जशपुरनगर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। प्रदेश सरकार ने खरीफ फसल को मवेशियों से बचाने के लिए 20 जून से रोका छेका अभियान शुरू करने का निर्देश प्रदेश के सभी कलेक्टर और जिला पंचायत के सीईओ को जारी किया है। कृषि उत्पादन आयुक्त ने कलेक्टरो को जारी किए गए निर्देश में किसानों की फसल को सुरक्षित रखने के लिए गोठानों में मवेशियों को रखने की व्यवस्था करने के साथ,चरवाहों का भी प्रबंध करने को कहा है। रोका छेका के इस आहट के बीच शहर की सड़कों में स्वछंद रूप से विचार रहे निराश्रित मवेशी न तो नगर सरकार को नजर आ रहें हैं और ना ही प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को। लापरवाहीं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नगर सरकार अब तक शहरी गोठान को सरकारी फाइलों से जमीन में उतारने में पूरी तरह से विफल साबित हुई है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना रोका छेका अभियान के शोर के बीच,जिले भर की सड़कों पर मवेशियों को डेरा जमाएं देखा जा सकता है। इन निराश्रित मवेशियों को सुरक्षित करने के लिए प्रदेश सरकार सुराजी गांव योजना के तहत गोठान का निर्माण कराया है। लेकिन जिले के अधिकांश गोठान सूने पड़े हुए हैं। बीते साल भर में पालिका ने बेसहारा मवेशियों के लापरवाह मालिको पर कार्रवाई करने पर भी पसीना छूट रहा है। नगरपालिका के रिकार्ड के अनुसार नगरीय क्षेत्र में 122 मवेशी पालक हैं। इनमें से मात्र 77 पालकों ने ही पालिका में पंजिकरण कराया है। उन्होनें बताया कि एक साल के दौरान सड़कों में भटक रहे मवेशियों के 25 मामलों में जुर्माने की कार्रवाई करते हुए 16 हजार रूपए का जुर्माना वसूला है। जाहिर है,नगर सरकार की यह कार्रवाई ना तो लापरवाह मवेशी पालकों पर दबाव बना पा रही है और ना ही मवेशियों को राहत।

सड़कों पर ही डेरा जमाएं हुए हैं मवेशी

प्रदेश सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी नरवा,गरूवा,घुरूवा और बाड़ी योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों के पालतू मवेशियों को व्यवस्थित करना था। लेकिन फिलहाल योजना अपने लक्ष्‌य से शहर में काफी दूर नजर आ रही है। नगर पालिका क्षेत्र में निराश्रित मवेशियों को संरक्षित करने में प्रशासन अब तक पूरी तरह से विफल रहा है। मंगलवार की रात को नईदुनिया ने शहर के मुख्य सड़कों का जायजा लिया। इस दौरान भागलपुर चौक,रणजीता स्टेडियम चौक,आंबेडकर चौक,महाराजा चौक के आसपास ढेर सारे मवेशी सड़क पर ही डेरा जमाए नजर आए। खास बात रही कि स्ट्रीट लाइट बंद होने से सड़कें अंधेरे में डूबी हुई थी। सड़क के बीच में मवेशियों के बैठे रहने से वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

वर्जन

जमीन की कमी की वजह से शहरी गोठान निर्माण में परेशानी हो सकती है। इसके विकल्प के रूप में आवर्ती चराई बनाने का प्राविधान है।

शिव डहरिया,नगरीय प्रशासन मंत्री,छग शासन

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Posted By: Nai Dunia News Network

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