जशपुरनगर। ग्राम लुड़ेग में वित्तीय अनियमितता में कार्रवाई नहीं होने का मामला तूल पकड़ने लगा है। उल्लेखनीय है कि मामले की जांच में शासकीय राशि में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की पुष्टि हुई है, जिसमें सरपंच व सचिव दोनों को ही दोषी पाया गया है। जांच को पूरा हुए महीनों बीत जाने के बाद भी दोषी सरपंच व सचिव के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से नाराज पंचों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर सामूहिक रूप से त्यागपत्र देने की पेशकश की है। उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत लुड़ेग एक अर्से से वित्तीय गड़बड़ी को लेकर चर्चा का केंद्र रहा है। सरपंच एवं सचिव पर यहां संचालित शासकीय योजनाओं की राशि में कई बार गड़बड़ी करने के आरोप लगे हैं। आलम यह है कि इसके विरोध में सरपंच को अविश्वास प्रस्ताव का भी सामना करना पड़ चुका है। परंतु इसके बाद भी अब तक सरपंच एवं संचिव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसे लेकर जहां स्थानीय लोगों में आक्रोश है वहीं पंचों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। पंचायत के उपसरपंच विजय चौहान और अन्य पंचों तथा ग्रामीणों की मानें तो पंचायत में हुई गड़बड़ी के मामलों में कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है। परंतु पहले तो मामले में जांच को लटकाकर रखा गया। थक हार कर ग्रामीणों की ओर से जनचौपाल में शिकायत की गई। परंतु जुलाई 2022 में हुई शिकायत में भी जांच लटकती रही। 5 महीनों के बाद जाकर जांच हुई और इसमें शिकायतों की पुष्टि भी हुई परंतु इसके बाद भी कार्रवाई का मामला अटका पड़ा रहा। परंतु 2 जनवरी को जनपद सीईओ द्वारा कलेक्टर को कार्रवाई के संबंध में प्रतिवेदन भेजे जाने से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद जगी थी। उन्होंने बताया कि सीईओ ने शासकीय राशि की दोषियों से वसूली के साथ ही अनियमितता के दोषी सरपंच व सचिव के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई किए जाने की बात कही थी। परंतु अब भी मामला जस का तस बना हुआ है। दंडात्मक कार्रवाई तो दूर अभी तक शासकीय राशि की वसूली के लिए भी विभाग की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है। इससे नाराज पंचों ने सामूहिक रूप से अपने पद से त्यागपत्र देने की पेशकश की है। सोमवार को एसडीएम से मुलाकात कर उन्होंने इसे लेकर अपनी मंशा जाहिर की है। जनपद सीईओ का कहना है कि उनके द्वारा कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को पत्र भेज दिया गया है। परंतु इसे भी एक माह होने को है। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होना पंचायत विभाग की कार्यप्रणाली को उजागर करने के लिए काफी है। उन्होंने एक बार फिर कार्रवाई होने का भरोसा दिलाया है।

राजनीतिक दबाव की आशंका

उपसरपंच विजय चौहान ने दोषी सरपंच व सचिव के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने के पीछे राजनीतिक दबाव की आशंका जाहिर की है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद उच्चाधिकारियों द्वारा मामले में रूचि नहीं लेने से अधिकारियों की मंशा स्पष्ट है। वहीं जनचौपाल में शिकायत के बाद भी पांच महीनों बाद जांच और इसके भी दो महीने बाद तक कोई कार्रवाई नहीं होने से इस मामले में राजनीतिक दबाव की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। वहीं इससे यह भी संकेत मिलते हैं कि मामले में सत्ताधारी दल से जुड़े प्रशासनिक मशीनरी में दखल रखने वाले किसी नेता का हाथ है। उनका कहना है कि जांच में लाखों रुपये की बंदरबांट की पुष्टि के बाद भी लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने से कांग्रेस सरकार की कलई खुल गई है वहीं इससे आम लोगों का सरकार के प्रति भरोसा कम हुआ है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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