्याज का भी प्रविधान है जिसमें शून्य से 2 वर्ष अंतर्गत 9 प्रतिशत व 2 वर्ष से अधिक समय के लिए 15 प्रतिशत प्रतिवर्ष के हिसाब से मूलधन का ब्याज भी दिया जाना है। साथ ही उद्योग नीति की कंडिका 15 जिसमें प्रभावित किसानों को शासन द्वारा रजिस्ट्री शुल्क छूट प्रमाण पत्र भी नहीं दिया गया है, वहीं सिंचाई विभाग की ओर से डूबान क्षेत्र का पूरा सर्वे भी नहीं किया गया है जिससे बहुत से किसान आज भी दर दर भटक रहें हैं। उधा न्यायालय के आदेश के बाद भी प्रभावितों को न्याय अभी तक नहीं मिला है, वहीं प्रभावित गांव के किसानों द्वारा कलेक्टर के पास भी गुहार लगाई गई लेकिन वहां भी उनकी सुनवाई नहीं हुई ऐसे में किसानों नेपूर्व मंत्री नोवेल कुमार वर्मा के साथ बैराज के ऊपर ही धरना दिया । नोवेल कुमार वर्मा ने कहा कि यह वही साराडीह बैराज है जिसके लिए कांग्रेस विपक्ष में थी तो राष्ट्रीय नेताओं के नेतृत्व में पदयात्रा किया गया था। उस समय आंदोलन का लाभ आधा अधूरा मिला था लेकिन जब प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में है तो अब क्यों पीड़ितों की बात नहीं सुन रही है। वर्मा ने आगे कहा कि स्थानीय किसानों की जमीन तो 2013 से ही डूबान में आ गई थी मगर भाजपा की सरकार ने मुआवजा प्रकरण 2017 की स्थिति में बनाया उसे भी किसानों ने माना लेकिन हद तब हो गई जब किसानों का मुआवजा देने में सरकार के हांथ पांव फूलने लगे। जबकि बैराज से जो भी उद्योग पानी का दोहन कर रहें हैं वे किसानों का मुआवजा दे रहे हैं । आज भी कई किसानों की जमीन का मुआवजा प्रकरण नहीं बना है जिसमें सिंचाई विभाग के अधिकारी कर्मचारी सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। धरने में बैठे पीड़ित किसान लोक नाथ श्रीवास नेकहा कि कंपनी और शासन प्रशासन द्वारा हमें लगातार छला गया गया है। पीड़ित किसान दौलत मैत्री ने कहा कि 10 साल से अधिक का समय बीतने के बाद भी आज तक मुआवजे का एक रुपया भी नहीं मिला है और न ही वह अपनी जमीन पर खेती कर पा रहा है। चैतराम टंडन ने कहा कि जब तक प्रकरण का पूरी तरह से निराकरण नहीं हो जाता तब तक इस बैराज से एक बूंद पानी भी कंपनियों को न दिया जाए। धरना की सूचना पर एसडीएम डभरा दिव्या अग्रवाल मौके पर पहुंची और प्रभावितों किसानों को समझाईश दी। यहा उधा न्यायालय के अधिवक्ता कमल किशोर पटेल नेएसडीएम को उच्च न्यायालय के आदेश की कॉपी दी। उन्होंने यह भी बताया कि धारा 80 को लेकर उनके ही द्वारा अपने अधिवक्ता साथियों के साथ प्रभावितों को न्याय दिलाने उधा न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया था, जिस पर सभी नेता, प्रभावित ग्रामीणों की बातों को सुन एसडीएम अग्रवाल ने 15 दिवस के अंदर मामले का पूरी तरह से नियमानुसार निराकरण का आश्वासन दिया। जिसके बाद पीड़ित पक्ष और नेतृत्व कर रहे नेता नोवेल वर्मा व किसानों के कानूनी सलाहकार कमल किशोर पटेल ने आपसी चर्चा कर प्रशासन की 15 दिनों की मोहलत को स्वीकार कर धरना समाप्त किया। एसडीएम नेमौके पर ही उपस्थित तहसीलदार व सिंचाई विभाग केकर्मचारियों को शीघ्र सर्वे पूर्ण कर प्रकरण की निराकरण की बात कही। इस अवसर पर किसान नेता सम्मेलाल गबेल, शिवा नारंगे, दिनेश नामदेव सहित बड़ी संख्या में उपस्थित थे। आंदोलन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने एसडीओपी बी एस खुटिया, सक्ती टीआई रूपक शर्मा, डभरा टीआई डीआर टंडन व पुलिस कर्मी उपस्थित थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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