जशपुरनगर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। मेडम हमारे बच्चे को हमें वापस दिला दीजिए। उसकी शक्ल पूरी तरह से हमसे मिलती है। अस्पताल वालों ने छलपूर्वक हमसे हमारे बच्चे को अलग कर दिया है। यह दिलचस्प वाक्या मंगलवार को राज्य महिला आयोग की जन सुनवाई के दौरान एक बार फिर सामने आया। जन सुनवाई कर रही महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती किरण नायक ने सामने उपस्थित हुए बुजुर्ग दंपत्ति और अस्पताल प्रबंधन से पूरे मामले की जानकारी। बीते साल इस मामले की सुनवाई के दौरान दंपत्तियों के डीएनए परीक्षण के आदेश के परिपालन में हुई कार्रवाई की जानकारी लेते हुए,उन्होनें शासकीय खर्च पर रायपुर में डीएनए टेस्ट कराने की व्वस्था कराने का निर्देश कलेक्टर को देते हुए,डीपीओ अरूण पांडेय को इस संबंध में आवश्यक प्रबंध करने की जिम्मेदारी सौंपी। सुनवाई के दौरान प्रार्थी दंपत्ति बेहद भावुक नजर आया।

दरअसल जिले के दुलदुला थाना क्षेत्र के एक गांव के रहवासी दंपत्ति ने प्रसव के दौरान एक निजी अस्पताल पर बच्चा बदलने का आरोप लगाते हुए,याचिका लगाई है। दंपत्ति का कहना है कि अस्पताल ने उन्हें मृत बालिका थमा दिया था जबकि उन्हें एक बालक की प्राप्त हुई थी। उनका दावा है कि यह सच्चाई अभी कुछ साल पहले उनके सामने उजागर हुई,जब युवा अवस्था प्राप्त कर चुका उनका बच्चा उनके सामने आया। महिला ने आयोग की अध्यक्ष को बताया कि उसके बेटे का माथा और चेहरे का उपरी हिस्सा उससे मिलता है। अध्यक्ष श्रीमती नायक का कहना है कि दोनों दंपत्ति के डीएनए परीक्षण के बाद मामला स्पष्ट होने की उम्मीद है।

सेवानिवृत्त फौजी पेंशन से जमा होगी जीवन निर्वाह भत्ता

महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान एक मामले में सीमा सुरक्षा बल के सेवानिवृत्त जवान को अध्यक्ष डा श्रीमती नायक ने जमकर फटकार लगाई। उन्होनें पिछली सुनवाई में जवान को पत्नी को 10 हजार रूपए प्रतिमाह जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान न किए जाने पर नाराजगी जताई। इस दौरान जवान ने अपने कम पेंशन,माता पिता की सेवा का हवाला देते हुए भत्ता देने में असमर्थतता जताया। लेकिन उसकी सभी तर्कों को खारिज करते हुए आयोग ने जवान की पत्नी के लिए 10 हजार रूपए,जवान के पेंशन से काट कर सीधे,पत्नी के खाते में जमा करने के लिए बीएसएफ की सक्षम अधिकारी को आयोग के निर्णय की जानकारी देने का आदेश जारी कर दिया।

बिखरने से बचा परिवार

घरेलू विवाद की वजह से तलाक की कगार पर पहुंच चुके एक दंपत्ति का सुलह करा ,महिला आयोग ने एक परिवार को बिखरने से बचा लिया। आयोग के सामने यह मामला दंपत्ति ने बच्चे के संरक्षण का अधिकार पाने की उम्मीद से लगाया था। आवेदिका बीते डेढ़ साल विवाद होने के कारण मायके में निवास कर रही थी। मां ने अपने दो बच्चों के देखभाल का अधिकार प्राप्त करने के लिए बाल कल्याण समिति में आवेदन लगाया था। आवेदन पर समिति ने अनावेदक के पक्ष में निर्णय दिया था। दोनों पक्षों की बातें सुनने के बाद अध्यक्ष ने बंद कमरे में दंपत्ति की काउंसिलिंग करने का निर्देश दिया। निर्देश पर आयोग की अधिवक्ता सुश्री शमीम रहमान के साथ बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष श्रीमती निर्मला जांगड़े एवं सदस्य विजय गुप्ता दंपत्ति की काउंसिलिंग कर उन्हें सुलह के लिए तैयार किया। दंपत्ति के लिए सात बिंदु वाले राजीनामा पत्र तैयार करने के साथ ही आयोग ने इस पूरे मामले में एक साल तक सतत निगरानी करने का निर्देश सीडब्लूसी के पदाधिकारियों को दिया है। इस जनसुनवाई के लिए कुल 14 प्रकरण सूचीबद्व किए गए थे। इनमें से 9 प्रकरणों को सुनवाई के बाद आयोग ने नस्तीबद्व कर दिया। इस दौरान महिला आयोग की सदस्य श्रीमती नीता विश्वकर्मा,अधिवक्ता सुश्री शमीम रहमान,डीपीओ अरूण पांडे,बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष निर्मला जांगड़े सहित पुलिस विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

बिजली हुई गुल,मोबाइल के टार्च का लिया सहारा

कलेक्टर कार्यालय के विशेष सभा कक्ष में हुई महिला आयोग की सुनवाई के दौरान बिजली की आंख मिचौली ने सुनवाई कर रहे आयोग के पदाधिकारी,पक्षकारों को खूब परेशान किया। सुनवाई के दौरान बिजली गुल हो जाने से दो तीन बार ऐसी नौबत आई कि आयोग को मोबाइल की टार्च की रोशनी में सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी। हालांकि जनरेटर की व्यवस्था होने से अधिक परेशानी नहीं हुई।

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