अंबिकापुर, जशपुर Locust Swarm Attack । राजस्थान से आगे बढ़ते हुए टिड्डी का दल मध्यप्रदेश के सिंगरौली होते हुए छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ रहे हैं। कोरिया, सूरजपुर, अंबिकापुर और जशपुर जिले के किसानों को खासतौर पर अलर्ट किया गया है। इस क्षेत्र में टिड्डी दल के फसलों पर आक्रमण की आशंका जताई जा रही है। हवा के प्रवाह की दिशा में ये तेजी से आगे बढ़ते हैं। इस लिहाज से इन चारों जिलों की सीमा से गुजरते हुए टिड्डी दल के छत्तीसगढ़ में प्रवेश की आशंका जताई जा रही है।

छत्तीसगढ़ में खेती पर टिड्डी दलों के हमले का खतरा फिलहाल नहीं है। लेकिन किसानों को सतर्क रहना होगा। मौसम बदलने के साथ ही खेतों पर टिड्डी दल हमला कर सकते हैं। इधर, कृषि विभाग का दावा है कि जशपुर जिले में टिड्डी दलों के हमले का खतरा फिलहाल नहीं है।

कृषि उप संचालक एमआर भगत ने नईदुनिया को खास भेंटवार्ता में बताया कि टिड्डियों का दल हवा के रूख के अनुसार चलता है। फिलहाल, हवा पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित हो रही है। इसलिए जिले में इनके आने का खतरा नहीं के बराबर है। लेकिन मौसम में अचानक कोई परिवर्तन होता है, तो जशपुर जिला भी इस खतरे के जद में आ जाएगा। इसे देखते हुए विभाग अलर्ट मोड पर है।

उप संचालक भगत ने बताया कि टिड्डी दलों से निबटने के लिए जिले में दवाओं का पर्याप्त भंडारण किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने अलर्ट जारी किया है। सरकार के निर्देश के मुताबिक विभाग तैयारी में लगा हुआ है। प्रदेश में टिड्डी दलों के उत्तरप्रदेश की ओर घुसपैठ करने की आशंका जताई जा रही है। इस​ लिहाज से कोरिया और बलरामपुर जिले को सबसे अधिक संवेदनशील माना जा रहा है। लेकिन बलरामपुर जिले से जशपुर की सीमा लगी हुई है। इसलिए,जशपुर भी इस खतरे की जद से बाहर नहीं है।

इन देशों से होते हुए आया है टिड्डी दल

जानकारों के मुताबिक टिड्डी दल अफ्रीकी देशों से होकर यमन,अफगानिस्तान, इरान और पाकिस्तान होते हुए भारत में प्रवेश किया है। इन कीटों ने राजस्थान और गुजरात के बाद अब दूसरों राज्यों में टिड्डीयों का कहर टूट रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक टिड्डीयों का यह दल सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सफर कर सकता है। इतना ही नहीं मौसम और स्थानीय जलवायु के अनुसार अपने खाने व रहने की आदतों में परिवर्तन करने की क्षमता भी इनमें होती है।

इस बार गंभीर है समस्या

टिड्डी दलों के हमले का सामना किसानों ने पहले भी कई बार किया है। लेकिन कृषि ​वैज्ञानिक इस बार समीप के राज्यों में हुए हमले को अधिक गंभीर मान रहे हैं। बताया जा रहा है कि अफ्रीकी देशों में हुई बारिश ने इन टिड्डी दलों की प्रजनन क्षमता को बढ़ाया है। नम जलवायु के कारण 90 दिन के जीवनकाल में टिड्डीयों ने तीन बार प्रजनन किया।

इस वजह से पाकिस्तान पहुंचते-पहुंचते टिड्डीयों के इस दल का आकार वृहद हो गया और सबसे अधिक नुकसान पाकिस्तान को उठाना पड़ा है। वहीं पाकिस्तान की सीमा से लगे हुए भारत के राज्य पंजाब, गुजारत और राजस्थान में भी तबाही देखने को मिल रही है। अब इस समस्या की जद में उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के साथ छत्तीसगढ़ भी आ गया है।

रबी फसल पर सबसे अधिक खतरा

टिड्डी दलों के हमले का सबसे अधिक प्रभाव रबी सीजन की फसलों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इनमें गेंहू के साथ दलहन और तिलहन की फसलें शामिल हैं। उत्तरप्रदेश में टिड्डीयों से निबटने की व्यापक तैयारी किए जाने का दावा किया गया है। यहां 6 सौ ट्रेक्टर कीटनाशक के छिड़काव से टिड्डीयों को नेस्तनाबूद किया जाएगा। जशपुर में इस समस्या के प्रवेश करने पर गेंहू, मिर्च,टमाटर के साथ सब्जियों की फसलें प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

'हवा का रूख पूर्व से पश्चिम होने के कारण फिलहाल जशपुर जिले में टिड्डी दल के हमले का खतरा नहीं है। शासन द्वारा जारी किए गए अलर्ट के मुताबिक समस्या से निबटने की पूरी तैयारी हमने कर ली है।' - -एमआर भगत, उप संचालक,कृषि,जशपुर.

Posted By: Anandram Sahu

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