Jaspur News: जशपुर नगर। सावन महीने भर मानसून की आंख मिचौली से हलाकान रहे किसानों ने,भादो माह में मेघ की मेहरबानी से ठीक से राहत की सांस भी नहीं ले पाए थे कि भारी संख्या में हाथियो के दल के कहर ने किसानों का जीना मुहाल कर दिया है। हाथियो के कहर से इन दिनों जिले के तपकरा,कुनकुरी,कांसाबेल,दुलदुला वन परिक्षेत्र बुरी तरह से दहल रहें है। इन इलाकों में 65 हाथी अलग अलग दल में और अकेले भटक रहे हैं। सबसे अधिक प्रभावित तपकरा रेंज है।

यहां 41 हाथी डेरा जमाएं हुए हैं। अतिकायो के निशाने पर खेत मे तैयार हो रहे धान,मक्का और दलहन की फसलें हैं। सुबह से लेकर रात तक हाथी इन खेतो में लहलहा रहे फसलों की दावत उड़ा रहे हैं। किसानों के सामने एक ओर फसल बचाने की चिंता है,तो दूसरी ओर रखवाली के दौरान,इनके हमले का खतरा भी बना हुआ है।

बदल गया है हाथियों का स्वाद

लगातार मानव बस्ती के सम्पर्क में रहने से हाथियो के व्यवहार में बदलाव देखने को मिल रहा है। सामान्य रूप से हाथी वन्य क्षेत्रो में मिलने वाले वनस्पतियों के पत्ते और कोमल शाखाओं को खा कर पेट भरते हैं। लेकिन,लंबे अरसे से धान खाते रहने के कारण हाथी अब इसके आदि हो चुके हैं। यही कारण है कि हाथी जंगल छोड़ कर खेतों में भोजन तलाश कर रहें हैं। फसल कटने के बाद हाथी धान और चावल की तलाश में घरों को नुकसान पहुँचाते है।

अब वन विभाग खिलाएगा हाथियो को धान

हाथियों को बस्ती में घुसने से रोकने के लिए वन विभाग इन दिनों हाथियो को धान खिलाने का प्रयोग कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक लोकेशन के आधार पर जंगल किनारे धान छोड़ दिया जाता है,ताकि खुश्बू पा कर हाथी आए और खा कर लौट जाए। हालांकि शुरुआती दौर में इस प्रयोग का उत्साहजनक परिणाम नहीं मिल पाया है। अधिकारी इसमे कुछ परिवर्तन करने पर विचार कर रहें हैं।

Posted By: sandeep.yadav

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