जशपुरनगर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। श्रम विभाग में उजागर हुए मानदेय घोटाला की परतें अब उधडने लगी है। मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना में हुए इस फर्जीवाड़े की जांच में पुष्टि के बावजूद विभाग के आला अधिकारियों द्वारा कार्रवाई ना किए जाने से अफसरों की भूमिका भी संदेह के दायरे में है।

मामला पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के कार्यकाल की है। श्रम विभाग ने मुख्यमंत्री कौशल योजना के तहत भवन निर्माण में लगे हुए मजदूरों को इलेक्ट्रिकल्स और राजमिस्त्री के रूप में प्रशिक्षित करने के लिए अभिनंदन एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी को विटीटीपी आबंटित किया था। संस्था ने जिले के पत्थलगांव तहसील के कोतबा क्षेत्र के 60 मजदूरों का पंजीकरण कर प्रशिक्षण दिया था। इस पूरे मामले में विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब श्रम विभाग में तात्कालिन कल्याण अधिकारी रमेश यादव ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले श्रमिको को दिया जाने वाला मानदेय की राशि को अपने रिश्तेदारों के खाते में मंगा ली थी। मामला उजागर होने पर श्रम विभाग ने इसे पूरे मामले की जांच भी कराई थी,जिसमे तात्कालीन कल्याण अधिकारी के कारनामे की पुष्टि हुई थी। लेकिन विभाग ने श्रमवीरो से की गई दगाबाजी के इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं कि है।

अब सामने आया झूठा शपथ पत्र का मामला

मानदेय राशि भुगतान में हुई गड़बड़ी के बाद अब विटीटीपी प्राप्त करने वाली एनजीओ द्वारा झूठा शपथ पत्र प्रस्तुत किए जाने का मामला भी उजागर हुआ है। दरअसल,विटीटीपी प्राप्त करने के लिए एनजीओ अभिनंदन एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष रमेश यादव ने एक शपथपत्र प्रस्तुत किया था,जिसमे उन्होंने स्वयं के किसी शासकीय पद में कार्यरत ना होने की जानकारी दी थी। जबकि इसी समय वे श्रम विभाग में कल्याण अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। झूठा प्रमाणपत्र की पुष्टि भी जांच में हो चुकी है। मामले में आश्चर्य की बात है कि इस शपथ पत्र में बतौर गवाह,श्रमविभाग के ही एक कर्मचारी का हस्ताक्षर है। साफ है कि इस पूरे मामले में श्रमविभाग के कर्मचारियों की संलिप्त हैं। लेकिन कार्रवाई के नाम पर विभाग के अधिकारी फाइल को दबाए हुए बैठे हुए हैं।

जांजगीर पुलिस ने किया गिरफ्तार

श्रम विभाग के इस पूर्व विवादित अधिकारी के खिलाफ जांजगीर पुलिस ने धारा 420 के तहत ठगी करने का अपराध कायम किया है। पुलिस द्वारा दर्ज किए गए अपराध के अनुसार आरोपित रमेश यादव ने मुख्यमंत्री कौशन उन्यन योजना के हितग्राहियों को मिलने वाले मानदेय की राशि को अपने और अपने रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर दिया था। इस पूरे मामले की जानकारी प्रार्थी सुरेश कुर्रे ने सूचना का अधिकार के तहत प्राप्त कर,शिकायत की थी। शिकायत की जांच के बाद,आपराधिक प्रकरण दर्ज कर,जांजगीर पुलिस पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की है। जबकि,जशपुर जिले में अधिकारी अब तक हाथ पर हाथ धरे हुए बैठे हुए है।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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